“मेड इन इंडिया” को बनाने वाले कला के पारखी प्रशांत सिंह की कहानी


मोईन आज़ाद –
वे कलाकारों के दिलों में राज करते हैं. देशभर में विलुप्त हो रहे कला व कलाकारों को वे दुनिया के सामने ला रहे हैं. वे मेक इन इंडिया के फाउंडर प्रशांत सिंह हैं. उनके जीवन के बारे में जानकर आप काफी कुछ सीख सकते हैं. व्हाइट कॉलर जॉब को छोड़ कर कुछ साल पहले उन्होंने कला के लिए काम करना शुरू किया. आज उनकी कंपनी हजारों परिवारों को रोजी-रोटी दे रही है.

देशभर में कई ऐसी कलाएं हैं, जिसे सामने न लाया जाता, तो वह अगली पीढ़ी तक जाते-जाते विलुप्त हो जाती. इनमें गुजरात की रोगन कला, मथुरा की सांझी कला जैसी कला शामिल है. ऐसी कलाओं को कुछेक परिवार ही बनाती है. अब इसे पूरा देश जान रहा है. प्रशांत सिंह ने इन कला व कलाकारों को देश के सामने लाया है. उन्होंने एक कंपनी शुरू करके एक पहल की. उस कंपनी का नाम द इंडिया आर्ट इनवेस्टमेंट कंपनी रखा. उसके अंतर्गत उन्होंने ‘मेड इन इंडिया’ प्रोग्राम शुरू किया. इसमें उन्होंने देशभर की कला को शामिल करने लगे. वे दूर-दराज के कला को जानने के लिए विशेष कला क्षेत्र में जा कर कलाकारों से मिले. उन्हें काम दिया और उन लोगों को अपने साथ जोड़ा. आज पूरे देश के कलाकारों के लगभग 1000 परिवार इनसे जुड़े हैं. वे यह काम अपनी तीन साथी आदित्य कुमार, स्मिता माथुर, अनुग्रह माथुर के साथ मिल कर करते हैं.

कलाकारों को मिलता है मार्केट

बौआ देवी, प्रशांत सिंह

आज तक कलाकारों को उनका हक नहीं मिल रहा था. वे सही जगह पर अपनी कला को बेचने के लिए ठग और बिचौलिये का शिकार हो रहे थे. प्रशांत सिंह के इस प्रोग्राम के तहत उन्होंने कलाकारों को बेहतर मार्केट दिया. वे देश-दुनिया की बड़ी कंपनियों से ऑर्डर लेते और उसे कलाकारों को देते हैं. इस एवज में वे महज उनका साथ चाहते हैं. वे बताते हैं, आज कल कला के लिए लोग ऑनलाइन मार्केट बना रहे हैं. मैं मानता हूं कि कला को लोग जब तक छू कर और देख कर महसूस नहीं कर सकेंगे तब तक वे कला की अहमियत नहीं समझ सकेंगे. इस कारण मैंने कलाकारों को इकट्ठा कर एक मार्केट का रूप देना शुरू किया है.

कला से था गहरा लगाव

प्रशांत सिंह ने 2012 में इस कंपनी की शुरुआत की. इससे पहले वे 20 सालों तक बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर में थे. वे चेन्नई के एक इंस्योरेंस कंपनी के नेशनल हेड थे. अपनी व्हाइट कॉलर जॉब छोड़कर वे कला से जुड़े. वे बताते हैं, मैं कलाकार नहीं हूं. लेकिन कला की समझ मुझे है. बचपन से ही मुझे कलेक्शन का काफी शौक रहा है. छोटी-छोटी चीजों को मैं कलेक्ट करके रखता था. उसी दरम्यान मैंने सोचा कि कुछ ऐसा काम किया जाये, जिससे समाज में कुछ इंपेक्ट पड़े. बाद में मैंने मेड इन इंडिया की शुरुआत की.

पटना की गलियों में गुजरा बचपन

L-R) Aditya Kumar, Prashant Singh, Smita Mathur, Anugraha Mathur

प्रशांत सिंह पटना की सड़कों पर साइकिल चलाया करते थे. पटना के सेंट माइकल्स में पढ़ते थे. पिता रामचंद्र प्रसाद सिंह आरबीआई में जीएम थे. मां शांति सिंह हाउस वाइफ थीं. बचपन गुजरने के बाद वे ग्रेजुएशन के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी चले गये. वे वैशाली जिला के हसनपुर गांव के निवासी हैं. उनकी पत्नी रेणु भट्ट और बेटी अस्मी ने उनका भरपूर साथ दिया.

पायलट बनना चाहते थे प्रशांत सिंह

बचपन से ही पायलट बनने की सोच रखे हुए प्रशांत बड़े हुए. वे बताते हैं, मैं कई बार एसएसबी में जाने के लिए ट्राय करता रहा. वहां सभी कहते थे फिर से आ गया. शायद मैं उन लोगों में से था, जो उस लेवल तक नहीं पहुंच पाते थे. तब से ही मेरी सोच डेवलप हो गयी कि किसी चीज को पाने के लिए लगातार ट्राय करते रहना चाहिए.

करेंगे तीन कार्यक्रम की शुरुआत

प्रशांत सिंह बताते हैं, मैं आनेवाले दिनों में तीन कार्यक्रम की शुरुआत करने जा रहा हूं. पहला कार्यक्रम ‘जय भारती’ के नाम से होगा. इसे मैं अपनी कंपनी के 17वें सालगिरह के मौके पर 15 अगस्त 2017 को शुरू करने जा रहा हूं. इसके अंतर्गत 1947 बॉक्स बनाये जायेंगे. प्रत्येक बॉक्स में अलग-अलग राज्यों के कला की 36 पेंटिंग्स होंगी. उसे जो भी चाहे खरीद सकेंगे. इसके जरिये लगभग 10000 कलाकारों को तीन महीने तक लगातार नौकरी मिलेगी.
दूसरे कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न स्कूलों में ‘मेड इन इंडिया वॉल’ को बनाया जायेगा, जिसमें अलग-अलग कला को प्रदर्शित किया जायेगा. इससे बच्चे कला के बारे में जान सकेंगे.
तीसरे कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न राज्यों में ‘फोक आर्ट कैफे’ को शुरू किया जायेगा, जिसमें देशभर की कला को लोग देख और खरीद सकेंगे.


सात निश्चय पर चल रहा है काम

नीतीश सरकार के सात निश्चय ‘आर्थिक हल युवाओं को बल, आरक्षित रोजगार महिलाओं को अधिकार, हर घर बिजली लगातार, हर घर नल का जल, घर तक पक्की गली नालियां, शौचालय निर्माण घर का सम्मान, अवसर बढ़े आगे पढ़ें’ पर पटना पुस्तक मेला 2017 में एक पेंटिंग का निर्माण मेड इन इंडिया के तहत ही बनाया जा रहा है. यह पेंटिंग लाइव बनाया जा रहा है. इसमें 13 राज्यों के 40 आर्टिस्ट 19 विभिन्न कलाओं को दिखा रहे हैं. यह 144 स्क्वायर फुट का होगा. अलग-अलग सात कैनवास पर इसे बनाया जा रहा है. यह फोक आर्ट और मॉडर्न आर्ट का फ्यूजन होगा. इसमें निफ्ट के 120 स्टूडेंट मॉडर्न आर्ट और 40 फोक आर्टिस्ट फोक आर्ट को बना रहे हैं. इसमें सबसे वरिष्ठ कलाकार के रूप में पद्मश्री से सम्मानित बउआ देवी हैं और सबसे कम उम्र की कलाकार को रूप में आठ साल की करिश्मा है.

साभार : प्रभात खबर

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