छठ

छूटे न अबकी छठ के बरतिया | एक कविता बिहार से

गोबर से, मिट्टी से, लीपा हुआ घर-दुआर
नया धान, कूद फाँद, गुद-गुद टटका पुआर
छठ मने ठेकुआ, सिंघारा-मखाना
छठ मने शारदा सिन्हा जी का गाना

बच्चों की रजाई में भूत की कहानी
देर राह तक बतियाती माँ, मौसी, मामी
व्रत नहीं, छठ मने हमरे लिए तो
व्रत खोल पान खाके हँसती हुई नानी

छठ मने छुट्टी
छठ मने हुलास
छठ मने ननिहाल
आ रहा है पास

 

छठ महापर्व से हर बिहारवासी का एक गहरा जुड़ाव रहा है| लोकास्था का यह पर्व कुछ ऐसी ही यादें दे जाता है| इन्हीं यादों को शब्दों के माध्यम से सफलतापूर्वक चित्रित किया है बॉलीवुड के संजीदा गीतकारों में गिने जाने वाले युवा गीतकार राजशेखर ने| इन्होंने भी स्वीकार किया है कि “छठ मने शारदा सिन्हा जी का गाना”|

हाल ही में छठ पर्व की आस्था के साथ एक गीत रिलीज़ किया गया है| इसे गाया है मशहूर गायिका और बिहार की आवाज कही जाने वाली पद्मश्री से सम्मानित शारदा सिन्हा जी ने| इन्हीं के एल्बम से एक गीत आज आपके सामने आ रहा है जिसे लिखा है डॉ. शांति जैन ने| इस गीत का विषय आज के बाजारवाद में मुश्किल से उपलब्ध हो पाने वाली पूजा की सामग्री है| व्रती किस कदर डर जाते हैं जब उन्हें सामग्री नहीं मिल पाती और वो उस स्थिति में यही सोचते हैं कि जरूर उनसे कोई अपराध हुआ होगा जिसकी वजह से छठी माँ नाराज हैं और उन्हें पूजा की सामग्री भी नहीं मिल रही|

पटनाबीट्स के ‘एक कविता बिहार से’ में आज शामिल हो रहा है छठी माँ को समर्पित गीत- ‘सुपवो ना मिले’|

 

पटना सहरिया में सुपवो बुना ला हो
सुपवो ना मिले माई हे, कवन अवगुनवा|
रखिहऽ आसीस मईया, करीले जतनवा,
उगिहऽ सुरुज देव, हमरे अंगनवा|

सगरो बजरिया में गेंहुआ बिकाला हो
गेन्हुओं ना मिले माई हे, कवन अवगुनवा|

हाजीपुर सहरिया में केलवा बिकाला हो
केलवो ना मिले माई हे, कवन अवगुनवा|

बड़ा रे महात्तम छठी ओ बरतिया
मनसा पुरावेली सब छठी मईया
छूटे न अबकी छठ के बरतिया
छुट्टी लेके घरे अईह, करब परबीया| 

रखिहऽ आसीस मईया, करीले जतनवा,
उगीं ना सुरुज देव, हमरे अंगनवा|

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Neha Nupur

Neha Nupur has been interested in Music and Poetries since her childhood. She completed her initial education from Tagore Academy and started writing poems. She loves to read poetries and listen classical music.