ईद की पहली बधाई

ईद की पहली बधाई | एक कविता बिहार से

पटनाबीट्स अपने सभी पाठकों को ईद की मुबारकबाद देता है, आलम खुर्शीद साहब के शब्दों में-

नफरतों के गुबार धुल जाएँ,
उल्फतों के गुलाब खिल जाएँ
ईद इसबार इस तरह आए,
दिल के तारों से तार मिल जाएँ|

“एक कविता बिहार से” में आज हम ‘कविता’ के माध्यम से ईद का जश्न मनाने जा रहे हैं| बिहार भाई-चारे और सामाजिक सौहार्द का प्रणेता रहा है| इसी कड़ी में 25 मई 1991 को समस्तीपुर के तिस्वारा गाँव में जन्में युवा कवि श्री अमित शाण्डिल्य जी की ये कविता ईद और चाँद को लेकर बड़ी मासूमियत से कुछ कहना चाहती है| कविता सार्थक होगी गर हम उतनी ही मासूमियत से समझने की कोशिश करें| बताते चलें, ये कविता “Exclusively” हमारे लिए लिखी गयी, हमसे साझा की गयी| पटनाबीट्स इसके लिए आभार व्यक्त करता है| आईये पढ़ते हैं आज की- “एक कविता बिहार से”!

 ईद की पहली बधाई
ईद की पहली बधाई

चँदा रे! तुझको मुबारक़, ईद की पहली बधाई!

दूध-रोटी का कटोरा, लेके माँ पुचकारती थी
चँदा मामा को दिखाकर, फिर मुझे दुलारती थी
बिन तेरे दीदार के, कहो भला कब नींद आई
चँदा रे! तुझको मुबारक़, ईद की पहली बधाई!

जब हुआ थोड़ा सयाना, हो गया तेरा दीवाना
तुमको पाने की ख़लिश में, पड़ा था सारा जमाना
तेरी गैबन ने ना जाने, मेरी कितनी रात चुराई
चँदा रे! तुझको मुबारक़, ईद की पहली बधाई!

अपनी शीतलता से जग में, प्रेम का संचार कर दे
कर ले तम का हरण, और हर दिले उजियार कर दे
मुझको खानी है सिवईयाँ, अब तो तू दे दे दिखाई
चँदा रे! तुझको मुबारक़ ईद की पहली बधाई!

सुन चंदा! लेते आना, अमन-चैन की बातें भी
दिलों में सौहार्द का भाव, भाई-चारे की सौगातें भी
ईदी में दे देना चंदा, अपनी थोड़ी सी तरुणाई
चंदा रे! तुझको मुबारक़, ईद की पहली बधाई!

Malda Aam

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Neha Nupur

Neha Nupur has been interested in Music and Poetries since her childhood. She completed her initial education from Tagore Academy and started writing poems. She loves to read poetries and listen classical music.