‘भोजपुरी कला मूल रूप से पिंड कला है, जो कई बिंदु से मिलकर बनाई जाती है’

“भारत में संगीत की उत्पत्ति विद्यांचल में और कला की उत्पत्ति भोजपुर में हुई है,” निलय उपाध्याय ने पटनाबीट्स से भोजपुरी कला के ऊपर बातचीत में बताया। निलय उपाध्याय, एक लेखक है और इन्होंने ने अब तक 40 से ज्यादा किताबें लिखी है। उन्होंने बताया कि “भोजपुरी कला लोगों के जीवन में सदियों पहले से […]

बिहार की परम्परा से जुड़ी नायाब कलाओं में से एक : सिक्की कला

  बिहार में अनेक कला और अनेक ऐतिहासिक धरोहर मौजूद है। कई कलाएं ऐसी हैं जिनकी शुरुआत बिहार से ही हुई और पहले की तरह इसे आज भी लोगों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। ऐसी ही एक बहुत पुरानी कला है सिक्की कला जिसकी शुरुआत बिहार से ही हुई थी और फिर कहीं […]

CHOWTAL: The lost tune once sang to herald Holi deserves a revival

” पपीहा बन बैन सुनावे नींद नहीं आवे।।  आधीरात भई जब सखिया कामबिरह संतावे।।  पियबिन चैन मनहि नहीं आवत,  सखि जोबन जोर जानवे ।।१।।  फागुन मस्त महीना सजनी पियबिन मोहिं न भावे । पवन झकोरत लुह जनु लागत, गोरी बैठी तहां पछितावे ।।२।।  सब सखि मिलकर फाग रचत है। ढोल मृदंग बजावे।। हाथ अबीर कनक […]

भिखारी ठाकुर के पुण्यतिथि पर लोक संस्कृति का समागम

भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर के पुण्यतिथि के अवसर पर बुधवार को पटना के बिहार संग्रहालय में ‘बिहारनामा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भोजपुरी नाट्य कला एवं साहित्य में भिखारी ठाकुर के योगदान पर चर्चा करना इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य था। भिखारी ठाकुर (१८ दिसम्बर १८८७ – १० जुलाई सन १९७१) भोजपुरी भाषा […]

पटना में बिहारनामा | भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि पर व्याख्यान, बतकही और गायन का संगम

बिहार की संगीत परंपरा पर व्याख्यान देंगे नॉर्वे से आ रहे मशहूर चिकित्सक—लेखक प्रवीण झा लोकगीतों में स्त्रियों के मजबूत स्वरवाले विशेष गीतों का गायन करेंगी चंदन तिवारी इस बार भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि यानी दस जुलाई को राजधानी पटना में एक विशेष आयोजन होनेवाला है. लोकराग का यह आयोजन भोजपुरी संगठन आखर के सौजन्य […]