50,000 महिलाओं को अब तक आत्मनिर्भर बना चुकी हैं आरा की अनीता गुप्ता

साल 1993 में अनीता गुप्ता द्वारा दो लड़कियों के साथ शुरू किया गया भोजपुर महिला कला केंद्र, आज 50000 महिलाओं को निःशुल्क ट्रेनिंग देती है।

भोजपुर महिला कला केंद्र, अनीता द्वारा चलाया जा रहा सामाजिक संगठन है , जिसके तहत लगभग 500 समूह है जो महिलाओं को रोज़गार देती हैं, जिसके तहत वे टोकरी बुनाई ,सिलाई, कढ़ाई और ज्वेलरी बनाना सीखती हैं।

अनीता बताती हैं “उस समय सिलाई सिखाने का केवल ₹25 प्रति माह लेते थे, धीरे-धीरे महिलाओं की भीड़ आने लगी | भोजपुर और आसपास के इलाकों से लड़कियां ट्रेनिंग के लिए आने लगीं। “

बिहार के आरा जिला में एक सुखी संपन्न जमींदार परिवार में जन्मी 45 वर्षीय अनीता गुप्ता की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं।

सात भाई बहनों के बीच पली-बढ़ी अनीता गुप्ता बताती हैं “परिवार में धन वैभव की कोई कमी नहीं थी लेकिन बहुत ही छोटी सी उम्र में पिता का देहांत की वजह से बचपन कठिन रहा।”

अनीता का ननिहाल भी काफी समृद्ध था तो पैसों की कमी होने पर उनके नाना उनकी मां की  मदद कर देते थे। अनीता बताती हैं “6 बहन और एक भाई की मूलभूत जरूरतें भी बहुत मुश्किल से पूरी हो पाती थी इसलिए पढ़ाई लिखाई की कल्पना भी नहीं कि जा सकती थी। ”

अपने खुद के घर में औरतों के साथ होते अन्याय को देख अनीता ने यह निश्चय कर लिया था कि वे खुद भी पढ़ेंगी – लिखेंगी और अपने भाई बहनों को भी पढ़ा कर आत्मनिर्भर बनाएगी।

ग्रेजुएशन में डिस्टेंस मोड में एडमिशन करा अपनी पढ़ाई के साथ उन्होंने अपने हाथ के हुनर को भी निखारा। अनीता कहती हैं “सिलाई कढ़ाई का शौक उन्हें बचपन से था और वह सिलाई ,कढ़ाई, बुनाई, जूट का काम, ज्वेलरी मेकिंग जैसे हुनर आस पड़ोस में देखकर सीख गई। “

जब अनीता ने अपने आस-पड़ोस की महिलाओं और लड़कियों को सिलाई कढ़ाई सिखाना शुरू किया तो परिवार वालों की तरफ से काम  बंद करने के निर्देश मिलने लगे। अनीता बताती हैं “पारिवारिक विरोध के उस कठिन समय में उनकी मां ने उनका साथ दिया।”

साल 2000 में अनीता गुप्ता ने अपने भोजपुर महिला कला केंद्र को एक सामाजिक संगठन के तौर पर रजिस्टर कराया।

भोजपुर महिला कला केंद्र (बीएमकेके) सरकार की नजरों में भी आया और जिलाधिकारी द्वारा बीएमकेके के एक प्रोजेक्ट के तहत ग्रामीण महिलाओं को जूट प्रोडक्ट बनाने के लिए ट्रेन करना था। अनीता ने बताया “उस प्रोजेक्ट के लिए हमें ₹20000 दिए गए। इसके बाद सरकार की तरफ से बहुत सारे प्रोजेक्ट मिले। “

अनीता ने मुसहर जाति की औरतों को न सिर्फ हुनर सिखाया बल्कि उनके हाथों में कलम पकड़ने की ताकत भी दी| अनीता बताती है “अनपढ़ महिलाएं जब बैंकों में खाता खुलवाने जाती थी या किसी भी तरीके का सरकारी लाभ लेने जाती तो बैंक कर्मचारी उन्हें दुत्कार कर भगा देते थे। वहां की महिलाओं को बैंक का फॉर्म भरना सिखाया तथा सभी महिलाओं को कलम देकर बैंक भेजा अपना फॉर्म खुद भरने के लिए। “

भोजपुर महिला कला केंद्र सिर्फ सिलाई ,कढ़ाई, बुनाई ही नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र में भी महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। अनीता बताती हैं वह महिलाओं को मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग दे रही हैं। भोजपुर महिला कला केंद्र कोरोना के इस भयानक दौर में भी महिलाओं की और जरूरतमंद लोगों की मदद भी कर रहा है। पिछले साल अनीता गुप्ता और उनकी टीम ने जरूरतमंद लोगों को ग्यारह सौ रुपए दवाइयों के लिए मुहैया कराया था।

“ऐसी महिलाएं जो लोगों के घरों में बर्तन चौका करती थी, कोरोना की वजह से नौकरी जाने पर उन्हें फ्री में सिलाई मशीन उपलब्ध कराई अब वे उस से प्रतिदिन 100 मास्क की सिलाई दिन भर में ₹400 तक कमा लेती हैं |” आज भोजपुर महिला कला केंद्र उषा कंपनी के साथ मिलकर उनके 3000 सिलाई स्कूलों में औरतों को ट्रेनिंग करवा रहा है।

अनीता बिहार की विलुप्त होती कलाओं को फिर से जीवन प्रदान कर रही हैं , जैसे कि सुजनी बनाने की कला | अनीता बताती है “फ्री ट्रेनिंग कैंप के दौरान एक गांव की महिलाओं को सुजनी जिसे लेवा भी कहा जाता है बनाते हुए देखा,  उन महिलाओं के साथ एक ट्रेनिंग प्रोग्राम किया, अब सुजनी कला का प्रयोग तकिया के कवर, ब्लैंकेट तथा मैट बनाने में किया जा रहा है |”

भोजपुर महिला कला केंद्र अभी तक 6000 महिलाओं को आर्टीजन कार्ड दिलवाया है जिसकी मदद से वे महिलाएं सरकारी स्कीम के तहत अपने खुद के रोजगार को खड़ा करने के लिए ₹40000 तक बैंकों से ले सकती हैं| अनीता कहती हैं “पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ हुनर या स्किल पर भी फोकस करना चाहिए क्योंकि आज के समय में जब पढ़ाई और नौकरी में प्रतियोगिता बढ़ गई है और अवसर कम हो गए हैं ऐसे में यदि व्यक्ति के पास कोई हुनर हो तो वह कभी भूखा नहीं रहता।”

अनीता ने कभी नहीं सोचा था की परिवार को और अन्य महिलाओं को इतना सम्मान मिलेगा, उनकी फोटो अखबार में आएगी और उन्हें अवार्ड मिलेंगे | अब तक बीएमकेके के द्वारा 2546 महिलाओं को सशक्त बनाने का कार्य संभव हुआ है |

मिनिस्ट्री ऑफ़ माइक्रो, स्माल एंड मध्यम इंटरप्राइजेज ने “ब्रांड ऑफ इंडिया अवार्ड” से नवाज़ा है। महिला और बाल विकास, बिहार सरकार ने महिला सशक्तीकरण के लिए जनवरी 2020 मे “जीजाबाई” पुरस्कार दिया।

आर्टिफिशियल ज्वेलरी में “स्टेट अवार्ड” , झारखंड की राजधानी रांची में राष्ट्रीय लेवल ग्राम श्री मेला में महिला उद्यमी के लिए कपार्ट से प्रथम पुरस्कार, बिहार के पटना में शक्ति शक्ति मेला में बेस्ट स्टॉल के लिए महिला विकास निगम पटना से प्रथम पुरस्कार एवं इन्फोसिस फाउंडेशन की संस्थापक श्रीमती सुधा मूर्ति और पद्मश्री व “योर स्टोरी” द्वारा स्टार्टअप्स और एंटरप्रेन्योर के लिए भारत के प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म पर “वीमेन ऑन ए मिशन” पुरस्कार मिल चुका है।

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