जागो बीर जवान देश के

जागो बीर जवान देश के | एक कविता बिहार से

अंगिका, मैथिली की एक बोली के रूप में जानी जाई जाती है| हालाँकि इसका अपना अलग विस्तृत और समृद्ध साहित्य संसार है| पटनाबीट्स पर ‘एक कविता बिहार से’ के माध्यम से अब तक हम मैथिली, भोजपुरी, उर्दू और हिंदी की देशभक्ति कवितायें पढ़ चुके हैं|
आज की कविता ‘अंगिका’ की| साहित्य रत्न सम्मान से सम्मानित कवि श्री सियाराम प्रहरी जी अंगिका के मशहूर कवि रहे हैं| 1 फरवरी 1932 ई० को बिहार के मुंगेर जिले के केशोपुर में जन्में श्री प्रहरी कविता के माध्यम से देश के नवजवानों को कुछ सन्देश देना चाहते हैं|

जागो बीर जवान देश के

जागो बीर जवान देश के
जागो बीर जवान,
धरती मांगै छौं तोहरा से
तन मन जीवन प्राण|

जागो तोहरा भारत के अभिमान जगाना छौं,
जागो तोहरा स्वर्णिम स्वर्ण विहान बुलाना छौं,
जागो तोहरा अर्जुन के गांडीव डठाना छौं,
जागो तोहरा ही गीता के ज्ञान सुनाना छौं|

धरती पर छौं स्वर्ग बसाना
हे धरती के प्राण,
जागो बीर जवान देश के
जागो बीर जवान|

चारो दिस छै त्राहि त्राहि छै मूक कंठ के वाणी,
चारो ओर उदासी फैलल करूणा भरल कहानी,
चारो दिस छै भूख प्यास मरूऐलो लगै जवानी,
विकल प्राण छै बेबस जीवन विकल आँख के पानी|

तोहरा कहिया ले होथौं
ई करूणा के पहिचान,
जागो बीर जवान देश के
जागो बीर जवान|

कहिया ले अन्हरिया मिटतै कहिया जोत पसरतै,
कहिया ले ई अपनो धरती हँसतै आरो गैतै,
कहिया ले दुख मिटतै हमरो कहिया सभ्भे जगतै,
कहिया रात अन्हरिया मिटतै कहिया मन हरसैते|

जागो जागो बीर पहरूआ
होना छौं बलिदान,
जागो बीर जवान देश के
जागो बीर जवान|

Don’t Want to miss anything from us

Get Weekly updates on the latest Beats from
Bihar right in your mail.

BEAT BY

Neha Nupur

Neha Nupur has been interested in Music and Poetries since her childhood. She completed her initial education from Tagore Academy and started writing poems. She loves to read poetries and listen classical music.