शुद्ध भावनाओं के साथ प्रार्थना, शांति, अहिंसा, और सद्भाव का प्रतीक है बुद्ध पूर्णिमा

“अगर आप किसी के लिए दीपक जलाएंगे तो वो आपका भी रास्ता रोशन करेगा,” गौतम बुद्ध द्वारा कथित यह उपदेश आज भी प्रासंगिक है।
करुणा और अहिंसा की प्रतिमूर्ति, जिन्होंने अपनी शिक्षा व उपदेशों से पूरे विश्व को शांति का संदेश देकर मनुष्य के कल्याण का मार्ग दिखाया, आज उनका जन्मदिन, बुद्ध पूर्णिमा है। हर साल वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन बुद्ध जयंती या बुद्ध पूर्णिमा मनाया जाता है।
इस साल बुद्ध पूर्णिमा के दिन साल के पहले चंद्र ग्रहण को भी देखा जा सकता है। और आज चंद्रमा लाल रंग का दिखेगा, जिसे ‘ब्लड मून’ या ‘सुपर मून’ भी कहा जाता है।


बुद्ध जयंती हिंदू और बौद्ध धर्म, दोनों के लिए एक विशेष दिन है। इस दिन लोग एक आध्यात्मिक खोज को अपनाने के लिए गौतम बुद्ध का स्मरण करते है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन हर साल बोधगया में बहुत ही विशाल वार्षिक आयोजन होता है। यहां लाखों की संख्या में तीर्थ यात्री आते हैं। लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इस बार वहां के कुछ भिक्षु ही पूजा में शामिल होंगे।


बौद्ध धर्म के लोग आमतौर पर इस दिन विहार (मठ) में जाते हैं। मांसाहारी भोजन का त्याग कर, और अनुयायी सफेद वस्त्र धारण कर वह वहां पूजा अर्चना करते हैं। प्रसाद के रुप में लोकप्रिय भारतीय व्यंजन ‘खीर’ का सेवन और वितरण किया जाता है, क्योंकि पौराणिक कथा के अनुसार, सुजाता नाम की एक महिला ने गौतम बुद्ध को दूध का कटोरा दिया था।


बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक संस्थापक गौतम बुद्ध का जन्म 3,000 साल पहले कपिलवस्तु में हुआ था। उनके जन्म से पहले एक भविष्यवाणी के अनुसार सिद्धार्थ या तो एक महान शासक होते या एक महान साधु। सिद्धार्थ कहीं साधु न बन जाए, इस डर से उनके पिता ने उन्हें 29 साल तक सांसारिक और सामाजिक जीवन से वंचित रखा। जब सिद्धार्थ ने महल के बाहर कदम रखा तब उनका सामना सांसारिक दुख से हुआ। इसके बाद उन्हें यह एहसास हुआ कि जीवन दुखों से भरा है और यह सिर्फ एक अस्थायी चरण है। जीवन की सच्चाई से आकस्मिक होने के बाद राजसी जीवन का त्याग कर वे सत्य की खोज में निकल पड़े। सिद्धार्थ ने जब निर्वाण (ज्ञान) प्राप्त किया था, तब उन्हें गौतम बुद्ध की उपाधि मिली।


इस दिन को देशभर में बौद्ध धर्म का सार माना जाता है, और यह केवल दक्षिण पूर्व एशिया तक ही सीमित नहीं है। इस दिन को चीन, भारत, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, श्रीलंका, ताइवान, थाईलैंड और दक्षिण वियतनाम सहित कई देशों में सार्वजनिक अवकाश होता है। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) भी विभिन्न जातियों और संस्कृतियों को याद करके इस त्योहार को मनाते हैं।

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