मुस्कुराती रही कामना | एक कविता बिहार से

बिहार के बेतिया (प.चम्पारण) जिले में 11 अगस्त 1911 को जन्में तात्कालिक कवियों/गीतकारों के बीच मशहूर गोपाल सिंह ‘नेपाली’ जी बिहार के उन चंद कवियों में हैं जिनकी संजीदगी से बॉलीवुड भी अछूता न रहा| इनकी लिखी कवितायेँ हमारी पीढ़ी ने पाठ्य-पुस्तक में जरुर पढ़े हैं, पर ये जानना और भी सुखद है कि इनके लिखे हुए गीत लता मंगेश्कर, आशा भोंसले, मो. रफी और एस.डी.वर्मन जैसे विख्यात कलाकारों ने गाया है| हालाँकि वो जमाना हमारा नहीं वरन् हमारे दादा जी की पीढ़ी का रहा होगा, तो स्वाभाविक है हम वो गाने यूट्यूब पर ही सुन सकेंगे| गानों में कविता तलाशते हों तो इनके गाने अवश्य सुनें| उस मधुर और मद्धिम युग के कवि/गीतकार की कलम से प्रेम रस से सराबोर यह कविता (जिसे पढ़ते-पढ़ते गुनगुना भी सकते हैं) प्रस्तुत है “एक कविता बिहार से” में पटनाबिट्स के पाठकों के लिए| दिल धड़के तो सूचित करें|

मुस्कुराती रही कामना

तुम जलाकर दिए, मुँह छुपाते रहे,
जगमगाती रही कल्पना
रात जाती रही, भोर आती रही,
मुस्कुराती रही कामना ||

चाँद घूँघट घटा का उठाता रहा
द्वार घर का पवन खटखटाता रहा
पास आते हुए तुम कहीं छुप गए
गीत हमको पपीहा रटाता रहा

तुम कहीं रह गए, हम कहीं रह गए
गुनगुनाती रही वेदना
रात जाती रही, भोर आती रही,
मुस्कुराती रही कामना ||

तुम न आए, हमें ही बुलाना पड़ा
मंदिरों में सुबह-शाम जाना पड़ा
लाख बातें कहीं मूर्तियाँ चुप रहीं
बस तुम्हारे लिए सर झुकाना पड़ा

प्यार लेकिन वहाँ एकतरफा रहा
लौट आती रही प्रार्थना
रात जाती रही, भोर आती रही,
मुस्कुराती रही कामना ||

शाम को तुम सितारे सजाते चले
रात को मुँह सुबह का दिखाते चले
पर दिया प्यार का काँपता रह गया
तुम बुझाते चले, हम जलाते चले

दुःख यही है हमें तुम रहे सामने
पर न होता रहा सामना
रात जाती रही, भोर आती रही,
मुस्कुराती रही कामना ||

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