CHOWTAL: The lost tune once sang to herald Holi deserves a revival

” पपीहा बन बैन सुनावे नींद नहीं आवे।।  आधीरात भई जब सखिया कामबिरह संतावे।।  पियबिन चैन मनहि नहीं आवत,  सखि जोबन जोर जानवे ।।१।।  फागुन मस्त महीना सजनी पियबिन मोहिं न भावे । पवन झकोरत लुह जनु लागत, गोरी बैठी तहां पछितावे ।।२।।  सब सखि मिलकर फाग रचत है। ढोल मृदंग बजावे।। हाथ अबीर कनक […]