सफ़र फ्रांस से जापान, बौआ देवी से मिली मधुबनी को पहचान

बिहार मतलब एक ऐसा राज्य जो की अपनी कला और शिल्प से समृद्ध है, जो इस तथ्य से काफी स्पष्ट है कि यह भारत के कई सारे पहले चित्रों का घर है। जिसमें प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग का नाम सबसे पहले आता है।  बिहार के जितवापुर गाँव में जन्म हुईं बौआ देवी ने एक उम्र-पुरानी परंपरा […]

हर बार से कैसे अलग है इस बार के कोरोना काल में नए साल का आगमन?

  बिहार में इलेक्शन का टेंशन और कोरोना की बातें, दोनों ही कर – कर के लोग भी आज की तारीख़ में थक चुके हैं, नया साल आ रहा है तो थोड़ी अच्छी बातें कर लेते हैं। अब चाहे कोरोना वैक्सीन हो या किसान बिल पर फैसला, सारी उम्मीदें आने वाले नए साल से ही जुड़ी […]

बिंदेश्वरी प्रसाद सिन्हा, जिन्होंने अपनी लेखनी से दी बिहार को नई पहचान।

बिहार के लेखकों के बारे में जब भी चर्चा होती है तो हमें सिर्फ कुछ गिने चुने नाम ही याद आते हैं, जैसे – आचार्य शिवपूजन सहाय, दिवाकर प्रसाद विद्यार्थी, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, राम बक्षी बेनीपुरी, फणीश्वर नाथ ‘ रेणु’, गोपाल सिंह “नेपाली”, रमेश चंद्र और भी बहुत सारे है, सब के नाम गिनने बैठे […]

लोकतंत्र का चौथा स्तंभ, बिहार में कब हुआ आरंभ?

आज हम बिहार के मीडिया की बात करेंगे। हां ये बात और है कि मीडिया का नाम सुनते ही सुशांत सिंह राजपूत, ड्रग्स, कंगना और दिलजीत दोसांझ के ट्वीट फाइट ज़रूर याद आएंगे।  इन सब चीज़ों के बारे में तो आए दिन हम सब सुनते हि रहते हैं पर अब कुछ ऐसी चीज़ों पे नज़र डालते हैं जो जरूरी तो है लेकिन कुछ ही लोग इसे जानने कि चाह रखते हैं। बिहार में […]

सूर साम्राज्य की ताकत – ए – पहचान, अपना सासाराम

सूर साम्राज्य की स्थापना एक अफगान राजवंश द्वारा की गई थी जिसने लगभग 16 वर्षों तक भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी भाग में एक बड़े क्षेत्र पर शासन किया था, 1540 से 1556 के बीच, सासाराम के साथ, आधुनिक बिहार में, इसकी सेवा के रूप में  राजधानी। जब बाबर ने इब्राहिम लोधी को पराजित किया और भारत के […]