नेहा नूपुर

तुम्हें मनकों से हार बनाना है | एक कविता बिहार से

नेहा नूपुर
एक कविता बिहार से’ के सफर की शुरुआत को दो महीने हो गये| इस सफ़र में आपका जो साथ मिला, सराहनीय रहा| जैसा कि हमने निर्णय लिया था, आखिरी पोस्ट मेरी, यानि आपके होस्ट की, अर्थात् नेहा नूपुर की होगी; उसी वादे को पूरा करते हुए, देशप्रेम को समर्पित इस महीने (अगस्त का महीना आज़ादी का महीना) को अंजाम तक पहुँचाने की कोशिश करते हैं|
पटनाबीट्स के पाठकों के लिए विशेष तौर पर प्रस्तुत है, ‘एक कविता बिहार से’ में- “तुम्हें समय से आगे जाना है”|

तुम्हें समय से आगे जाना है

सुनो, देश के कर्णधार सुनो|
गुनो, नवीन उन्नत विचार गुनो|
बुनो, सपनों के नये आधार बुनो|
चुनो, ऊर्जा के औजार चुनो|
तुम्हें समय से आगे जाना है,
तुम्हें सरल समाज बनाना है||

खोलो मन के द्वार सभी,
सम्भलो, रोको भ्रष्टाचार अभी|
हो सके बचा लो बचपन तुम,
न हो देश में देह व्यापार कभी|
भरो अन्न के तुम भंडार,
करो नदिया सी रफ्तार,
तुम्हें वृहत संसार सजाना है,
तुम्हें समय से आगे जाना है||

कुछ कर्म करो, कोई बने नीति,
उठो, बदलो पहले राजनीति|
रच के खुद को तुम देश रचो,
अमरों की ये अनमोल कृति|
लिखो प्रीत मिटाओ खार,
यही जीवन का है सार,
तुम्हें मनकों से हार बनाना है,
तुम्हें समय से आगे जाना है||

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Neha Nupur

Neha Nupur has been interested in Music and Poetries since her childhood. She completed her initial education from Tagore Academy and started writing poems. She loves to read poetries and listen classical music.