बचपन की याद दिलाएगा यह बेजोड़ छठ गीत

हर साल की भांति इस साल भी नितिन चंद्रा अपने यूट्यूब चैनल ‘बेजोड़’ पर एक छठ गीत लेकर आए हैं। पिछले तीन वर्षों से हर बार वह छठ के अवसर पर एक गीत रिलीज़ करते हैं और इस बार भी उन्होंने अपने छठ गीत का चौथा संस्करण पेश किया है।

इस बार के छठ संस्करण में उन्होंने लोकप्रिय छठ गीत “कांच ही बांस के बहँगिया, बँहगी लचकत जाए” का एक अलग रूप दिखाने की कोशिश की है। हर वर्ष छठ पूजा के लिए जब हम घाटों पर डाला लेकर दौड़ लगाते हैं तब अनुराधा पौडवाल की सुरीली आवाज़ में यह गीत हमारे कानों में शहद घोल देता है। मगर इसी गीत को नितिन चंद्रा छोटे बच्चों की आवाज़ में लेकर आए हैं और ऐसा करने का एक कारण भी है। हम हर छठ गीत के वीडियो और गानों में छठव्रतियों और डाला उठाने वालों को देखते हैं। इन सब के बीच घर के बच्चे क्या कर रहे होते हैं इसपर काफ़ी कम काम हुआ और ज्यादा नहीं दिखाया जाता है। यही अधूरा काम करने का जिम्मा उठाया है इस बार नितिन चंद्रा ने और उनकी हालिया वीडियो छठ के दौरान बच्चों की गतिविधियों पर ही आधारित है।

Haven’t booked your ticket to home yet? This video of Chhath will make you change your mind

हम सबको याद होगा कि जब हमलोग छोटे थे और घर में छठ होता था तो हमलोग किस उत्साह और उमंग से बढ़ चढ़कर इसमें हिस्सा लेते थे और चाहते थे कि बड़ों की तरह हमें भी डाला उठाने और अन्य कामों को करने का जिम्मा सौंपा जाए। फिर हम बड़े हो गए और हममें से ज्यादातर को पढ़ाई या नौकरी की वजह से घर से दूर होना पड़ा। भले ही हम बिहार से दूर हो गए मगर बिहार कभी हमसे दूर नहीं हो पाया। चाहे साल भर घर जाने का मौका लगे ना लगे लेकिन छठ पर घर जाना जैसे रिवाज सा बन गया। ऐसे में यह हालिया वीडियो हमें उसी बचपन वाले छठ की याद दिलाता है जब हम सारा घर सिर पर उठाए रहते थे।

नितिन चंद्रा की यह पहल काफ़ी सराहनीय है और इस गीत में आवाज़ दी है अराध्या, फैज़ान, अवनी, पोरोनिशा, उत्कर्ष, अरोणिमा, इंदिरा, शिवानी, दिव्या और प्रीति ने। पटनाबीट्स की तरफ से आप सभी को छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। आप यह वीडियो यहाँ देख सकते हैं:

 

Do let us know your Chhath story in the comment box. Feel free to contact the author at [email protected]

Do you have an interesting story to share? Please write to us at [email protected]

Quote of the day: “Tradition is not the worship of ashes, but the preservation of fire.” 
― Gustav Mahler

Don’t Want to miss anything from us

Get Weekly updates on the latest Beats from
Bihar right in your mail.

BEAT BY

Mayank Jha

Mayank Jha is a 20 something years old content writer and an English major. A writer by day and reader by night, he is loathe to discuss about himself but can be persuaded to do so from time to time.