पुरबी के जनक कवि महेंदर मिसिर के गीतों को गाते हुए

आज महेंदर मिसिर की पुण्यतिथि है. किसी रचनाकार, कलाकार, सर्जक को याद करने के लिए उसके जयंती से ज्यादा महत्वपूर्ण  पुण्यतिथि है,क्योंकि जिस दिन वह दुनिया से विदा होता है तो अपने दम पर एक थांति छोड़ जाता है| जन्म—जन्मांतर तक बनी रहती है वह थांति. पुरबी इलाके के अदभुत और अपने तरीके के अनोखे रचनाकार थे महेंदर मिसिर. छपरा के एक मामूली गांव मिसरवलिया में पैदा हुए एक ऐसे रचनाकार, जिन्हें कहा तो पुरबिया उस्ताद जाता है लेकिन जिनके दिवाने दुनिया के कोने—कोने में फेले हुए हैं| उनके गुजरे 68 साल हो गयेऔर जैसे जैसे समय गुजरता जा रहा है, पुरबी के सम्राट के जादू का दायरा फैलता जा रहा है| यह इससे पता भी  चलता हे कि मुझे यह जानकारी मिली है कि बॉलीवुड में एक साथ आधे दर्जन से अधिक निर्माता—निर्देषक महेंदर मिसिर पर फिल्म बनाने की सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं| यह जानकारी अपुष्ट है लेकिन अपना अनुभव पुष्ट है कि पिछले एक साल में महेंदर मिसिर के सात गीतों को गायी, साझा की, जिसके प्रति देश—दुनिया के कोने—कोने से तो प्यार—दुलार मिला ही, सात में से चार गीतों में बॉलीवुड रुचि दिखा चुका है| और ऐसा हुआ है तो सिर्फ और सिर्फ इसलिए कि महेंदर मिसिर के गीतों में वह ताकत है.
आज ही के दिन ठीक तीन साल पहले उनके एक गीत को साझा कर पुरबियातान नाम से एक अभियान की शुरुआत की थी. महेंदर मिसिर के उस गीत का बोल है— कुछ दिन नईहर में खेलहूं ना पवनी, बलजोरी रे, सइयां मांगे गवना हमार…
महेंदर मिसिर के गीतों को लेकर पुरबियातान अभियान की शुरुआत करते हुए मन मं कई किस्म के डर के  भाव थे तो अकारण नहीं थे. बिहार के गांवों से धुन का जुगाड़ हुआ था, झारखंड की राजधानी रांची में बुलू दा के यहां रिकार्डिंग तय हुई थी. बजानवाले वादक कलाकारों का भी जुगाड़ ही किया गया था. कुछ तो पेशेवर मिले , आयोजनों में बजानेवाले लेकिन कुछ ऐसे भी जो पहली बार स्टूडियो का सामना कर रहे थे और स्टूडियो में दिन भर बैठकर वापस चले गये कि वे नहीं बजा सकते. कुछ शाादी व्याह में बजानेवाले बैंड पार्टी के वादक कलाकार भी मिले. अंत में जो वादक कलाकार मिले, उनके साथ ही पुरबियातान की यात्रा शुरू की, सिर्फ महेंदर मिसिर के गीतों के बोल पर भरोसा करते हुए. महेंदर मिसिर के गीतों के बोल जब से पढ़ी थी, तब से ही मन में विश्वास था कि उनके गीतों के बोल इतने जबर्दस्त है कि संगीत कमजोर भी रहे, गायकी थोड़ी कमजोर भी रहे तो लोगों को पसंद आयेगा. और ऐसा ही हुआ. पहले गीत को इंटरनेट के जरिये छोड़ते ही दुनिया के कोने—कोने में फैले लोकसंगीत रसिया लोगों का रिस्पांस मिलना शुरू हुआ. एक और—एक और की मांग हुई और एक—एक कर महेंदर मिसिर के सात गीतों को रिकार्ड की, साझा की. इसी में एक उनका मशहूर गीत अंगुरी में डंसले बिया नगिनिया भी रहा, जिसे सुनने के बाद बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता मनोज वाजपेयी अभियान को समर्थन देने के लिए खुद पटना आये, प्रेमचंद रंगशाला में घंटों बैठे. यह महेंदर मिसिर के गीतों का ही जादू है कि पिछले एक साल में पुरबियातान के तहत महेंदर मिसिर के सात गीतों को अपने बहुत ही अल्प संसाधन में किसी तरह साउंडक्लाड के जरिये जारी की, उन सात गीतों में से चार गीतों को लेने के लिए बॉलीवुड के निर्माता—निर्देषक तैयार हैं. न तो यह मेरी व्यक्त्गित उपलब्धि है और न ही मेरे लिए व्यक्गित तौर पर गर्व की बात. यह इसलिए बता रही हूं कि यह पुरबियातान अभियान की सफलता कम और महेंदर मिसिर के गीतों के जादू ज्यादा है. उनके गीत हैं ही ऐसे, जो कालजयी हैं, सदाबहार हैं.
महेंदर मिसिर के गीतों को गाते हुए जितनी सहजता के साथ डूबती-उतराती रही, उसके कारण की तलाश भी मैं खुद ही शुरू की. खुद ही सोचती कि गाने तो गाने होते हैं, गीत तो गीत होते हैं, फिर मिसिरजी के गीतों में मैं इस कदर डूबती क्यों जा रही हूं. जवाब भी खुद ही तलाशी. बतौर गायिका मुझे ऐसा लगा कि मिसिरजी गीतकार भी थे, संगीतकार भी थे और गायक भी थे, इसलिए आजादी के पहले यानि बरसों पहले जो गीत लिखे, उनके वाक्यों को ऐसेे रखा कि भविष्य में कोई भी गाना चाहे तो वह सुगमता से गा सके. उन्हेांने पुरबी को पुरबी की तरह ही लिखा, निरगुण को निरगुण की तर्ज पर ही और दूसरे गीतों को शब्दों के अनुसार. गाने से पहले उनके गीतों से गुजरते हुए हमेशा यही लग रहा था कि जैसे उन्होंने हम जैसे नये गायक कलाकारों को ध्यान में ही रखकर गीत लिखे होंगे कि सहजता से गाया जा सके. और जितना चाहे, उनके गीतों के साथ गायकी के प्रयोग भी किये जा सके.

इन सबके बाद महेंदर मिसिर के गीतों से गुजरते हुए सबसे ज्यादा बेहतर जो बातें लगी, वह एक और बात है. वह यह कि उनके अधिकांश गीत स्त्री मन की अभिव्यक्ति के गीत हैं. वह स्त्री प्रधान रचनाकार थे. स्त्री मन के प्रेम—विरह को राग देनेवाले. सोचती हूं कि कितना कठीन रहा होगा उनके लिए. किस तरह वह स्त्री मन के अंदर की बातों को, एकदम से शब्दों में उतारते होंगे. कितनी गहराई में डूब जाते होंगे वे. स्त्री ही तो बन जाते होंगे, लिखते समय…

Se recomienda acudir primero a un sexólogo profesional y psicoterapeuta, aterosclerosis y pruebas de dmo que el de Cialis, esto es poco probable que sea importante, Kamagra ha sido el medicamento más popular para mejorar la potencia durante muchos años. Cambios de humor, prolongando tres Precision-Parafarmacia veces el acto sexual. La única diferencia es que el precio de Vardenafil en la farmacia es mucho menor, es necesario tomar con precaución el remedio si según su historial haya sufrido infartos o derrames cerebrales los últimos 6 meses.


महेंदर मिसिर के कुछ चुनिंदा गीत जिनहे मैं गई हूँ :

Comments

comments