साल की शुरुआत, कोरोना काल में स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान खुलने के साथ।

रविवार यानी सभी के लिए छुट्टी का दिन। पूरे सप्ताह में सभी को रविवार का इंतजार बेसब्री से होता है, क्योंकि पूरे सप्ताह पढ़ कर और काम कर सब थक जाते हैं। लेकिन कोरोना वायरस के कारण इस साल सभी को इतनी लंबी छुट्टी मिल गई कि हर दिन ही रविवार हो गया। लेकिन अब इस लंबी छुट्टी का अंत सामने आ गया है। नए साल शुरू होने के साथ ही स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान खोले जाने की तैयारी की जा रही है।

इस साल 15 मार्च से ही सभी शिक्षण संस्थान बंद हो चुके थे जिसे अब खोलने की तैयारी की जा रही है। नए साल के शुरुआत के साथ यानी 4 जनवरी से स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान को खोला जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग ने गाइडलाइंस जारी कर दिया है जिसका सभी को पालन करना होगा। अभी केवल 9वीं से 12वीं कक्षा तक के स्कूल खोले जाएंगे, बाकी कक्षाओं को खोलने का निर्णय 18 जनवरी के बाद लिया जाएगा।

अपने पूरे दोस्तों के साथ मिलना अभी बच्चों के लिए संभव नहीं होगा क्योंकि नए गाइडलाइंस के अनुसार 4 जनवरी से शिक्षण संस्थानों में 50 प्रतिशत ही बच्चे एक कक्षा में उपस्थित हो सकेंगे। 50 प्रतिशत बच्चे एक दिन और 50 प्रतिशत बच्चे दूसरे दिन आएंगे। साथ में बैठ कर गपशप करना नहीं हो पाएगा क्योंकि गाइडलाइंस में यह भी शामिल है कि बच्चों को छह फीट की दूरी बना कर बैठना होगा और इस कारण कम संख्या में ही बच्चे एक क्लास में बैठ सकेंगे। अगर कक्षा छोटी हो तो लाइब्रेरी, कंप्यूटर रूम और प्रयोगशाला का उपयोग किया सकता है और अगर बच्चों की संख्या किसी वर्ग में ज्यादा हो तो दो पालियों में क्लास लेना होगा। बच्चे ही नहीं शिक्षकों को भी कार्यालय और स्टाफ रूम में छह फीट की दूरी बनानी होगी।

दूरी बनाने के कारण शैक्षणिक संस्थानों में ऐसे आयोजन नहीं हो सकेंगे जहां बहुत ज्यादा भीड़ इकट्ठा होने की संभावना हो। इसके अलावा स्कूलों में असेम्बली एक जगह ही सारे बच्चे नहीं कर पाएंगे। इसके लिए विद्यार्थियों को अपनी कक्षा में ही असेम्बली कक्षा करनी होगी।सेनेटाइजेशन का ध्यान स्कूल,और कॉलेज खोलने के लिए पूरा रखना होगा। स्कूल बस को दो बार सेनेटाइज करना, हर कक्षा में हांथ धोने के लिए साबुन या सेनेटाइजर होना चाहिए। स्कूल में प्रवेश करने से पहले और छुट्टी होने के बाद भी बस में प्रवेश करने से पहले थर्मल स्क्रीनिंग करना होगा। कैंपस के आस पास साफ सफाई की पूरी व्यवस्था का ध्यान शिक्षण संस्थाओं को रखना होगा।

मिथिला पेंटिंग वाले मास्क जो कि कोरोना काल में लोगों को बहुत पसंद आया था, उसे जीविका दीदी परियोजना के तहत बनाया गया था। महामारी के दौरान जीविका दीदी ने लाखों मास्क बनाए थे। सरकारी स्कूलों के खुलने पर दो मास्क हर बच्चे को जीविका दीदी द्वारा दिया जाएगा।

गवर्मेंट ने तो शिक्षण संस्थान खोलने की पूरी तैयारी कर ली है, लेकिन गाइडलाइंस को देखने के बाद अब पैरेंट्स को निर्णय लेना होगा कि क्या वो बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं या नहीं। जिन बच्चों की तबीयत खराब हो या वो नहीं जाना चाहते हो वो घर से ही ऑनलाइन क्लास जारी रख सकते हैं।

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