गूगल याद कर रहा उस बिहारी को जिसने अंग्रेज़ो को शैम्पू करना सिखाया

जी हाँ हम बात कर रहे हैं शेख़ दीन मोहम्मद (अंग्रेजी में Sake Dean Mahomed) की। आज आपने अगर गूगल खोला होगा तो देखा होगा कि गूगल डूडल में एक बोतल के ऊपर किसी अंग्रेज़दाँ शख्स की तस्वीर लगी हुई है। ये तस्वीर है सन 1759 में पटना में जन्मे शेख़ दीन मोहम्मद की। दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल की एक रस्म रही है कि ये दुनिया के महान व्यक्तियों को श्रद्धांजलि देने के लिए अपने लोगो को उस इंसान से जुड़े एक डूडल यानि की चित्रकारी की शक्ल दे देता है। श्रद्धांजलि की रस्म अदायगी के साथ साथ इस डूडल का सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि आम जनों को ऐसी हस्तियों के बारे में पता चलता है जिन्होंने ऐसा बड़ा काम किया कि आने वाली दुनिया की शक्लो सूरत बदल डाली। शेख़ दीन मोहम्मद ऐसी ही एक हस्ती थे जिनके नाम शैम्पू का अविष्कार करने , किसी हिंदुस्तानी द्वारा पहली अंग्रेजी किताब लिखने जैसे असाधारण कीर्तिमान दर्ज हैं।

शेख़ दीन मोहम्मद की कहानी बड़ी रोचक है। यात्री हो, लेखक हो या अलकेमिस्ट (रसायन बनाने वाला) इन सारी विधाओं में इन्होने बड़ा काम किया है। बिहार के बक्सर से सम्बन्ध रखने वाले दीन मोहम्मद हज्जाम समुदाय से आते थे। ब्रिटिश राज की हुकूमत के वक़्त ये हिस्सा बंगाल प्रेसीडेंसी में आता था। दीन मोहम्मद का बचपन पटना में गुज़रा। इनके पिता के इन्तिक़ाल के बाद एक अंग्रेज़ आर्मी अफसर गोल्डफ्रे इवान ने इन्हें अपनी छत्रछाया में लिया। मोहम्मद फिर ब्रिटिश आर्मी में भर्ती हो गए और ट्रेनी सर्जन के पद पर रहे। आर्मी में अपनी टुकड़ी के कप्तान कैप्टेन बेकर से इनकी बड़ी घनिष्ट दोस्ती हुई। इनकी दोस्ती का आलम ये था कि जब 1782 में कप्तान साहब ने नौकरी से इस्तीफ़ा दे कर वापस अपने देश आयरलैंड जाने की सोची तो शेख साहब भी उनके साथ साथ सात समंदर पार चल पड़े। उस वक़्त उन्हें शायद ही मालूम होगा कि ये फैसला उनके जीवन को दुनिया के लिए कितना महत्वपूर्ण बना देगा।

शेख़ दीन मोहम्मद को अपने अनोखे सुसज्जित पहनावे के लिए भी जाना जाता है

तो 1784 में शेख़ दीन मोहम्मद कैप्टेन बेकर और उनके परिवार के साथ आयरलैंड के कॉर्क शहर में जा बसे। अपनी अंग्रेजी दुरुस्त करने की खातिर शेख़ साहब वहीँ के एक स्कूल में भर्ती हो गए जहाँ उन्हें एक आयरिश मोहतरमा जेन डेली से इश्क़ हो गया। शेख़ साहब की माशूका वहाँ के एक बड़े संभ्रांत परिवार से आती थी तो जो अमूमन ऐसे हालत में होता है वही हुआ और लड़की के घर वाले नहीं माने। मगर शेख़ साहब और जेन का इश्क़ थमा नहीं और इन दोनों ने सन 1786 में दूसरे शहर भाग कर शादी रचा ली। तब वहां के कानून के मुताबिक शादी करने के लिए शेख़ दीन मोहम्मद को अपना धर्म बदल के एंगलिक क्रिस्चियन बनना पड़ा और नवदम्पति लंदन के ब्राइटन में जा बसे।

1794 ईस्वी में शेख़ दीन मोहम्मद ने अपना यात्रा वृतांत ‘द ट्रेवल्स ऑफ़ दीन मोहम्मद’ के नाम से छपवायी। ऐसा कर के ये पहले हिंदुस्तानी बने जिन्होंने अंग्रेजी में कोई किताब लिखी हो। इनकी किताब में मुग़लिया सल्तनत के बारे में जानकारी और हिंदुस्तान के कई शहरों का ज़िक्र था। खास कर के इलाहबाद (अब प्रयागराज) और दिल्ली के बारे में इन्होने अपनी किताब में बड़ी तफसील से बताया है।

शेख़ दीन मोहम्मद का सबसे बड़ा योगदान मन जाता है यूरोप में शैम्पू को लाना। शेख़ साहब शादी के बाद लंदन में एक रईस अंग्रेज़, जिसने अपनी दौलत हिंदुस्तान से कमाई थी, उसके स्टीम बाथ के पार्लर पे काम करते थे। वहीँ उन्होंने शैम्पू मसाज का तरीका इज़ाद किया। 1814 में शेख़ दीन मोहम्मद ने ब्राइटन वापस आ कर इंग्लैंड का पहला शैम्पू मसाज स्नानघर खोला। जल्द ही इस मसाज के तरीके ने लंदन में शोहरत बटोरी और इसे कई रोगों का इलाज भी माना जाने लगा और शेख़ दीन मोहम्मद “डॉक्टर ब्राइटन” के नाम से मशहूर हो गए।

कहा जाता है कि जब लंदन के अस्पताल किसी का इलाज कर पाने में समर्थ नहीं होते थे तो वो मरीज़ों को शेख़ साहब के पास जाने की सलाह देते थे। यहां तक कि शेख़ मोहम्मद इंग्लैंड के दो राजाओं , जॉर्ज चतुर्थ और विलिअम चतुर्थ , के “शैंपू सर्जन” रह चुके थे। दीन मोहम्मद ने “केसेस क्योर्ड” और ” शैम्पू सर्जन” नाम की किताबें भी लिखी।

शेख़ साहब की उपलब्धियों की फेहरिस्त बस इतनी ही नहीं है। दीन मोहम्मद ने इंग्लैंड में पहला भारतीय रेस्टोरेंट भी खोला था। ‘हिंदुस्तानी कॉफ़ी हाउस’ नाम का ये रेस्टोरेंट 1810 ईस्वी में सेंट्रल लंदन के जॉर्ज स्ट्रीट पर खुला था। भारतीय खान पकवान के साथ साथ इस रेस्ट्रोरेन्ट की खासियत में में परंपरागत भारतीय हुक्का भी शुमार था। मगर दीन मोहम्मद का ये रेस्टोरेंट ज़्यादा दिन चल नहीं पाया। 2005 में हिंदुस्तानी कॉफ़ी हाउस के ऐतिहासिक महत्त्व को रेखांकित करते हुए उस जगह पर वहां के प्रशासन द्वारा ‘ग्रीन प्लैक’ लगाया गया।

ब्राइटन के म्यूजियम में रखी शेख़ दीन मोहम्मद की पोशाक

शेख़ दीन मोहम्मद के इतने महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद इतिहास के पन्नो में ये नाम कहीं खो सा गया। 19वीं शताब्दी के आखिर तक इनका नाम लगभग भुला दिया गया था। ज़रूरत है कि हम बिहारी और हिंदुस्तानी होने के नाते शेख़ दीन मोहम्मद की इस अभूतपूर्व कहानी को याद रखें और इसे बाकि दुनिया तक पहुंचाएं ताकि आने वाले समय में लोगों को ये गूगल डूडल अनजाना ना लगे।

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Quote of the day:“Keep your eyes on the stars and your feet on the ground.” 
― Theodore Roosevelt

 

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