झंडा की बोलै छै

झंडा की बोलै छै | एक कविता बिहार से

15 अगस्त को कितने प्रेम से झंडे फहराए जाते हैं, संकल्प लिए जाते हैं| लेकिन उसके बाद क्या? क्या हम उस संकल्प को पूरा करने की कोशिश करते हैं? क्या समझते हैं कि झंडा क्या कहना चाहता है? आज की कविता ‘अंगिका’ में ह...