हाइकु, ऋतु पल्लवी के 15 हाइकु | एक कविता बिहार से

ऋतु पल्लवी के 15 हाइकु | एक कविता बिहार से

हाइकु! काव्य की एक अलग विधा| हो सकता है आप इसके बारे में जानते हों, हो सकता है बिल्कुल न जानते हों| अगर न जानते हों तो हाइकु से एक छोटा-सा परिचय आपको यहाँ हाइकु पढ़ने के बाद मिलेगा|
लेकिन कौन है आज ‘एक कविता बिहार से’ में जिसने हाइकु लिखी है?
शायद यही सोच रहे होंगे आप|  ‘एक कविता बिहार से’ में नई पेशकश है एक युवा रचनाकार की| 16 अक्टूबर 1978 ई० को सीतामढ़ी, बिहार में जन्मीं कवयित्री ऋतु पल्लवी जी साहित्य में गहरी रुचि एवं एक शोधकर्ता वाली पैनी नजर रखतीं हैं| विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकीं ऋतु जी फ़िलहाल हिंदी की शिक्षिका हैं| इनकी लिखी कविताओं की एक विस्तृत दुनिया है, लेकिन आज हम पढ़ेंगे ‘हाइकु’! छोटी-छोटी कवितायें, हाइकु!

ऋतु पल्लवी के 15 हाइकु 

1- नभ में पंछी
सागर – तन मीन
कहाँ बसूँ मैं ?

2- कितना लूटा
धन संपदा यश
घर न मिला .

3-चंदन -साँझ
रच बस गयी है
मन खाली था.

4-स्याही से मत
लिखो, रचनाओं को
मन उकेरो .

5-अकेली तो हूँ
मगर भीड़ को भी
ओढ़ लेती हूँ.

6-विश्वास टूटा
मानवता का एक
पाठ पा लिया .

7- माँ ने भी जब
छोटी बात बनाई
लगी पराई .

8- अब इंसान
में बम बसता है
ब्रह्म तो नहीं !

9-आज कितनी
द्रौपदियाँ हैं , पर
कृष्ण कंस हैं .

10- ओस- सी नर्म
निश्छल- सी दुनिया
नन्ही कलियाँ !

11-वाणी -सी शुभ्र
लक्ष्मी सी वरदायी
बिटिया आई .

12-सूरजमुखी-
सा मन खिला पर
मुरझाया भी .

13-संवेदन की
खिली छटा निराली ,
फिर भी खाली .

14- हाथ – हाथ में
बात – बात में खिले
मैं और तुम .

15-सब माँगा जो
जीवन से ,मुझे ही
क्यों छोड़ दिया ?

हाइकु! जापानी काव्य की एक विधा है| अन्य भाषाओँ में भी अब हाइकु लिखे जा रहे हैं, हिंदी में भी| वस्तुतः जापानी हाइकु में मूल विषय के केंद्र में ‘प्रकृति’ हुआ करती थी| भावनाएं एवं इंसानी मूल्य भी प्रकृति का हिस्सा हैं, तो हाइकु इनसे भी सम्बंधित हो सकता है| हिंदी में भी हाइकु की संक्षिप्तता वही है, लेकिन विषय व्यापक हो गये हैं| हिंदी में व्यंगात्मक हाइकु भी लिखे जा रहे हैं| तो अब मान सकते हैं कि हाइकु का मूल विषय कुछ व्यापक हुआ है|
हाइकु में तीन पंकितयां होती हैं (जैसा कि ऋतु जी ने लिखा है)| पहली पंक्ति में 5 अक्षर, दूसरी में 7 और तीसरी में पुनः 5 अक्षर होते हैं| अर्थात आदर्श हाइकु 17 अक्षरों की होती है| इन पंक्तियों की विशेषता होती है कि ये अपने आप में स्वतंत्र होती हैं परन्तु आखिरी अक्षर तक पहुँचते ही पाठक के सामने एक पूरी तस्वीर प्रस्तुत होती है, मन में गहन भाव का बोध होता है|
हाइकु को जापानी काव्यजगत में स्थान दिलाने वाले जापानी कवि बाशो ‘हाइकु’ को परिभाषित करते हैं, “एक अच्छा हाइकु क्षण की अभिव्यक्ति होते हुए भी किसी शास्वत जीवन-सत्य की अभिव्यक्ति होता है|”
अतः हाइकु मूलतः प्रकृति के सौन्दर्यभाव की चरम स्थिति का अनुभव कराती है|

Don’t Want to miss anything from us

Get Weekly updates on the latest Beats from
Bihar right in your mail.

BEAT BY

Neha Nupur

Neha Nupur has been interested in Music and Poetries since her childhood. She completed her initial education from Tagore Academy and started writing poems. She loves to read poetries and listen classical music.