वेलेंटाईन इन बिहारी इस्टाईल

By Neha Nupar

आज वेलेंटाईन डे हैं। चलिए आपको दिखाते हैं कईसे मनाया जाता है “वेलेंटाईन इन बिहारी इस्टाईल”| सबसे पहिले त भईया हम बता दें, ई जो आपलोग वेलेंटाईन डे कहते हैं न, ई सब हमको सूट नहीं करता है, हम तो बेलेन्टाईन डे कहते हैं| हमारा हर चीज़ का अपना एगो अलगे इस्टाईल है| बात पढ़े-लिखे का हो, घुमे-फिरे का, पहिने-ओढ़े का, बोले-बतियावे का या फिर मुहब्बत करे का| अपना अलगे इस्टाईल होता है| कब्बो बिहार आओ तो डिटेल में बतायेंगे अपना इस्टाईल| बाकि इहाँ तो हम इहे बता सकते हैं कि बेलेन्टाईन दिन को भी हम अपने ही तरीका से मनाते हैं| तब्बे तो ई गाना आ गया न मार्किट में “बेलेन्टाईन डे मनायीं ए बबुआ, हम बिहारी इस्टाईल में” | आपका एकक गो दिन हमारा एकक गो महिना समझना, बाकि सब जे है से हयिये है |

शुरुआत करते हैं

नजरी दिवस :-

पहिला दिन जब “उनको” दूर से देखे, उहे बन गया अपना “नजरी दिवस”| माने जो भी कहो “इशक” की शुरुआत तो वहीं से हुई मानी जाएगी न| और फिर यही कार्यक्रम चलाते रहो जब तक दुसरका डे ना आ जाए|

नयन चार दिवस :-

खाली आप ही का नजर “उन” पर जाए त कौनो बात नहीं बना, “उनकी” नज़र भी देखे जिस दिन आपको वही हुआ आपका “नयन चार दिवस” | अब अगिला एक महिना ऊ आपको देखें और आप उनको देखें, उतने ही दूर से (उ का कहते हैं, विदाउट इंटेंसन)|

सुनिए दिवस :-

फिर पहिली बार, गलती से ही सही उ आयें और कहें “सुनिए” और आप तपाक से उनके “सुनिए” को भी गौर से “सुनने” लग जाएँ| यही तो वो दिन है जिसका अब तक इन्तेजार किये थे, और जिसका पूरी जिन्दगी सेखी बघारना है कि “पहिले उहे बोली/बोले थी/थे”| अब एक महिना उनकी हर बात उतने ही गौर से “सुनिए” तब जा के अगिला इस्टेप आएगा।

विस्वास दिवस :-

लीजिये, अब कुछ काम आईये उनके| कुछ कहें हैं वो, आपके लायक कुछ टास्क दिए हैं| कम्पलीट करिये| हाँ आप करेंगे ही, टास्क चाहे जितना भारी हो, चाहे आपके मन मुताबिक हो या ना हो| पहिला बार अपने बिस्वास से नवाजे हैं “वो”| मनाते रहिये ई दिवस एक महिना ताकि साचो बिस्वास जम जाए।

सोचन दिवस :-

दिन-रात अब उनका ही ख़याल रहने लगेगा, सोचने लगेंगे| उनके बोले हुए “शब्द” और साथ में उनका बोलने का सलीका…आए!! हाय!! क्या इस्टाईल है! क्या मिठास है शब्दों में! वाह !! मानिए कि बेहतरीन हैं वो| समझिये कि “बर्ल्ड बेस्ट” हैं वो| सोचते रहिये … एक महिना टाइम है|

कुछ-कुछ होता है दिवस :-

जी ! अब टाइम आ गया है कि कुछ-कुछ होने लगे, अर्थात् उनके सामने जाने पर शरम आने लगी है अब आपको| जाने का-का सोच डाले है| मिलेंगे तो ई कहेंगे, ऊ कहेंगे| कल्पना में उनका जवाब भी आ जाता है| लेकिन नहीं, कह नहीं पाएंगे कुछ भी, कर नहीं पाएंगे कुछ भी| शरमा रहे हैं शाब| हिचकिचा रहे हैं| अरे!!! कहीं डेरा तो नहीं गये हैं न! उनसे नहीं, उनके परिवार वालों से!! ही ही ही !! चलिए ठीक है| एक महिना इहे होगा| नकार दिवस :- जी! आपका वाला प्रेम दिवस! बेलेन्टाईन डे! आ ही गया फाइनली| दुनिया को “इश्क नहीं आसाँ” कह-कह के “इश्क” सिखाने वाले “ग़ालिब” साहब कह गये हैं “इनकार जैसी लज्ज़त इकरार में कहाँ”| तो साहब! प्रेम किये हैं, दिन-रात सोचे हैं, कल्पना में बसाए हैं, रोये हैं- हंसाये हैं, तो अब ये पूरी जिंदगी का साथी रहेगा ही न| इकरार कर दें “वो” तो प्रेम का चैप्टरवे क्लोज हो जायेगा| अब जो “इनकार” किये हैं तो हर “चेहरा” उन्हीं का नज़र आएगा| अपने आप को भी देखते रहेंगे “उन्हीं” की नज़रों से| चाहते रहेंगे कि फिर से “पहला दिवस” मना पायें| पहली बार देख पायें| माने कुल मिला के बात अब और गहरी हो जाने वाली है| मज़े मनाईये| और शुकर मनाईये “वो” अपने पास से ही मामला “रफा-दफा” कर दिए नहीं तो उहे होता जो आपको डेरवा रहा था| बधाई हो! प्रेम दिवस के इनकार दिवस की भी बधाई हो!!

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