CHOWTAL: The lost tune once sang to herald Holi deserves a revival

” पपीहा बन बैन सुनावे नींद नहीं आवे।।  आधीरात भई जब सखिया कामबिरह संतावे।।  पियबिन चैन मनहि नहीं आवत,  सखि जोबन जोर जानवे ।।१।।  फागुन मस्त महीना सजनी पियबिन मोहिं न भावे । पवन झकोरत लुह जनु लागत, गोरी बैठी तहां पछितावे ।।२।।  सब सखि मिलकर फाग रचत है। ढोल मृदंग बजावे।। हाथ अबीर कनक […]

भोजपुरी संगीत के अच्छे दिनों की याद दिलाता “होली हमरा ना भावे”

नबीन चंद्रकला कुमार के फेसबुक पोस्ट से साभार : फगुआ के गीतन में विविधता बा , फगुआ माने खलिहा जोगीरा आ कबीरा ना ह , फगुआ मे बिरह बा ठिठोली बा महीनी बा बोलबाजी बा । फगुआ के गीतन में सामाजिकता बा , धार्मिक सनेश बा । अक्सर गांवे गवनई में फगुआ के क गो […]