न्यू यॉर्क में बैठे इस बिहारी की कलम से पटना की कहानियाँ


पटना में जन्में और पले बढ़े सौरव आनंद को भी करोड़ों बिहारियों की तरह उनका करियर उन्हें बिहार से, अपने घर से दूर परदेस ले गया। ज़िन्दगी में सफलता की चाह ने उनके घर से उनका फासला बढ़ाया और बढ़ते बढ़ते वो आज न्यू यॉर्क जा पहुंचे हैं।

पर कहते हैं न कि बिहारी को बिहार से दूर किया जा सकता है लेकिन बिहार को बिहारी से कभी अलग नहीं किया जा सकता। न्यू यॉर्क की आबो हवा ने भी कोशिशें तो बहुत की होगी लेकिन बिहार के पुरवैया की ख़ुश्बू सौरव आनंद के साथ ही रही। इस बात का सबूत है उनकी किताब “छोटे शहर की बड़ी कहानियाँ”।

इस किताब की कहानियाँ वैसे लिखी गयी है यहाँ से हज़ारो मील दूर न्यू यॉर्क में लेकिन इन कहानियों के हर किरदार बिहारी मिट्टी में रचे बसे हैं। इन कहानियों की खास बात ये कि ये एक नए कलेवर में और नए तेवर में बिहार को दिखाती है। ज़्यादा बात न करते हुए हम ख़ुद सौरव आनंद की ज़ुबानी उनकी और उनके किताबों की कहानियों के बारे में जानते हैं

पटनाबीट्स: सबसे पहले आप अपने बारे में हमारे पढ़ने वालों को बताइये।

सौरव आनंद: हमें लोग सौरभ आनंद के नाम से जानते हैं. पटना में जन्मे, कंकरबाग कॉलोनी के रेनबो फील्ड में खूब क्रिकेट खेले. ज्ञान निकेतन स्कूल में पहलीसे दसवीं तक की शिक्षा पायी. बारहवीं के लिए रांची चले गए, डी ए वी श्यामली (मेकॉन) , जहाँ कोई धोनी नाम का लड़का हमारा दो साल जूनियरथा. वापस पटना आकर, बिहार कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढाई की…मतलब हम मुख्यमंत्री नितीश सर के सुपरडुपर जूनियर हुए. फिर एम् बी ए करने दिल्ली चले गए, भारतीय विदेश व्यापर संस्थान, यानी आई आई ऍफ़ टी . पढाई पूरी करके इनफ़ोसिस ज्वाइन किये. शादी हुई. बैंगलोर में रहे दो साल. फिर अमेरिका आ गए २०१० में. तब से यहीं हैं. आजकल आई बी एम् कंपनी की सेवा में लगे हुएहैं. दो बेटियां हैं.

पिताजी नालंदा मेडिकल कॉलेज में कार्यरत हैं. माताजी घर संभालती हैं. एक छोटा भाई है. वैशाली जिला ‘घर’ पड़ता है हमारा. पटना, रांची और मुज़्ज़फरपुर में परिवार के ज्यादातर सदस्य सेटल्ड हैं.

पिछले तेरह साल से पटना से बाहर हैं…मगर पटना अभी भी हमारे मन मश्तिष्क पे ज़बरन कब्ज़ा करके बैठा हुआ है. हम रेणु के जबर फैन हैं बचपन से. उनका पूरा साहित्य है हमारे घर में. लोगों ने यहाँ तक कहा है की थोड़ी सी ही सही, मगर रेणु की झलक उनको मिलती है हमारी लेखनी में. वैसे हम कोई हिंदी के विद्वान नहीं हैं…मगर कहानियों में रस डालने का अभ्यास हो गया है.

पटनाबीट्स: बिहार से आपका क्या नाता रहा इसके बारे में बताइये? बिहार में कहाँ से हैं और यहां के किन किन जगहों से आपका सम्बन्ध रहा है ?

सौरव आनंद: बिहार मातृभूमि है, जन्मभूमि है. बस दुःख यही है की अब तक उसे कर्मभूमि नहीं बना पाए. हमारा पुश्तैनी गांव पटना मुज़्ज़फरपुर रोड पर है, वैशाली जिला में. मगर हमारे दादाजी पटना में सेटल किये. डॉक्टर थे, पटना मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल भी रहे. हमारा टीनेज और युथ इयर्स पटना में ही बीता. दो साल के लिए रांची गए थे प्लस टू करने. मुज़्ज़फरपुर में ननिहाल है, छठ हर साल वहीँ मनता था. बोकारो में हमारा ससुराल है. परिवार के कुछ लोग, टाटा में भी हैं.

पटनाबीट्स: आपने लिखना कब और कैसे शुरू किया?

सौरव आनंद: कॉलेज के समय हमने एक राजनीतिक व्यंग से परिपूर्ण ड्रामा लिखा था. इसमें जॉर्ज बुश, मुशर्रफ और बिन लादेन मुख्या किरदार थे. पटना के एक इंटर कॉलेज कम्पटीशन में पहला स्थान भी मिला था. मगर उसके बाद करियर की चिंता ने आ घेरा और लिखने की कला को ठन्डे बस्ते में डाल दिया हमने.

फिर २०१४ में हमारे अग्रज रंजन ऋतुराज भैया के ब्लॉग पेज ‘दालान’ से परिचय हुआ. उनके लिखने का स्टाइल बहुत पसंद आया. हमने फिर पटना छोड़ने के दस साल के उपलक्ष्य में एक छोटा सा लेख लिख डाला, पटना की यादों को उड़ेल कर. लोगों को लेख बहुत पसंद आयी. फेसबुक पर ही पटना की यादों के पिटारे खोल खोल कर लिखने लगे…पटना की गर्मियां, पटना की दुर्गा पूजा, पटना का छठ, पटना का जाड़ा, पटना के सिनेमा हाल, पटना का वाइल्ड लाइफ वगैरह. एक मित्र ने सलाह दी की नॉस्टल्जिआ तो ठीक है, कुछ नया लिखो…फिर हमने फेसबुक पेज बनाया, ‘दी बिहारी डरोल’. उसपे हमने पटना में ओलंपिक्स करवा दिए…पटना में इनफ़ोसिस कैंपस खुलवा दिया. फिर पटना के लिए बैटमैन के तर्ज़ परएक सुपरहीरो का भी इंतज़ाम कर दिया.

चूँकि हमारी फुल टाइम नौकरी है और दो छोटे बच्चे हैं, हम सिर्फ वीकेंड पर ही लिख पाते थे. हर वीकेंड बैटमैन का एक नया एपिसोड आता था. एक फैन फोल्लोविंग बन गयी थी उस स्टोरी लाइन की. फिर हमने पटना से अलग कुछ और कहानियां लिखनी शुरू की. उन कहानियों का एकसंग्रह ‘पहली फुहार’ पिछले साल इ-बुक के रूप में प्रकाशित हुई थी. ऐसे ही और भी कहानियां एपिसोड में तोड़ तोड़ के लिखते रहे. लोगों को पसंद आती रही.

पटनाबीट्स: ये किताब लिखने का आईडिया कैसे आया ?

सौरव आनंद: जैसा की मैंने बताया की हमने पटना को बैकग्राउंड बना कर कुछ नयी कहानियां लिखनी शुरू की. इनमे से एक थी ‘बिन्नी की शादी’ एक बिहारी मिडिल क्लास शादी के कहानी. कंजूस पिता, सब कुछ सँभालने वाला बड़ा भाई, दिल्ली में पढ़ने वाली बहन. वो भी लोगों को बहुत पसंद आयी.

इसके बाद हमने एक सीरीज शुरू की ‘पटना सिटी टू जर्सी सिटी’. पटना से एक रिटायर्ड माता पिता, अपने बेटे के पास जाते हैं अमेरिका. वो उन्हेंसभी जाने माने जगह घूमता है. वो सीरीज इतनी पसंद आयी लोगों को, जब हम उसे ख़तम कर रहे थे लोग खफा हो गए….बोले और अमेरिका घुमाइए.

जब हमने पाया की हमारी कहानियों को सत्रह-अठारह साल के स्टूडेंट से लेकर, साठ -सत्तर साल के मेरे पिताजी के मित्र मडंली को भी पसंद आरही थी, तो हमने इन सभी कहानियों को एक साथ प्रकाशित करने की योजना बनायीं.

पटनाबीट्स: इस किताब के बारे में बताइये कि किस चीज़ पे लिखी है और क्यों लिखी है?

सौरव आनंद: किताब का नाम है –छोटे शहर की बड़ी कहानियां

वैसे तो पटना कोई छोटा शहर नहीं…छोटा महानगर कह सकते हैं आप इसे. हमने इसे छोटा शहर इसलिए कहा क्यूंकि, यहाँ के लोगों का रहन-सहन में अभी भी वो आत्मीयता, वो सादगी, वो एक दुसरे से ‘मतलब’ रखने वाली जान पहचान, मौजूद है जो आजकल के बड़े शहरों में नहीं.

पहली कहानी- बिन्नी की शादी

एक कंजूस पिता, समझदार मां, एक सब कुछ सँभालने वाला बड़ा भाई, एक हीरो टाइप का छोटा भाई और एक दिल्ली में पढ़ने वाली बहन…शादी में आये हर चीज़ में मीन मेख निकलने वाले रिश्तेदार…ये सब किरदार हैं इस कहानी के. पटना शहर खुद भी एक किरदार है. पढ़िए बिन्नी की शादीमें क्या क्या धमाल होते हैं.

दूसरी कहानी- पटना सिटी टू जर्सी सिटी

बेटा अमेरिका से टिकट भेजा तो पटना के राम बृक्ष बाबू अपनी पत्नी निर्मला देवी के साथ एयर इंडिया पकड़ के चल दिए. उनके साथ अमेरिका घूमिये…कस्टम वाले को सत्तू का महत्वा समझाते हुए, ग्रीज़्ज़ली भालू को लिट्टी खिलाते हुए, ‘बफैलो चिकन’ सैंडविच खाते हुए, गंगाजल का बोतल सिक्योरिटी से बचाते हुए. न्यू यॉर्क, नियाग्रा फाल्स, वाशिंगटन, येलोस्टोन पार्क, लास वेगास, लॉस एंजेलेस की सैर कीजिये बिना वीसा पासपोर्ट के.

तीसरी कहानी- पटना के सुपरहीरो- पैटमैन

आपने शायद बैटमैन का नाम सुना होगा. वैसा ही एक सांवला शूरवीर अब पटना की रक्षा करता है…उसका नाम ब्रूस वेन नहीं…आरुष सेन है.गाड़ी मगर उसकी भी भोकाल है…और चड्डी वो भी पेंट के ऊपर ही पहनता है. एग्जाम में नक़ल, भैंस रक्षक, बरात में गाने वाले बेसुरे गायकों एवं अनेक कुरीतियों से लड़ता हमारा ये हीरो, गोल्डन आइस क्रीम वाले भगत सिंह की मदद करते हुए, पटना को सुरक्षित रखता है अपने ‘महाराज’ रामु काका के साथ.

चौथी कहानी- प्रवाह के विरुद्ध

बिहार के एक गांव में छुपी प्रतिभा…जो भारत के लिए ओलिंपिक में गोल्ड मैडल लाने का माद्दा रखती है. क्या वो सभी सामाजिक बंधनो को तोड़कर ऐसा कर पायेगी.

पांचवी कहानी- लाल कोठी का भूत-

खेतान पंखे की तरह इस कहानी का नाम ही काफी है.

छठी कहानी- गांव में एलियन

एक रूप बदलने वाला एलियन, जीवन की खोज करते हुए, पृथ्वी से दो सौ प्रकाश वर्ष दूर अपने घर से यहाँ आया है. गलती से अमेरिका की बजाय बिहार में लैंड कर जाता है. पढ़िए उसके रोमांचक अनुभव जब उसका सामना गांव वालों और उनके आपस की राजनीति से होता है.

सातवीं कहानी- स्वछता का भूत

ऐसा भूत जो स्वछता का सन्देश देता है और हमारे गांव देहात में व्याप्त ‘टॉयलेट’ भ्रष्टाचार करने वालों की नींद हराम करता है.

पटनाबीट्स: ये कहानियाँ कहाँ कहाँ से मिली आपको ? क्या इनमे अपना तजुर्बा है या सारी कहानियाँ काल्पनिक है ?

सौरव आनंद: कहानियों का एक मोटा आईडिया आता है दिमाग में, फिर लिखने बैठते हैं तो दो तीन घंटे में कहानी तैयार. ज्यादातर, देर रात में ही लिख पाते हैं.

‘पटना सिटी से जर्सी सिटी’ कहानी में काफी कुछ तजुर्बे से लिखा है. बाकी की कहानियां काल्पनिक हैं.

Dr. Utpal Kant Singh with the book

पटनाबीट्स: वो लोग, खास कर के बिहार में रहने वाले लोग जिनको लिखने का शौक है उनके लिए क्या सलाह है आपकी कि कैसे वो अपनी लेखनी को आगे बढ़ा सकते हैं ?

सौरव आनंद: खूब अभ्यास करें. फेसबुक एक अच्छा जरिया है पाठकों से जुड़ कर उनका फीडबैक लेने का. हम इसे ‘नेट प्रैक्टिस’ बोलते हैं. संकोच मत करिये…आलोचना से मत घबराइए. ज़मीन से जुड़े रहिये…अपनी जड़ों को मत भूलिए.

पटनाबीट्स: इस किताब के बारे में कोई एक ख़ास बात जो आप बताना चाहें वो बताइये।

सौरव आनंद: जैसा बहुत सारे लोगों ने बताया है हमें, इस किताब की कहानियां आपको पकड़ लेती हैं…अगर शुरू कर दिए पढ़ना तो बिना ख़तम किये छोड़िएगा नहीं…गारंटी है.

आप किताब के बारे में फेसबुक पेज से जानकारी हासिल कर सकते हैं : – Chhote Sahar Ki Badi Kahaniyan

आप किताब नीचे दिए लिंक से खरीद भी सकते हैं, क्लिक करें : Amazon , FlipkartPlaystore
International shipping: Amazon

Do you like the article? Or have an interesting story to share? Please write to us at [email protected], or connect with us on Facebook and Twitter.


Quote of the day: “Be happy, but never satisfied.”
Bruce Lee


 

Comments

comments