satyam verma

ज़िन्दगी के आपाधापी की खामियां गिनाती राजेश कमल की ‘एक कविता बिहार से’

राजेश कमल का जन्म सहरसा में हुआ और फ़िलहाल पटना में रहते हैं। समाज से काफ़ी जुड़े होने के कारण उनकी कविताओं में प्रेम, समाज, देश, राजनीति के मानवीय भावनाओं का समावेश दिखता है। समकालीन परिस्थितियों को राजेश शब्दों में घोल कर अपनी कविताओं में प्रस्तुत करते हैं।
प्रस्तुत कविता में राजेश ज़िन्दगी की आपाधापी में छोटे-छोटे लम्हों को न जी पाने की कसक की बात कर रहे हैं।
आज ‘एक कविता बिहार से’ में प्रस्तुत है राजेश कमल की कविता ‘कभी कभी सोचता हूँ’:

satyam verma

कभी कभी सोचता हूँ

कितना अच्छा होता अगर
यारों के साथ
करता रहता गप्प
और बीत जाता यह जीवन

कितना अच्छा होता अगर
माशूक़ की आँखों में
पड़ा रहता बेसुध
और बीत जाता यह जीवन
लेकिन
वक़्त ने कुछ और ही तय कर रख्खा था
हमारे जीने मरने का समय
मुंह अँधेरे से रात को
बिछौने पर गिर जाने तक का समय
और कभी कभी तो उसके बाद भी

कि अब याद रहता है सिर्फ काम
काम याने जिसके मिलते हैं दाम
दाम याने हरे हरे नोट

कि वर्षों हो गए
उस पुराने शहर को गए
जिसने दिया पहला प्रेम
कि वर्षों हो गए
उस पुराने शहर को गए
जिसने दी यारों की एक फ़ौज
और अब तो
भूल गया माँ को भी
जिसने दी यह काया

शर्म आती है ऐसी जिंदगी पर
कि कुत्ते भी पाल ही लेते है पेट अपना
और हमने दुनिया को बेहतर बनाने के लिए
ऐसा कुछ किया भी नहीं

कभी कभी सोचता हूँ
कितना अच्छा होता अगर दुनियादारी न सीखी होती
अनाड़ी रहता
और बीत जाता यह जीवन

 

Photo Credit: Satyam Vr

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Quote of the day: “You only live once, but if you do it right, once is enough.” 
― Mae West

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Mayank Jha

Mayank Jha is a 20 something years old content writer and an English major. A writer by day and reader by night, he is loathe to discuss about himself but can be persuaded to do so from time to time.