जब भी जाता हूँ गाँव | एक कविता बिहार से

 इनका नाम मुकेश कुमार सिन्हा है । इनका जन्म 4 सितम्बर 1971बेगुसराय बिहार में हुआ है। वर्तमान में सम्प्रति केंद्रीय राज्य मंत्री भारत सरकार के प्रथम व्यक्तिगत सहायक है। इनकी एक कविता संग्रह “हमिंग बर्ड” आ चुकी है। अभी हाल में ही “लाल फ्रॉक वाली” नाम से एक लप्रेक किताब लिखी है। ये कवि मूलतः अनुभव […]

पटना पुस्‍तक मेले में कल हुई बिहार के तीन पत्रकारों के पुस्‍तकों का लोकापर्ण

आज ज्ञान भवन में आयोजित हो रहे 24वें  सीआरडी पटना पुस्‍तक मेले के आखिरी रविवार को बिहार के तीन पत्रकारों की किताबें एक ही मंच से लोकार्पित की गई। आज लोकापिर्त की गई किताबों में वरीय पत्रकार अवधेश प्रीत की अशोकराज पथ , विकास कुमार झा की गयासुर संधान और युवा पत्रकार पुष्‍य मित्र की […]

इस बेस्ट सेलिंग लेखक ने की पटना पुस्तक मेला में शिरक़त

ज्ञान भवन में चल रहे 24वें पटना पुस्तक मेला के तीसरे दिन बेस्ट सेलिंग नॉवेल ‘विद यू विद आउट यू‘ के लेखक प्रभात रंजन परिचर्चा के दौरान पाठकों से रूबरू हुए। किताब को मिल रही बेहतरीन प्रतिक्रिया से उत्साहित प्रभात रंजन ने कस्तूरबा मंच से किताब से जुड़े अपने अनुभव दर्शकों से साझा किए। ज्ञात […]

जानिए क्या है खास इस साल के पटना पुस्तक मेला में

पटना में 32 वर्षों से लगने वाले पुस्तक मेला का इस बार 24 वां आयोजन है। भारत में लगने वाले कई बड़े पुस्तक मेलों में से एक है ये पुस्तक मेला। इस बार का पुस्तक मेला गत वर्षों से काफी भिन्न नजर आएगा। जिसके कई कारण और पहलू है। इस बार का पुस्तक मेला एक […]

सुकून की तलाश | एक कविता बिहार से

शाम्भवी सिंह का जन्म बिहार के पटना जिले में हुआ है । मूलतः ये नवादा जिले की है लेकिन उनकी प्रारंभिक पढ़ाई लिखाई देवघर में हुई। इन्होंने एनएसएचएम कोलकाता से पत्रकारिता में बीए किया । तत्पश्चात महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से पत्रकारिता में एम.ए की। इन्होंने एनडीटीवी पटना से अपना कैरियर शुरू किया । […]

ये छठ जरूरी है | एक कविता बिहार से

कुमार रजत दैनिक जागरण पटना में डिप्टी चीफ सब एडिटर हैं। पत्रकार होने के साथ खूब कविताएं भी लिखते हैं। अपनी पत्रकारिता में ये पटना शहर के जड़ को ढूंढते रहते हैं। मसलन “हर घर कुछ कहता है” और इसी तरह कई रचनात्मक कार्य पत्रकारिता में कर रहे हैं। मूल रूप से डुमरांव के हैं, […]

इशारों इशारों में दिल लेने वाले | एक कविता बिहार से

शम्शुल हुदा बिहारी (जन्म: 1922, आरा ज़िला, बिहार; मृत्यु: 25 फ़रवरी, 1987) हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार थे।1960 के दशक में संगीतकार ओ.पी. नैयर के साथ जुड़कर इन्होंने ‘रातों को चोरी-चोरी बोले मोरा कंगना’, ‘आज कोई प्यार से दिल की बातें कह गया/ मैं तो आगे बढ़ गई, पीछे जमाना रह गया’, ‘मेरी जान तुम पे सदके एहसान इतना कर दो‘ जैसे […]

‘यू नो आई हेट बिहारी पीपल’ क्या करें ऐसी सोच वाले ‘वेल एजुकेटेड’ लोगों का?

मैं डिपार्टमेंट से गुज़र रहा था कि चलते-चलते हल्की सी आवाज़ कान मे पड़ी, दो लोगों आपस में बात कर रहे थे। उनमें से एक ने किसी बात पर कहा, “यू नो आई हेट बिहारी पीपल…” उस वक़्त मेरी क्लास थी और मैं ज़ल्दी में था तो चला गया। बाद में वही व्यक्ति किसी जूनियर […]

दिनकर है जीवित स्मृति, पर प्रेरणा लेता कौन है । एक कविता बिहार से

डीआईजी विकास वैभव 2003 बैच के बिहार कैडर से IPS अफसर हैं। वे आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग में ग्रैजुएट हैं। एनआईए में रहते हुए IPS विकास वैभव कई आतंकी वारदातों की गुत्थियां सुलझा चुके हैं।भागलपुर रेंज के डीआईजी के पद पर तैनात  विकास वैभव इसके पहले पटना में एसएसपी और उससे पहले नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) में […]

चमत्कार है इस माटी में इस माटी का तिलक लगाओ | एक कविता बिहार से

बाबा नागार्जुन हिन्दी और मैथिली के अप्रतिम लेखक और कवि थे। उनका असली नाम वैद्यनाथ मिश्र था परंतु हिन्दी साहित्य में उन्होंने नागार्जुन तथा मैथिली में यात्री उपनाम से रचनाएँ कीं। बाबा नागार्जुन बचपन से ही घुमक्कड़ प्रवृति के कारण “यात्री” हो गए। बाबा नागार्जुन के काव्य में अब तक की पूरी भारतीय काव्य-परंपरा ही […]