ये जो मेरा बिहार है, इसे तुम यूँ ना पुकारो |

ये जो मेरा बिहार है,
इसे तुम यूँ ना पुकारो,
दुःख होता है मुझे,
जन्मभूमि जो है,
सपूत जो हूँ इसका,

मेरी पहली सांस को,
२००० सालों का आशीर्वाद प्राप्त है,
हर एक बूँद शोणित का,
जो मेरे रगों में है,
वीर कुंवर का रक्तांश है।
जो ज्ञान मेरे मस्तिष्क में है,
वह मुझे नालंदा, विक्रमशिला
वैशाली से मिला है।
क्रोध भाव का अट्टाहास ये मेरा,
शेर शाह ने दिया है।
तो यह निर्मल मन भी,
उस महान सिद्धार्थ की देन है।
चतुरार्थ का यह जो तेज, तुम्हें,
मेरे माथे पर दिखता है,
वह कौटिल्य के मुखार्विन्द,
का एक लेश मात्र हिस्सा है।

पवित्रता मुझे गंगा से,
विरासत में मिली है।
सादगी का पाठ मुझे ,
महावीर ने पढ़ाया है।
संकट आन पड़ी जब जब,
भारत माता पर,
बिहारी सपूतों ने,
भी रक्त अपना बहाया है।
बोली में हमारी मैथिल सी मधुरता,
तो भोजपुर का कटार भी है।
राष्ट्रपिता का परम भक्त,
भी हमारे घर से ही आया है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ नारा भी,
जे० पी० ने यहीं से लगाया है।
देश का मुखिया कोई आज तक,
बिहार के आशीर्वाद बिना बन न पाया है।

फिर आज जब चाँद बुरे लोगों की बदौलत,
बिहार लड़खड़ाया है,
तुमने उसे दुत्कारा है।
पर याद रख लो……

साड़ी कुरीतियों को कुचल,
बुरे कर्मों से तौबा कर,
उदयमान होगा एक दिन जब,
सूरज बिहार का,
तब तुम्हारी कड़वाहट को भुला
सीने से लगा लेगा तुम्हें।
समाहित कर लेगा अपने दिल में,
क्लेश ये तुम्हारा,
तुमने बिहारियों को अभी,
नहीं पहचाना है।
कुछ ऐसा ही बिहार हमारा है….!

-Abhisheik Shandilya

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