बिहार के गॉंवों तक कैब सर्विस पहुंचाने वाले दिलखुश युवाओं के लिए हैं रोल मॉडल

Dilkhush Kumar

सहरसा के बनगांव का एक 30 वर्षीय नौजवान दिलखुश कुमार जो कल तक रोजगार मेलों में बेरोजगारों के साथ खड़ा हुआ करता था आज आर्या गो कैब सर्विस का फाउंडर एवं सीईओ है।  

मैट्रिक थर्ड डिवीजन दिलखुश कुमार से सीईओ एंड फाउंडर दिलखुश कुमार का सफर आसान नहीं था।

मैट्रिक के बाद उनके पिता चाहते थे कि वह आईटीआई करके कोई सरकारी नौकरी करे। आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से आईटीआई के लिए पैसे इकट्ठा नहीं हो पाए। दिलखुश बड़े घमंड से कहते हैं “अच्छा हुआ पापा पैसे जमा नहीं कर पाए,अगर मैं पढ़ लेता तो आज यह नहीं कर पाता।”

दिलखुश बताते हैं कि आर्या गो की शुरुआत उन्होंने 2016 में की परंतु इस प्रोजेक्ट पर काम बहुत वर्षों से चल रहा था।  इस बीच दिलखुश ने  ड्राइवर एवं कंस्ट्रक्शन साइट पर काम कर अपनी कंपनी के शुरुआती निवेश के लिए पांच लाख रुपयों का इंतजाम किया।

स्टेशन पर उतरने के बाद गांव जाने के लिए गाड़ी ना मिलना, स्टेशन पर रात गुजारना, प्राइवेट गाड़ी वालों का मनमाना दाम वसूलना, दिन में तो फिर भी प्राइवेट टैक्सी वाले मिल जाते हैं पर रात में बड़ी मुश्किल होती है – इन सभी समस्याओं को देखते हुए दिलखुश कुमार ने ऑनलाइन टैक्सी सर्विस की शुरुआत की।

दूसरी कैब कंपनियों की खामियों को अपनी खूबी बताते हुए दिलखुश कहते हैं कि आर्या गो कैब में कैंसिलेशन की ऑप्शन नही है ,”यदि एक बार राइड कंफर्म हो गई तो उसे ड्राइवर पूरी करते है।”  दूसरी खूबी बताते हुए दिलखुश कहते हैं  “पहले जो सफर ₹3000 का हुआ करता था उसे उन्होंने ₹1600 का कर दिया है।”

दिलखुश बताते हैं कि उनकी कंपनी ड्राइवर तथा राइडर्स दोनों की ही सुरक्षा की गारंटी देती हैं।  ऐप एक इमरजेंसी बटन तथा राइड ट्रैक करने की भी सुविधा के साथ उपलब्ध है। “किसी भी आपातकालीन स्थिति में ड्राइवर या राइडर के द्वारा इमरजेंसी बटन दबाते ही कंट्रोल रूम को सिग्नल एवं लोकेशन चला जाता है, जिससे कि 50 किलोमीटर क्षेत्र के अंदर जितनी भी कैब्स हैं सभी को उस कैब तक पहुँचने का निर्देश दिया जाता है,” फाउंडर बताते है।  

सहरसा से शुरुआत करने वाली आर्य गो कैब ने अब तक बिहार के 7 जिलों सहरसा ,सुपौल, मधेपुरा ,दरभंगा , मधुबनी, पूर्णिया ,कटिहार एवं मुजफ्फरपुर तक का सफर तय कर लिया है।  उनका अगला पड़ाव बिहार के अन्य जिले हैं जिनमें पटना जिला भी शामिल है।

ज्यादातर लोग अपनी राइड्स पहले से ही बुक कर लेते है, महज 10% राइडर्स ही इंस्टेंट राइड के लिए बुक नाउ करते हैं।  

ज्यादातर लोंग आर्य गो कैब डिस्टेंस राइड के लिए बुक करते है जो दूरदराज गांव में पिकअप एवं ड्राप की सुविधा उपलब्ध कराती  हैं।

दिलखुश कुमार बताते हैं कि 2016 से 2021 तक का सफर काफी चुनौतीपूर्ण रहा।  की वजह से प्राइवेट गाड़ी को कैब सर्विस में नहीं इस्तेमाल करने की वजह से मार्केट में कमर्शियल गाड़ियों की कमी रही, और इसके लिए नए ऑनर्स को  कमर्शियल गाड़ी लेने के लिए कन्वींस करना पड़ा। पैसों की कमी के कारण बढ़िया प्रचार प्रसार भी नहीं मिलता था।

Arya Go Cab

आज दिलखुश 550 से अधिक बेरोजगारों को रोजगार प्रदान कर रहे है।  260 से अधिक ड्राइवर 100 से अधिक ड्राइवर/ओनर, 200 से अधिक ओनर तथा 28 ऑफिस स्टाफ मौजूद है।  दिलखुश कुमार बताते हैं “कोरोना काल में दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में कैब सर्विस देने वाले बिहारी भाइयों की नौकरी चली गई,जो घर वापस आ गए, उन ड्राइवरों को आर्य गो कैब सर्विस के साथ जोड़ कर पलायन करने वालों को यह विश्वास दिलाया जा रहा है की रोजगार बिहार में भी सृजित किया जा सकता है।”

अपने नाम की ही तरह दिलखुश लोगों को खुश करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। उनकी कैब सर्विस सरकारी अस्पतालों में बेटी के जन्म लेने पर जच्चा-बच्चा को घर पहुंचाने की मुफ्त सेवा देती हैं। बिना दहेज के होने वाली शादियों में दूल्हे के लिए मुफ्त में गाड़ियां उपलब्ध करवाते हैं। इसके अलावा बॉर्डर पर शहीद हुए जवानों के परिवार को साल में 200 किलोमीटर की यात्रा मुफ्त में करवाने और उससे अधिक पर 50% छूट देते हैं।

2018 में किसी व्यक्तिगत कारण से 7/8 महीने के लिए कंपनी बंद हो गई थी 2019 में फिर से जीरो से स्टार्ट करना किया।  

दिलखुश बताते हैं  “कोरोना काल में उनकी कंपनी को काफी बूस्ट अप मिला, जिस वक्त अन्य प्राइवेट गाड़ियां लोगों से मनमाना दाम वसूल रही थी उस समय भी आर्या गो कैब लॉकडाउन के पहले से निर्धारित रेट पर ही चल रही थी, जिससे कि माउथ पब्लिसिटी भी खूब हुई।”

मार्केट में मौजूद अन्य प्राइवेट कैब के बारे में पूछने पर दिलखुश कहते हैं  “बिहार में सफल होने के लिए कंज्यूमर के व्यवहार को पढ़ना और बिहारियों की भावनाओं को समझना अत्यधिक जरूरी है, अन्य कैब वाले कंज्यूमर बिहेवियर को ऑनलाइन पढ़ते हैं लेकिन हम यहां इनके बीच रहकर पढ़ते हैं।”

बस चालक पवन खां के पुत्र दिलखुश कुमार अब बिहार के सबसे बड़े टैक्सी सर्विस प्रोवाइडर बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुके है।

चंद्रगुप्त इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट पटना (सीआईएमपी) ने राज्य सरकार द्वारा बेहतरीन काम कर रहे 12 स्टार्टअप में दिलखुश कुमार का चयन किया है। सीआईएमपी तथा आईआईएम इंदौर द्वारा दिलखुश के आर्या गो कैब को केस स्टडी के लिए भी चुना गया है। स्टार्टअप सीरीज के तहत आर्या गो के ऊपर किताब का प्रकाशन भी किया जाएगा। इसके अलावा सीआईएमपी द्वारा एक डाक्यूमेंट्री भी बनायी जायेगी। आर्या गो कैब का प्रबंधन बिहार सरकार के स्टार्टअप योजना के तहत किया जा रहा है।

दिलखुश कुमार के सपने उनकी उम्र से कहीं ज्यादा बड़े हैं,वे बताते हैं “आर्या गो केवल कैब तक ही सीमित नहीं रहेगी बल्कि वे बस और एंबुलेंस सेवा के लिए भी कार्य करना चाहते हैं।”

बिहार के युवाओं को संबोधित करते हुए दिलखुश कहते हैं कि “बिहारियों के पास टैलेंट की कोई कमी नहीं है, परंतु रोजगार के अभाव के कारण लोग यहां से पलायन कर जाते हैं जबकि इस राज्य के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।”

 वे चाहते हैं कि यहां के युवाओं को एंटरप्रेन्योरशिप के बारे में बताया जाए तथा उन्हें प्रोत्साहित किया जाए ताकि वे खुद के लिए और दूसरों के लिए रोजगार सृजित कर सकें।

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