बाहरी नहीं, बहारी हूँ | एक कविता बिहार से

पाठकों द्वारा भेजी गयी प्रविष्टियों को शामिल करने का समय है| (आप भी अपनी स्वलिखित कवितायेँ, चाहे वो किसी बोली या भाषा की हो, हमें भेज सकते हैं|) तो स्वागत करते हैं, ऐसे ही भेजी गयी इस कविता का, जो हमें श्री विकास कुमार जी ने भेजी है| विकास जी बिहारी हैं, आरा से संबंध रखते हैं और फ़िलहाल दिल्ली में शिक्षक हैं| अपनी मातृभूमि से अटूट लगाव रखने वाले, 12 अक्टूबर 1985 ई० को जन्में श्री विकार कुमार जी अपने बिहारी होने पर इठलाते हुए कहते हैं “ हाँ! मैं बिहारी हूँ ”|
कहने की जरूरत नहीं, हममें इस गर्व की अनुभूति होने की और इसके बने रहने की कितनी जरूरत है| आज PatnaBeats पर “एक कविता बिहार से” की इस कड़ी में शामिल यह कविता दर्शाती है कि कैसे आप अपने होने पर भरपूर गर्व कर सकते हैं और लेखनी के जरिये दूसरों को भी इसकी प्रेरणा दे सकते हैं| तो आईये… पढ़िये और कहिये “ हाँ! मैं बिहारी हूँ ” –

हाँ, मैं बिहारी हूँ

महानगर की सड़कों पर, हूँ रिक्शा खींचता
अपने पसीने से, पुरे परिवार को सींचता
अपना वहन स्वयं करता
ना चोर, ना भिखारी हूँ
हाँ, मैं बिहारी हूँ ||

झोपड़ी में रहकर भी, हूँ अट्टालिकाएँ बनाता
अपनी मेहनत बेचकर, दो वक़्त की रोटी कमाता
धूप और बारिश में भी श्रम धर्म निभाता
क्योंकि मैं श्रमिक, मेहनत का सहचारी हूँ
हाँ, मैं बिहारी हूँ ||

लाद बोझ कँधे पर, हूँ मैं फेरी लगाता
ठेली को ठेल, भाग्य को आजमाता
झेलता नुकसान, तो कभी मुनाफा कमाता
छोटा ही सही पर मैं भी व्यापारी हूँ
हाँ, मैं बिहारी हूँ ||

लाखों की भीड़ में भी, हूँ अपनी जगह बनाता
अध्ययनशीलता से अपना सोया भाग्य जगाता
अपनी कर्मठता से हूँ राजकीय तंत्र चलाता
करता नौकरी सरकारी हूँ
हाँ, मैं बिहारी हूँ ||

घर- परिवार से दूर, हूँ पढ़ने को जाता
कड़ी परिश्रम से, असाध्य को साध्य बनाता
उत्तीर्ण हो प्रशासनिक परीक्षा, अपने कर्म पर इठलाता
देखो मुझे, मैं भारतीय अधिकारी हूँ
हाँ, मैं बिहारी हूँ ||

चपरासी से प्रबंधन तक की, हूँ बागडोर सँभालता
वाक्चातुर्य से ‘सेल्स’ में सबसे ‘सेलू’ बन जाता
फर्राटेदार अँग्रेजी बोल, सबपर प्रभाव जमाता
रतजगा करता, मैं बी. पी. ओ. कर्मचारी हूँ
हाँ, मैं बिहारी हूँ||

भारत के तकनीकी -तंत्र को हूँ मजबूत बनाता
और चिकित्सा क्षेत्र में भी अच्छी पैंठ दिखाता
अपने ज्ञान, कौशल से सबको चकित कर जाता
सच कहता हूँ, वैज्ञानिकता का मैं भी पोषणचारी हूँ
हाँ, मैं बिहारी हूँ||
हाँ मैं बिहारी हूँ||
बाहरी नहीं, बहारी हूँ,
हाँ, मैं बिहारी हूँ||

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