दिवाली

अइले दिवाली लै के जोतिया के धार | एक कविता बिहार से

  दिवाली आ गयी है| पटाखे और खिलौने ख़रीदे जा रहे हैं| लक्ष्मी-गणेश पूजन की तैयारियाँ चल रही हैं| समाज में भिन्न-भिन्न तबके के लोग हैं| कुछ लोग इस दिन जुआ खेलने का आनंद लेते हैं वहीं इसी समाज में कुछ...
देखें तो

इश्क़े के सदमे उठाने नहीं आसाँ ‘हसरत’ | एक कविता बिहार से

सीना तो ढूँढ लिया मुत्तसिल अपना हम ने, नहीं मालूम दिया किस को दिल अपना हम ने| दर ग़रीबी न था कुछ और मयस्सर ‘हसरत’, इश्‍क़ की नज्र किया दीन ओ दिल अपना हम ने| “दौर कोई भी हो, इश्क़ की तासीर वही होती है”, नज्...
Animesh Dutta, Ganga Ghat, PatnaBeats

भीष्म गंगा का पुत्र है | एक कविता बिहार से

गौतम वसिष्ठ जी कर्नाटक में रहते हैं| मुख्यतः बिहार से हैं, यहीं पले-बढ़े| लखीसराय जिले के बल्गुदार गाँव में इनका जन्म हुआ| हिंदी, इंग्लिश और रसियन साहित्य पर पकड़ रखते हैं और इन तीनों ही भाषाओं में कविता लिखन...
patnabeats, सुजाता

दिनकर डूबता है तो उगता भी तो है हर रोज | एक कविता बिहार से

शुभकामना संदेश के साथ अपनी रचना हमें सौंपी है सुजाता प्रसाद जी ने| महिलाओं के साथ अच्छी बात यह होती है कि इनके दो-दो घर हो सकते हैं| इसी तर्ज़ पर श्रीमती सुजाता जी का भी मायका दरभंगा, बिहार में है और ससुराल बीर...

दुःख तेरे देश इतने निंदिया न आये रे | एक कविता बिहार से

यह सच है, बॉलीवुड का एक युग संगीतकारों और गीतकारों के नाम रहा है| यह भी उतना ही सच है कि नये युग के गीत की तुलना हमेशा पुराने युग से की जाती रही है| नये कलमकारों में बहुत कम ऐसे हैं जिनकी कलम में प्राकृतिक निकट...
एक कविता बिहार से

मेरा जन्म बिहार में हुआ | एक कविता बिहार से

  कहते हैं न एक खास व्यक्ति हमेशा ही आम दिखता है, जीता है | ऐसे ही थे भारत के ‘रत्न’ डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम. ‘मिसाइल मैन’, ‘जनता के राष्ट्रपति’, ‘मार्गदर्शक’, छात्र के शिक्षक और न कितने नामों से हर दिल...
कलीम आजिज़

तुम क़त्ल करो हो कि करामात करो हो | एक कविता बिहार से

कहते हैं, "दिल से जो बात निकली ग़ज़ल हो गयी"। सही मायने में ये वो कलमकार थे जिन्होंने दिल की बात कही और कुछ ऐसे कही कि हर पढ़ने वाले के दिल तक पहुँचे।  कलीम आजिज़ उर्फ़ कलीम अहमद का जन्म 11 अक्टूबर 1924 को तेलहाड़...
राम, दशहरा

नाम पुछई छै राम कहै छै अबध के राजकुमार छै | एक कविता बिहार से

हर बुराई का नाश होना सुनिश्चित है ताकि अच्छाई की जय-जयकार हो सके| इसी धारणा को सम्पूर्ण करती है भगवान् राम की रावण पर मिली जीत| इस जीत की ख़ुशी में दशहरा का त्यौहार मनाया जाता है| रावण का दहन किया जाता है तथा प्...
दुर्गा पूजा

हे अम्बिके, सुनु प्रार्थना, जगदम्बिके, सुनु प्रार्थना | एक कविता बिहार से

दुर्गा पूजा के शुभ मौके पर माँ दुर्गा की प्रार्थना में एक कविता प्रस्तुत है| कविता की भाषा मैथिलि है तथा कवि हैं पंडित श्री भोला झा ‘विमल’ जी| ‘विमल’ जी बिहार के मधुबनी जिला के चिकना नामक ग्राम से हैं| संस्कृत ...
मैं भूल जाता हूँ | एक कविता बिहार से

मैं भूल जाता हूँ | एक कविता बिहार से

गढ़ दी गयी कविताएँ स्त्री के भूगोल पर, चर्चाएँ आँख, कमर वक्ष पर खूब की गयी| स्त्री का इतिहास भी अछूता नहीं रहा, देवी से लेकर दास तक की गाथा खूब लिखी गयी| मनोविज्ञान भी स्त्री का खूब समझा गया, त्याग, करु...
ढोलकिया

किनका दुःख तलाश रहा है ढोलकिया | एक कविता बिहार से

शाहंशाह आलम जी यूँ तो बिहार विधान परिषद् में नौकरी करते हैं, लेकिन कविताओं और कविताओं से समबन्धित हर क्रियाकलाप में रुचि रखते हैं| इनकी विभिन्न किताबों पर दी गयी टिपण्णी (समीक्षा) भी काफी पसंद की जाती है| अक्सर...
बापू

जे भूल गइल बापू के उनका खातिर घुप्प अन्हरिया बा | एक कविता बिहार से

2 अक्टूबर है आज, भारत का एक और राष्ट्रीय पर्व, जो मनाया जाता है बापू के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में| आज देश के दूसरे तथा सफलतम प्रधानमंत्रियों में से एक श्री लाल बहादूर शास्त्री जी का भी जन्मदिवस है| पटनाबीट्स इन ...

मनवा में बसल ई बिहार कहाँ जाई | एक कविता बिहार से

महीने की आख़िरी कविता तक का सफ़र तय कर चुके हैं हम और नियम के अनुसार आज की कविता नेहा नूपुर की तरफ से होगी| पटनाबीट्स के एक कविता बिहार से में इनकी पुस्तक ‘जीवन के नूपुर’ से एक भोजपुरी कविता आज आपके सामने प्रस्तु...
बावला मन

उड़ने दो उसे पंख फैला के | एक कविता बिहार से

अभिषेक पाण्डेय, पेशे से इंजीनियर हैं| पटना के मूल निवासी हैं और फ़िलहाल नौकरी के सिलसिले में कलकत्ता में हैं| इनका युवा मन अक्सर तन्हाई में अपने आप से बातें करता है और जब बातें पन्ने पर उतरने को आतुर हो जाती ह...
मुझे मेरी यादों ने सींचा है

मुझे मेरी यादों ने सींचा है | एक कविता बिहार से

राजू महतो जी दिल्ली में एक मोशन ग्राफ़िक डिज़ाइनर हैं| बिहार के नवादा में घर है और घर से दूर रहते हुए अक्सर घर और आस-पास के माहौल को याद करते हैं| छोटी-छोटी बातें जब दिल को छूने लगती हैं तो इंसान कलमकार हो ही जात...