पटना के युवा कार्टूनिस्ट गौरव की दूसरी शार्ट फिल्म साँझ

आजकल की आपाधापी में एक पूरी फिल्म देखने का वक़्त हर किसी के पास नहीं होता। ऐसे में कही अनकही बातों को कम समय में आपके मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन पर उभारने का काम करती हैं शार्ट फ़िल्में। ये फ़िल्में मिनटों में कई ऐसी बातें कह जाती हैं जो शायद एक दो घंटे की फिल्म भी न कह सके। ऐसी ही एक शार्ट फिल्म हैं साँझ।  यह 12 मिनट की शॉर्ट फिल्म एक उपेक्षित बीमार बूढ़े पिता की व्यथा को बयां करती है जिसे अपने घर में कमरा तो मिलता है पर उसे परिवार का सदस्य नहीं माना जाता।

इस फिल्म को पटना के युवा कार्टूनिस्ट गौरव ने बनाया है जो  पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। गौरव ने इससे पहले काश-थिंक बिफोर यू एक्ट नाम से अपनी पहली शार्ट फिल्म बनाई थी। लगभग 11 मिनट की इस फिल्म में एक ऐसे लड़के की कहानी थी, जो गांव से शहर पढने आता है। यहां की चकाचौंध और प्यार की जाल में फंस कर वह अपने जीवन की कहानी को पूर्णविराम देने का फैसला कर लेता है। अपने माता-पिता के नाम अपनी अंतिम चिट्ठी लिखते वक्त उसके जेहन में क्या-क्या ख्याल आते हैं और आखिरकार उसके साथ क्या होता है? यही इस फिल्म में दिखाया गया है। “काश” फिल्म अगस्त, 2016 को यूट्यूब पर रिलीज की गयी थी।  रिलीज के बाद यह फिल्म विभिन्न समाचारपत्रों,चैनलों और वेबसाइट्स के साथ-साथ पटना फिल्म फेस्टिवल में भी काफी सराही गयी थी।

गौरव की दूसरी फिल्म सांझ एक ऐसे बुजूर्ग की कहानी है जो अपने ही घर में तिरस्कृत जीवन जी रहा है। बेटे-बहू और पोते के होते हुए भी शारीरिक बीमारी की चपेट में आने के बाद परिवारवालों द्वारा उपेक्षित है। उसका  परिवार उसे बस अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करता है। परिवार से मिली इस उपेक्षा और नारकीय जीवन से विरक्त होकर वो बुजूर्ग आखिरकार एक ऐसा कदम उठा लेता है जो उसके परिवारवालों के लिए एक सबक बन जाता है। आज समाज में हर ओर ऐसे कई दृश्य देखने मिल जाते हैं जो यह सोचने को मजबूर कर देते हैं कि आखिर हमारे समाज में बुजूर्गो का स्थान क्या है। समाज में एक विकार के रूप में जड़ जमा रहे मुद्दे को इस फिल्म में काफी संजीदगी से फिल्माया गया है। उस बुजुर्ग का किरदार एक युवा अभिनेता ने निभाया है इसलिए हो सकता है उसे बूढा दिखाने के लिए किया गया मेकअप आँखों को सुकून न दे पर उस चेहरे पर दिखता दर्द आपको सोचने पर मजबूर कर देगा।  फिल्म के कलाकारों में गौरव के अलावा अनुराग प्रधान, अश्वनी राय शामिल हैं।

गौरव अब तक पटना के प्रमुख अखबारों में कार्टूनिस्ट के रूप में काम कर चुके हैं, फिलहाल वे प्रभात खबर के साथ जुड़े हैं। समाचारपत्र में काम करने के साथ-साथ रंगमंच व नुक्कड़ नाटकों में गौरव की खासी दिलचस्पी है। फिल्म और फिल्मी दुनिया के सागर में डुबकी लगाते रहने में गौरव को बड़ा आनंद आता है। इस फिल्म में अभिनय करने के साथ-साथ, गौरव फिल्म के लेखक, निर्माता, निर्देशक भी हैं। हम आशा करते हैं गौरव इसी तरह अपनी फिल्मों में जरुरी मुद्दे उठाते रहे और हर नयी फिल्म के साथ उनका अभिनय और निर्देशन निखरता जाये।

 

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Quote of the day:“Life is problems. Living is solving problems.” 
― Raymond E. Feist

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