बिहार के लिए।


Article by –Nitin Neera Chandra

दोस्तों, आज एक बार फिर बिहार में सरकार बनेगी । मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, ये मंत्री, वो मंत्री इत्यादि बनेंगे । लेकिन ये याद रहे की “बिहार” से बड़ा कोई नहीं, ना कोई एक व्यक्ति ना १५ करोड़ ना १३० करोड़ । पार्टियां आएँगी, जाएंगी, मुख्यमंत्री आएंगे जाएंगे, फलां मंत्री और फलां विधायक आएंगे और चले जाएंगे । लेकिन रह जाएगा तो वो है “बिहार” और “बिहारी” पहचान । हम सबने हर पांच साल पर ये तमाशा देखा है और आगे भी देखेंगे । नरेंदर मोदी, नितीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, राम विलास पासवान, जीतन राम मांझी पर बहस, ये गठबंधन, वो महागठबंधन, ये वोट बैंक, ये मुस्लिम – यादव वो कुर्मी – लाला – ब्राह्मण इत्यादि, इत्यादि, सब चले जाएंगे एक दिन लेकिन रह जाएगा तो वो है “बिहार” और “बिहारी” पहचान । हमने सरकारों को कोसा, सरकार में बैठे लोगों ने ये किया, वो किया, ये नहीं किया और वो ऐसे नहीं, वैसे किया ।

लेकिन ।

बात है की हमने क्या किया ? अब सवाल अपने आपसे पूछने का समय है । बिहार बदलेगा तो देश बदलेगा, हर राज्य अच्छा करेगा तो देश अच्छा करेगा और बिहार की जिम्मेदारी कोई केरल, कोई तमिल नाड, कोई राजस्थान से आकर नहीं उठाएगा कोई अमरिकी, कोई चीनी नहीं उठाएगा । सरकार कोई भी हो, सवाल वही है की हमने क्या किया या हम क्या करेंगे बिहार के लिए ? आज हम २०१५ में खड़े हैं । पिछले २५ सालों में जो बदलाव दुनिया में आया वो सौ सालों में नहीं आया था । अब सवाल ये है की इस बदलती दुनिया में हम अपने बिहार को कहाँ खड़ा पाते हैं या भविष्य में कहाँ खड़ा करना चाहते हैं ।

हम कौन सी बिहारी पहचान आने वाले पीढ़ी को देना चाहते हैं । वो “बिहारी” पहचान जिसे कोई २० साल की हमारी बहन बेटियां दिल्ली, पूना, बंगलौर में छुपा रही हों, या वो “बिहारी” पहचान जिस पर कोई १९ साल का हमारा भाई बेटा फब्तियां सुन रहा हो या वो “बिहारी” पहचान जिस पर हमारे आने वाले पीढ़ी के बच्चे सर उठाकर देश की सड़कों पर चलें तो उनके मन में इस बात को लेकर कोई आतंक ना हो कोई झेप ना हो की कोई बिहारी होने पर उसको कुछ बोल दे । हमें मिलकर हर उस चीज़ को ठीक करने का प्रण लेना होगा जो हम कर सकते हैं बिहार के लिए । कोई फैक्टरी खोल सकता है तो खोले, कोई मार्किट खोल के २० लोगों को काम दे सकता है तो करे । कोई बिहार की भाषाओं में साहित्य लिख सकता है तो लिखे । कोई संगीत, सिनेमा, नाटक करे बिहार की भाषाओं में तो वो करे । कोई बड़ा अधिकारी है तो केंद्र की सरकार से बड़ा फंड लाकर बिहार में निवेश करवाये । कोई अमरीका, कनाडा, सिंगापुर, गल्फ, लन्दन में रहता है और बिहार के लिए कुछ करना चाहता है तो करे । ये समय है । क्यूंकि अगला चुनाव २०२० में होगा और तब तक दुनिया और आगे निकल चुकी होगी और एक बार हम फिर राजनीति के बहस में पड़े होंगे । हम आने वाले बच्चों को विरासत में खंडहर होते कॉलेज की बिल्डिंग्स देना चाहते हैं, या बंद पड़ी फैक्टरीज देना चाहते हैं या सिनेमा के माध्यम से उनके सामने अश्लीलता परोसते रहना चाहते हैं या उन्हें भी पलायनवादी बनाना चाहते हैं ?

निर्णय आपका क्यूंकि बिहारी हैं आप ।

 

Let’s Redefine the Word Bihar, Together!

 

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