पुलवामा में शहीद हुए बिहार के दो जवानों की बेटियों का खर्च उठाएगी शेखपुरा की डीएम इनायत ख़ान

पुलवामा में हुए आतंकी हमले से पूरे देश में ग़म और आक्रोश‌ की लहर दौड़ गई है। भारतीय सेना के उन 44 जवानों की शहादत से पूरा देश क्षुब्ध है। पूरे देश की भावनाएं शहीदों के परिजनों के साथ हैं एवं हर कोई अपनी तरह से हरसंभव मदद करना चाहता है। ऐसे में बिहार के शेखपुरा जिले की डीएम, इनायत ख़ान की पहल सराहनीय है। इनायत ख़ान ने, 44 शहीदों में शामिल बिहार के दो जवानों की एक एक बेटी को गोद लेने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इन दोनों लड़कियों का, पढ़ाई-लिखाई से लेकर हर तरह का ख़र्च का निर्वहन करेंगी।

ग़ौरतलब है कि बीते गुरुवार को कश्मीर में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों में से दो जवान, संजय कुमार सिन्हा एवं रतन कुमार ठाकुर बिहार से ताल्लुक रखते थे। संजय कुमार सिन्हा, मसौढ़ी के रहने वाले थे तो रतन कुमार ठाकुर का परिवार भागलपुर में रहता है। हमले की ख़बर के बाद दोनों परिवारों में मातम पसरा हुआ है।

सीआरपीएफ में 176 बटालियन के हवलदार संजय कुमार सिन्हा की दो बेटियां एवं एक बेटा है। कुछ ही दिनों में वह घर वापस लौट, अपनी बड़ी बेटी की शादी के लिए लड़का देखने जाने वाले थे।

वहीं 45 बटालियन के सीआरपीएफ जवान, रतन कुमार ठाकुर तीन दिन पहले महाराष्ट्र से ट्रेनिंग लेकर जम्मू लौटे थे और श्रीनगर जा रहे थे जहां वह दो साल से तैनात थे। 2011 में सीआरपीएफ में बहाल हुए रतन कुमार ठाकुर, इससे पहले झारखंड के गढ़वा एवं छग में रह चुके थे। रतन मूलतः कहलगांव के रतनपुर गांव से आते हैं और इनका परिवार भागलपुर के लोदीपुर मुहल्ले में किराए पर रहता है।

आमतौर पर सेना के जवान कमोबेश इसी तरह के पारिवारिक माहौल से आते हैं। ऐसे में, शेखपुरा की डीएम, इनायत ख़ान का यह कदम सराहनीय है। बिहार कैडर की आईएएस अधिकारी, इनायत ख़ान ने इसके अलावा शहीद के परिजनों को अपने दो दिन की तनख्वाह देने का भी ऐलान किया है। इसके साथ ही सभी कर्मियों को भी एक दिन का वेतन देने का अनुरोध करते हुए आम लोगों को भी सहयोग करने की अपील की है।
शहीदों के लिए आयोजित शोक सभा के उपरांत उन्होंने कहा कि यह पूरे देश के लिए ग़म का मंज़र है और इस दुख की घड़ी में हम सभी को मिलकर शहीदों के परिवार के साथ खड़े रहना है। उन्होंने बताया कि शेखपुरा में एक बैंक अकाउंट भी खोला गया है जिसमें आमजन मदद की राशि जमा करवा सकते हैं और वही शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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Mayank Jha is a 20 something years old content writer and an English major. A writer by day and reader by night, he is loathe to discuss about himself but can be persuaded to do so from time to time.

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