बिहार को ना शर्मिदा करें और ना शर्मिंदा होये - PatnaBeats

बिहार को ना शर्मिदा करें और ना शर्मिंदा होये

बिहार का इतिहास बड़ा ही गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। जनक, जरासंध, कर्ण, सीता, कौटिल्य, चन्द्रगुप्त, मनु, याज्ञबल्कय, मण्डन मिश्र, भारती, मैत्रेयी, कात्यानी, अशोक, बिन्कुसार, बिम्बिसार, भगवान बुद्ध, महावीर, शेरशाह, मखदूम शुरफुद्दीन अहमद यहिया मनेरी से लेकर बाबू कुंवर सिंह, बिरसा मुण्डा, नालंदा बिश्वविद्यालय के वाइस चांसलर, बाबू राजेन्द्र प्रसाद, जय प्रकाश नारायण, रामधारी दिन्कर, उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ, नार्गाजून, डॉ श्रीकृष्ण सिंह, दशरथ मांझी और न जाने कितने महान एवं तेजस्वी पुत्र एवं पुत्रियों को अपने मिट्टी में जन्म देकर भारत को विश्व के सांस्कृतिक पटल पर अग्रणी बनाने में बिहार का सर्वाधिक स्थान रहा है।

फिर भी बिहारवासी अपने से भी बिहार की बदनामी करते हैं। यदि ट्रेनों में चले तो आप देखेंगे कि एक बिहारी बिहार के बारे में कितनी गलत-गलत बातें किया करता है। कहता है कि बिहार में बहुत अराजकता है, ये है, वो है। बातों के आगे बिहार के लोगो की ईमानदारी मेहनत को भूल जाता है। आजकल सोशल मीडिया पर कुछ बिहारी ही बिहार को बदनाम कर रहे है।

शायद उनको पता नहीं कि बिहारी मेहनती और जुझारू होते हैं। तभी तो पनडुब्बी में बिहारी ही टिकते है। दूसरे राज्य वाले नहीं टिकते। वहाँ ज्यादा मेहनत करनी होती है। बिहार के आई.पी.एस, आई.ए.एस भारत के पैमाने पर सर्वोत्कृष्ट माने जाते हैं। सारी बातों के बावजूद हम अपने को शर्मिंदा कर रहे है।

जातीय संघर्ष तमिलनाडु में भी जबरदस्त होते है। स्थिति ऐसा हो जाता है कि शहर में कर्फ्यू लगाना पड़ता है। आंध्रप्रदेश में भी उग्रवादी लोग हैं। मंत्री के घर बम से उड़ा दिये जाते है। ऐसा बाकि प्रदेशो में भी होता है। महाराष्ट्र में भी जब मराठवाड़ा विश्वविद्यालय का नाम अम्बेडकर के नाम पर करने की कोशिश होती है तो कितने जिलों में कर्फ्यू लग जाते है। दिल्ली में रोड के नाम बदले जाने पर विरोध होते है, सभी जानते है लेकिन ऐसा हमारे प्रदेश बिहार में नहीं होता। फिर भी बिहार को बदनाम किया जाता हैं।

न्यूज़ चैनल पर देखी हुयी बहुत पहले की बात बता रहा हूँ- बिजलीकरण के लिए बिहार को एक पैसा नहीं मिला तो केंद्र में बैठे बिहार के ही लोगों से जबाब मिलता है- वहाँ पैसा देकर क्या होगा? तार काट लेता है। गाँव में चोर तार काट लेते है। हिस्सा नहीं मिला तो यह जबाब है। मतलब यह कि राजनीति के चलते, राजनीति स्वार्थ के चलते, राजनीति में विपक्ष के चलते, बिहार को बर्बाद करने से भी लोग बाज नहीं आये। यही सब कारण है बिहार का बाहर में छवि खराब होने का।

बिहार के जो लोग बिहार की राजनीति से जुड़े हुए है और बिहार के ऑफिसर्स, जो नौकरशाह है, वे दिल्ली, मद्रास, कलकत्ता जाकर कहते हैं कि शासक वर्ग के मौजूदा लोग कुछ भी अच्छा नहीं करेंगे। हमारे बीच में राजनीति करने वाले लोगों के द्वारा या नौकरशाही के द्वारा या और भी हमारे बंधु हैं उन लोगों के द्वारा यह बात कही जाती है इससे बिहार का नुकसान होता है। तिल को ताड़ बनाकर के पेश किया जाता है। बिहार की छोटी सी गलतियों को जबकि दूसरी जगहों की गलतियों को जो ताड़ है, उसे तिल से भी छोटा स्थान दिया जाता है। और परेशानी तब हो जाती है, जब कहा जाता है कि बिहार में जो कुछ भी हो रहा है, वह और राज्यों में नहीं हो रहा है। इसतरह से बिहार को पेश किया जाता है। जिससे उद्योगपति भी बिहार में अपना उद्योग लगाने से डर जाते हैं।

कुछ महीने पहले फेसबुक पर पढ़े थे- गंगा बचाओ अभियान से जुड़े दूसरे राज्य के लोग इस अभियान के लिए बिहार आये उनको बिहार के लोगों से इतना प्यार मिला की वो बोले बिहार को हम कभी भूल नहीं पाएंगे। वो यहाँ के लोगों की एकजुटता देखकर चकित थे। इससे पहले वो लोग बिहार की बुराई ही सुनी थी लेकिन बिहार ने उनका पहले आगमन पर ही मनमोह लिया।

एक कहावत हैं कि जब बिहार को ठण्ड लगती है, तो भारत को छींक आती है। यह उल्लेखनीय है कि दो वृहद आंदोलन बिहार में हुए। एक, बिहार के चंपारण में महात्मा गांधी का आंदोलन, जिसमें उन्होंने सत्याग्रह के हथियार को आजमाया। दूसरा, जनतंत्र के रक्षा के लिए तानाशाही के खिलाफ जे.पी. का आंदोलन, जो बिहार में शुरू होकर पूरे देश में फैला। उनकी संपूर्ण क्रांति ने इस राज्य एवं समाज में परिवर्तन और समग्र विकास की अवधारणा दी। फिर भी समाज में जो स्थान गरीब लोगों का, दबे हुए लोगों का है, वही स्थान बिहार का भारत के राज्यों में है। दूसरे राज्यों को ही देखे तो जहाँ बिहार को कुछ देने की बात आती है तो वहां विरोध भी होने लगता है।

तमाम अटकलों के बाद भी बिहार विकास कर रहा हैं। आज बिहार में केंद्र की मदद से लगभग सभी कॉलेज है। जहाँ दूसरे राज्य के भी छात्र पढ़ने आते है। बंद पड़े नालंदा विश्वविद्यालय शुरू हो चूका है जहाँ विदेश के भी छात्र पढ़ते है। मेट्रोज के बाद बिहार में सबसे ज्यादा वाहन है। कुछ उद्योग भी शुरू हो चूके है। बिहार को अभी बहुत तरक्की करनी होगी। बिहार पर जो लोग हँस रहे है.. तो उस हँसी से हम निराश नहीं हो

अपराध घटे/थमे,इसके लिए सरकार का घेरा ठीक है,पर बिहार को बदनाम कर देने की मुहिम मंजूर नहीं है ।

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