ध्वजा वंदना

दहक रही है आज भी | एक कविता बिहार से

पटनाबीट्स की ‘एक कविता बिहार से’ की कड़ियों में आप पढ़ रहे हैं देशभक्ति से ओत-प्रोत कवितायें, बिहार की भिन्न-भिन्न भाषाओं/बोलियों में| अब तक मैथिली, भोजपुरी और उर्दू की रचनाएँ आप पढ़ चुके हैं| इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए आज राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह दिनकर जी की हिंदी कविता आपके समक्ष है, जिसमें राष्ट्र ध्वज को नमन करने की बात हो रही है| आज जब कई जगह राष्ट्रगान गाना और राष्ट्रध्वज का सम्मान करना ‘Not So Cool’ वाले फैशन में है, तब इस कविता की पंक्तियाँ अन्दर ही अन्दर दब रही देशभक्ति को एक धार देती हैं|
जगाइए देशप्रेम को, देश और देश के प्रतीकों का सम्मान करिये | मातृभूमि की ध्वजा को समर्पित कविता- ‘ध्वजा वंदना’, रामधारी सिंह दिनकर जी की कलम से|

ध्वजा वंदना

नमो, नमो, नमो।
नमो स्वतंत्र भारत की ध्वजा, नमो, नमो!
नमो नगाधिराज – शृंग की विहारिणी!
नमो अनंत सौख्य – शक्ति – शील – धारिणी!
प्रणय – प्रसारिणी, नमो अरिष्ट – वारिणी!
नमो मनुष्य की शुभेषणा – प्रचारिणी!
नवीन सूर्य की नई प्रभा, नमो, नमो!
हम न किसी का चाहते तनिक अहित, अपकार।
प्रेमी सकल जहान का भारतवर्ष उदार।
सत्य न्याय के हेतु
फहर-फहर ओ केतु
हम विचरेंगे देश-देश के बीच मिलन का सेतु
पवित्र सौम्य, शांति की शिखा, नमो, नमो!
तार-तार में हैं गुँथा ध्वजे, तुम्हारा त्याग!
दहक रही है आज भी, तुम में बलि की आग।
सेवक सैन्य कठोर
हम चालीस करोड़
कौन देख सकता कुभाव से ध्वजे, तुम्हारी ओर
करते तव जय गान
वीर हुए बलिदान,
अंगारों पर चला तुम्हें ले सारा हिंदुस्तान!
प्रताप की विभा, कृषानुजा, नमो, नमो!

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Neha Nupur

Neha Nupur has been interested in Music and Poetries since her childhood. She completed her initial education from Tagore Academy and started writing poems. She loves to read poetries and listen classical music.