दिनकर है जीवित स्मृति, पर प्रेरणा लेता कौन है । एक कविता बिहार से

डीआईजी विकास वैभव 2003 बैच के बिहार कैडर से IPS अफसर हैं। वे आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग में ग्रैजुएट हैं। एनआईए में रहते हुए IPS विकास वैभव कई आतंकी वारदातों की गुत्थियां सुलझा चुके हैं।भागलपुर रेंज के डीआईजी के पद पर तैनात  विकास वैभव इसके पहले पटना में एसएसपी और उससे पहले नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) में थे। 2013 में पटना के गांधी मैदान ब्लास्ट और उसके पहले बोधगया ब्लास्ट की तफ्तीश करने वाली टीम की अगुआई विकास ने ही की थी।  फिलवक्त वो डीआईजी है भागलपुर और मुंगेर के।
ट्रेंड्स रिपोर्ट के मुताबिक मात्र एक दिन के आंकड़े कहते है अन्य आईपीएस अधिकारियों की तुलना में लोगों ने विकास वैभव को ज्यादा पसन्द किया है।

IPS विकास वैभव साइलेंट पेजेस नाम से ब्लॉग चलाते है, जिसमें वे कई ऐतिहासिक स्मारकों के बारे में लिखते हैं। उन्होंने अपने ब्लॉग पर ऐतिहासिक स्थानों की फोटोज भी डाली है।

वो कहते हैं –
काम शुरू करते नहीं भय से नीचे लोग,
मध्यम त्यजते बीच में देखे विषम संयोग,
पर उत्तम वे लोग जो हर दुर्गम पथ झेल,
दृढ़ता से बढ़ते सतत बढ़ाओ को ठेल।

कला तथा अपनी मिट्टी के प्रति अगाध प्रेम के कारण इन्होंने दिनकर पर कविता लिखी वो भी दिनकर की ही शैली में। एक तरफ जहां कविता छंदमुक्त हो रही है, वहीं ये कविता अपने में लय बना रखी है। कविता पढ़ते हुए लगता ही नहीं कि ये इनकी पहली कविता हो सकती है। एक सधे भाषा और शिल्प में गढ़ी कविता राष्ट्रकवि दिनकर की याद बरबस ही दिला देता है।

रामधारी सिंह ‘दिनकर (23 सितंबर 1907- 24 अप्रैल 1974) हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे।वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं। बिहार प्रान्त के बेगुसराय जिले का सिमरिया घाट उनकी जन्मस्थली है। उन्होंने इतिहास, दर्शनशास्त्र और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई पटना विश्वविद्यालय से की। उन्होंने संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी और उर्दू का गहन अध्ययन किया था।

दिनकर’ स्वतन्त्रता पूर्व एक विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए और स्वतन्त्रता के बाद राष्ट्रकवि के नाम से जाने गये। वे छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि थे। एक ओर उनकी कविताओ में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति की पुकार है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति है। इन्हीं दो प्रवृत्तियों का चरम उत्कर्ष हमें उनकी कुरुक्षेत्र और उर्वशी नामक कृतियों में मिलता है।

प्रसिद्ध साहित्यकार राजेन्द्र यादव ने कहा कि दिनकरजी की रचनाओं ने उन्हें बहुत प्रेरित किया। प्रसिद्ध रचनाकार काशीनाथ सिंह ने कहा कि दिनकरजी राष्ट्रवादी और साम्राज्य-विरोधी कवि थे।

आज दिनकर जी का जन्मदिवस है इस लिहाज से आज उनकी कृति को याद करना अत्यधिक आवश्यक हो गया है।
गणतंत्र दिवस पर उनके द्वारा रचित कविता “सिंहासन खाली करो, जनता आती है ” ये 1974 में सम्पूर्ण क्रांति का उदघोषक पंक्ति हो गयी । एक कवि के लिए इससे ज्यादा क्या चाहिए कि उसकी कविता मरणोपरांत भी क्रांति का अलख जागये रखे।
आज दिनकर को याद करते हुए आईपीएस विकास वैभव ने दिनकर को समर्पित अपनी कविता लिखी जो सही अर्थों में एक सच्ची श्रद्धांजलि को दिखाता है।

प्रस्तुत है पटनबीट्स कि तरफ से ‘एक कविता बिहार से’ में, आज राष्ट्रकवि दिनकर के जन्मदिवस पर प्रस्तुत है आईपीएस विकास वैभव के द्वारा उनपर लिखी हुई कविता “मिथिला और दिनकर”।

मिथिला और दिनकर 

सरस्वती तट से प्रसार हुआ, चेतन भारत विस्तार हुआ ।
वेदों ने अंत जहाँ पाया, मिथिला क्षेत्र वह कहलाया ।
याज्ञवल्क्य जहाँ प्राचीन हुए, मंडन वहीं समीचीन हुए ।
विद्यापति को जन्म दिया, जनक राज पर गर्व किया ।
ज्ञान प्रकाश उत्कर्षित हुआ, विश्व लाभान्वित हुआ ।
क्षेत्र अत्यंत हो हर्षित, संपूर्ण भारत में था पुलकित ।

चूंकि परिवर्तन है ऋत, मिथिला भी हुई कालविकृत ।
काल द्वारा हुई ग्रसित, भला किसे था यह जनित ।
ग्रसता था परतंत्र त्रास, बौद्धिक परंपरा हुई सशंकित ।
पूर्व विरासत पर गौरवान्वित, थी भविष्य प्रति चिंतित ।
आशा गंगा पर कर केंद्रित, सपूत दर्शन को लालायित ।
बौद्धिक परंपरा को बढाना था, पूर्वज ऋण चुकाना था।

मंदाकिनी तट पर उदय, दिनकर बना राष्ट्रीय हृदय ।
राष्ट्र ने भी शीघ्र पहचाना, राष्ट्रकवि नाम गया जाना ।
मिथिला हुई पुनः चेतन, भारत को अंतर प्राण मिला ।
संस्कृति अध्याय हुआ रचित, क्षेत्र नव गौरवान्वित ।
दिनकर ने किया काल दर्शन, शब्दरूप में नव सृजन ।
रश्मिरथी को सम्मान मिला, काल दोष से त्राण मिला ।
त्याग युद्धिष्ठिर धर्म को, गदा-गाँडीव का ध्यान मिला ।

सिमरिया में पूछे मंदाकिनी, दिनकर क्या अब मौन है ।
चिंतित भारत भविष्य पर, मिथिला क्या पुनः गौण है ।
दिनकर है जीवित स्मृति, पर प्रेरणा लेता कौन है ।
यदि राष्ट्रकवि का है सम्मान, नहीं केवल पुष्प दान ।
नव युवा से आशान्वित, भारत मांगे स्वार्थ बलिदान ।
नव सृजन के निमित्त, दिनकर मार्ग मांगे अग्रप्रस्थान ।


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Quote of the day: “There was beauty in the idea of freedom, but it was an illusion. Every human heart was chained by love.” 
― Cassandra Clare, Lady Midnight

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