एक कविता बिहार से

मेरा जन्म बिहार में हुआ | एक कविता बिहार से

 

कहते हैं न एक खास व्यक्ति हमेशा ही आम दिखता है, जीता है | ऐसे ही थे भारत के ‘रत्न’ डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम. ‘मिसाइल मैन’, ‘जनता के राष्ट्रपति’, ‘मार्गदर्शक’, छात्र के शिक्षक और न कितने नामों से हर दिल पर ‘राज’ करने वाले पूर्व राष्ट्रपति की आज 85वीं जयंती हैं. हम उनकी उपलब्धियां, देश के प्रति उनका अगाध प्रेम, देश के विकास में उनके योगदान को भुलाये नहीं भूल पायेंगे. संसार से उन्होंने जो कुछ लिया वह पूरा का पूरा समाज को लौटा दिया. ईश्वर में गहरी आस्था रखने वाले कलाम हमारी सभ्यता के तीनों गुण- दम(आत्म नियंत्रण), दान और दया से भरपूर थे. बचपन से गीता व कुरान दोनों पढ़ने वाले सरल स्वभाव के कलाम कामयाबी के शिखर तक यूं ही नहीं पहुंचे. उनका संघर्ष भरा जीवन हर शख्स़ के लिए प्रेरणादायी है.

पटनाबीट्स की पेशकश ‘एक कविता बिहार से‘ में आज पेश है बिहार के युवाओं के लिए लिखी हुई उनकी कविता.

मैं बिहार की संतान हूं/मेरा जन्म बिहार में हुआ..
मैं उस जमीं पर रहता हूं, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ.

मैं उस पवित्र जमीं पर पढ़ता-लिखता हूं, जहां भगवान महावीर ने उपदेश दिये.
मैं उस धन्य जमीं पर पला-बढ़ा, जहां गुरु गोविंद सिंह ने जन्म लिया और वो यहां बार-बार कदम रखे.

मैं पढ़ता हूं, पढूंगा, उस जमीं पर, जहां महान खगोलविद् आर्यभट्ट ने पृथ्वी की कक्षा की खोज की, सूर्य की कक्षा व ग्रहों-तारों के रहस्य खोले.

गंगा नदी मुस्कुराती है/बिहार की उर्वर भूमि मेरा स्वागत करती है.. कड़ी मेहनत के लिए.

ऐसी सुंदर भूमि में, ईश्वर मेरे साथ हैं.
मैं काम करूंगा, काम करूंगा और सफल होऊंगा.

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