सजग रहीहऽ

कोइला के बाढ़ भइल, सोना दहाता | एक कविता बिहार से

हीरा प्रसाद ठाकुर का जन्म बिहार के रोहतास जिले के नावाडीह ग्राम में 5 जनवरी 1948 को स्वतंत्र भारत में हुआ| राष्ट्रपति द्वारा ‘Literary Figure’, राज्य सरकार द्वारा ‘भिखारी ठाकुर सम्मान’ के साथ-साथ इन्हें कई साहि...
भाई-बहन

मैं भाई फूलों में भूला, मेरी बहन विनोद बनी | एक कविता बिहार से

रक्षाबंधन की ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ पेश है ‘एक कविता बिहार से’| 1911 में जन्में कवि गोपाल सिंह नेपाली जी बिहार के बेतिया जिले के निवासी थे| इनके गीत फ़िल्मी गानों में भी प्रयोग हुए हैं| ‘एक कविता बिहार से’...
झंडा की बोलै छै

झंडा की बोलै छै | एक कविता बिहार से

15 अगस्त को कितने प्रेम से झंडे फहराए जाते हैं, संकल्प लिए जाते हैं| लेकिन उसके बाद क्या? क्या हम उस संकल्प को पूरा करने की कोशिश करते हैं? क्या समझते हैं कि झंडा क्या कहना चाहता है? आज की कविता ‘अंगिका’ में ह...
उतान भइल रे

आनन्द सबका समान भइल रे | एक कविता बिहार से

किसी भी प्रान्त से हों हम, किसी भी भाषा में बाते करते हों, कुछ भी पहनते हों, किसी भी पेशे से जुड़े हों, दिल से हमसब हिंदुस्तानी हैं| कल 15 अगस्त है| हमारी आजादी का दिन| स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए हम झंडा फहराएँगे...
हमारा देश

यह जीवन क्या है? निर्झर है | एक कविता बिहार से

यह जीवन क्या है? निर्झर है, मस्ती ही इसका पानी है सुख-दुःख के दोनों तीरों से चल रहा राह मनमानी है| हर छोटे-बड़े मौके पर ‘जीवन’ का चित्र स्पष्ट दर्शाने हेतु इस्तेमाल की जानी वाली ये पंक्तियाँ क्या आपकी नज़र से भ...
जागो बीर जवान देश के

जागो बीर जवान देश के | एक कविता बिहार से

अंगिका, मैथिली की एक बोली के रूप में जानी जाई जाती है| हालाँकि इसका अपना अलग विस्तृत और समृद्ध साहित्य संसार है| पटनाबीट्स पर ‘एक कविता बिहार से’ के माध्यम से अब तक हम मैथिली, भोजपुरी, उर्दू और हिंदी की देशभक्त...
ध्वजा वंदना

दहक रही है आज भी | एक कविता बिहार से

पटनाबीट्स की ‘एक कविता बिहार से’ की कड़ियों में आप पढ़ रहे हैं देशभक्ति से ओत-प्रोत कवितायें, बिहार की भिन्न-भिन्न भाषाओं/बोलियों में| अब तक मैथिली, भोजपुरी और उर्दू की रचनाएँ आप पढ़ चुके हैं| इसी सिलसिले को आगे ब...
बिस्मिल अज़ीमाबादी

तो ‘सरफ़रोशी की तमन्ना..’ एक बिहारी बिस्मिल ने लिखी है !!

है लिए हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर, और हम तैयार हैं सीना लिए अपना इधर। ख़ून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्क़िल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। महान क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल अक्सर ये जो ...
बटोहिया

सूतल अमर के जगावे रे बटोहिया | एक कविता बिहार से

30 अक्टूबर 1884 ई० को बिहार के छपरा जिला (दहियावां) में जन्में श्री रघुवीर नारायण जी की कविता बटोहिया के बारे में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी ने कहा था, “बाबु रघुवीर नारायण बिहार में राष्ट्रीयता के आदिचारण...
भारत माता

भारत माता | एक कविता बिहार से

15 अगस्त, भारत की आजादी का दिन है| क्यों न ये उत्सव पूरे महीने मनाया जाये| इस महीने बिहार के कविओं द्वारा रचित देशप्रेम से ओत-प्रोत कवितायें भी आती रहेंगी आपके सामने, वो भी बिहार के अलग-अलग क्षेत्रिय भाषाओं से ...
गउरा एतना तपवा कयिलु, तू बउरहवे लागी ना

गउरा एतना तपवा कयिलु, तू बउरहवे लागी ना | एक कविता बिहार से

गउरा एतना तपवा कयिलु, तू बउरहवे लागी ना| बउरहवे लागी ना हो बउरहवे लागी ना|| इनका दुअरवा गउरा सूपवो ना दउरा, हो बउरहवे लागी ना|| गउरा एतना तपवा कयिलु, तू बउरहवे लागी ना| सावन का महीना हो, सोमवारी का पर्व हो...
पर ख़ामोशी चुप्पी नहीं होती

पर ख़ामोशी चुप्पी नहीं होती | एक कविता बिहार से

बड़ी देर से, सूखी बूंदें पलकों की छाँह हैं टटोल रहीं। बड़ी देर से, तुम्हारी बाट जोह रही हैं तुम्हारी निशानियाँ। बड़ी देर से, लगता है, कोई कविता जन्म लेने वाली है।। ‘बड़ी देर से’ शीर्षक कविता की ये पंक्तिय...
छतों पर लड़कियाँ

छतों पर लड़कियाँ | एक कविता बिहार से

अलोक धन्वा, हिंदी काव्य जगत में एक और बहुचर्चित और मीडिया में विवादित चेहरा| बिहार के मुंगेर जिले के बेलबिहमा में 1948 ई० में जन्में श्री धन्वा जी क्रांतिकारी कवितायेँ लिखने के लिए जाने जाते रहे हैं| सामाजिक और...
गंगा-स्तुति

बड़ सुख सार पाओल तुअ तीरे | एक कविता बिहार से

माँ तेरी निर्मलता की दरकार तो है कब तक टालेंगे, कि सरकार तो है!   माँ गंगा की पवित्रता आज भी हर धर्म के लिए पूजनीय है, लेकिन निर्मलता के नाम पर अभी मेरे जेहन में यही पंक्ति बनकर आई| गंगा माँ की स्तुति...