मेरा—तेरा किसके हिस्से का कितना सावन ?

विमलेन्दु सिंह : जब मंद शीतल पवन चलने लगे...आसमान में बादल घुमड़ने लगे...बादलों से बरसती बूंदें आपके तन—मन को भिगोने लगे... दादुर की किलोर...कोयल की कूक और पपीहे की पीहू—पीहू के साथ ही मोर पंख उठाकर नाच उठे,...