गउरा एतना तपवा कयिलु, तू बउरहवे लागी ना

गउरा एतना तपवा कयिलु, तू बउरहवे लागी ना | एक कविता बिहार से

गउरा एतना तपवा कयिलु, तू बउरहवे लागी ना| बउरहवे लागी ना हो बउरहवे लागी ना|| इनका दुअरवा गउरा सूपवो ना दउरा, हो बउरहवे लागी ना|| गउरा एतना तपवा कयिलु, तू बउरहवे लागी ना| सावन का महीना हो, सोमवारी का पर्व हो...
पर ख़ामोशी चुप्पी नहीं होती

पर ख़ामोशी चुप्पी नहीं होती | एक कविता बिहार से

बड़ी देर से, सूखी बूंदें पलकों की छाँह हैं टटोल रहीं। बड़ी देर से, तुम्हारी बाट जोह रही हैं तुम्हारी निशानियाँ। बड़ी देर से, लगता है, कोई कविता जन्म लेने वाली है।। ‘बड़ी देर से’ शीर्षक कविता की ये पंक्तिय...
छतों पर लड़कियाँ

छतों पर लड़कियाँ | एक कविता बिहार से

अलोक धन्वा, हिंदी काव्य जगत में एक और बहुचर्चित और मीडिया में विवादित चेहरा| बिहार के मुंगेर जिले के बेलबिहमा में 1948 ई० में जन्में श्री धन्वा जी क्रांतिकारी कवितायेँ लिखने के लिए जाने जाते रहे हैं| सामाजिक और...
गंगा-स्तुति

बड़ सुख सार पाओल तुअ तीरे | एक कविता बिहार से

माँ तेरी निर्मलता की दरकार तो है कब तक टालेंगे, कि सरकार तो है!   माँ गंगा की पवित्रता आज भी हर धर्म के लिए पूजनीय है, लेकिन निर्मलता के नाम पर अभी मेरे जेहन में यही पंक्ति बनकर आई| गंगा माँ की स्तुति...
एक ज़िंदा कविता

एक ज़िंदा कविता | एक कविता बिहार से

श्री पवन श्रीवास्तव जी, छपरा जिला के मढौरा में 11 मई 1982 को जन्में| ये बिहार के ऐसे पहले फिल्म मेकर हैं, जिन्होंने इंडिपेंडेंट क्राउड फंडेड फिल्म बनाई, ‘नया पता’ ’| ये फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े रहे हैं और उसी गत...
हाँ, मैं बिहारी हूँ Photo By Bashshar Habibullah

बाहरी नहीं, बहारी हूँ | एक कविता बिहार से

पाठकों द्वारा भेजी गयी प्रविष्टियों को शामिल करने का समय है| (आप भी अपनी स्वलिखित कवितायेँ, चाहे वो किसी बोली या भाषा की हो, हमें भेज सकते हैं|) तो स्वागत करते हैं, ऐसे ही भेजी गयी इस कविता का, जो हमें श्री विक...
साज़िश

जाने क्यों वो काग़ज की नाव मुस्कुराई | एक कविता बिहार से

इस कविता की भूमिका में कुछ भी नहीं| “एक कविता-बिहार से!” में आज सीधे-सीधे मुलाकात कराते हैं बिहार की युवा कवयित्री प्रतिमा सिंह जी की ‘अहा! जिन्दगी’ पत्रिका में प्रकाशित इस रचना से| थोड़ा धैर्य मांगेगी, और फिर आ...
तुम कहाँ हो?

तुम कहाँ हो ? | एक कविता बिहार से

1916 में गया के मैगरा गाँव में जन्में आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री जी बिहार की साहित्यिक शान में एक और अनमोल रत्न हैं| हिंदी साहित्य से पहले संस्कृत में लिखा करते थे| इन्होंने 2 बार पद्म पुरस्कार लेने से मना कर द...
एक आवाज़ में आवाज़ मिलाते हुए लोग| एक कविता बिहार से, photo by Bashshar Habibullah

एक आवाज़ में आवाज़ मिलाते हुए लोग | एक कविता बिहार से

“लुत्फ़ हमको आता है अब फरेब खाने में, आजमाए लोगों को रोज आजमाने में| दो घड़ी के साथी को हमसफ़र समझते हैं, किस कदर पुराने हैं, हम नये जमाने में| तेरे पास आने में, आधी उम्र गुज़री है, आधी उम्र गुजरेगी, तुझसे दूर...
आओ रानी हम ढोयेंगे पालकी

आओ रानी हम ढोयेंगे पालकी| एक कविता बिहार से

“एक कविता बिहार से” में आज आप पढ़ेंगे हिंदी काव्यजगत के उन चंद कवियों में शुमार कवि को जिनकी पहुँच आम ग्रामीण नागरिक से लेकर धनिक शहरी वर्ग तक रही है| इनके विषयों में इतनी विविधता और व्यापकता है कि हमसब कहीं-न-क...
ईद की पहली बधाई

ईद की पहली बधाई | एक कविता बिहार से

पटनाबीट्स अपने सभी पाठकों को ईद की मुबारकबाद देता है, आलम खुर्शीद साहब के शब्दों में- “नफरतों के गुबार धुल जाएँ, उल्फतों के गुलाब खिल जाएँ ईद इसबार इस तरह आए, दिल के तारों से तार मिल जाएँ|” “एक कवित...
पहचान | एक कविता बिहार से

पहचान | एक कविता बिहार से

“एक कविता बिहार से” में आज आप पढ़ेंगे नए युग के कलमकार को| युवा कवयित्री “अनुप्रिया” जी, सुपौल, बिहार से संबंध रखती हैं| आकाशवाणी पर कविता-पाठ करने के साथ-साथ कई पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं| 1982 में...
मुस्कुराती रही कामना | एक कविता बिहार से

मुस्कुराती रही कामना | एक कविता बिहार से

बिहार के बेतिया (प.चम्पारण) जिले में 11 अगस्त 1911 को जन्में तात्कालिक कवियों/गीतकारों के बीच मशहूर गोपाल सिंह ‘नेपाली’ जी बिहार के उन चंद कवियों में हैं जिनकी संजीदगी से बॉलीवुड भी अछूता न रहा| इनकी लिखी कविता...
एक कविता बिहार से

जब नाश मनुज पर छाता है | एक कविता बिहार से !

नमस्कार! दुआ-सलाम! बिहार से जुड़ी ख़बरों-लेखों का यह संयुक्त पोर्टल आपको उन महारथियों से भी मिलवाता रहा है जो बिहार के ‘बिहार’ होने में खास जगह रखते हैं| बिहार के सकारात्मक परिदृश्य को आपके समक्ष सफलता से प्रस्त...