वाहवाही बटोरने वाले पटना चौराहों की मधुबनी पेंटिंग्स धूमिल होते जा रहे हैं

वाहवाही बटोरने वाले पटना चौराहों की मधुबनी पेंटिंग्स धूमिल होते जा रहे हैं

कहते हैं अगर इश्वर किसी पर मेहरबान होता है तभी वह किसी कला से किसी इंसान को नवाज़ता है। इसलिए हमारे देश में पौराणिक काल से हि कला और कलाकार का एक खास और बहुत अहम स्थान होता है। हम बिहारियों के लिए यह बहुत फक्र और खुशनसीबी की बात है कि यहां के लोग कई कलाओं में निपुणता हासिल किए हुए हैं। जैसे पठनकला, चित्रकला, इत्यादि। चित्रकला में बिहार के लोगों द्वारा की गई मधुबनी पेंटिंग विदेशों में भी अपनी भरपूर वाहवाही बटोर रही है। यह दुनिया भर के लोगों को अपनी खूबसूरती की ओर आकर्षित कर रही है।

साल 2018 में सरकार ने बिहार के पटना शहर को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने का संकल्प लिया था। और इसी संकल्प को मद्देनजर रखते हुए पटना के चौक- चौराहों की दीवारों को जो आम दिनों में “हकीम एम अली” इत्यादि वाक्यों से भरा होता है, उसे मधुबनी पेंटिंग से सजाने का फैसला किया गया। जिससे हमारा और आपका पटना खूबसूरत दिखे और उन जगहों को जहां हम अक्सर अपनी गलत गतिविधियों से कचरा फैलाया करते थे उन्हें साफ रखें। जब हम उन चौराहों पर चले तो बदबू की वजह से नाक ढ़कने के बजाय हम उन दीवारों को निहारें और उन खूबसूरत चित्रों का आनंद लें। जब दिन भर की थकान के बाद हम शाम को बाहर निकले और इन चौराहों पर टहले तब इन रंग- बिरंगी दीवारों को देखकर हमारी थकान 1 मिनट में छूमंतर हो जाए। इन सारे छोटे-छोटे सपनों को हकीकत में बदलने के लिए मिथिला की पारंपरिक चित्रकारी के हुनरमंद कलाकारों के साथ पटना आर्ट्स कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने मिलकर दिन-रात एक करके पटना के चौक चौराहों की दीवारों को मधुबनी पेंटिंग से सजा दिया। उन्होंने राजधानी के अलग-अलग इलाकों के दीवारों और प्रमुख स्थानों पर अपनी कला के रंग बिखेरे थे। हां, अब आप कह सकते हैं कि इन पेंटिंग्स को करने के लिए उन्हें बकायदा मेहनताना दिया गया था तो कौन सी बड़ी बात है। सरकार ने उन्हें बेशक मेहनताना दिया था लेकिन बस दीवारों को रंगने का उन दीवारों में अपनी कलाकारी से जान डालने का उन्हें कोई मेहनताना नहीं मिला था।

लेकिन महज सालभर बाद ही पटना की रंगत बदलने वाले ये पेंटिंग्स अपनी सुंदरता खोने लगे थे। और आज तो शायद इनके अस्तित्व पर भी सवाल उठेगा। जिन दीवारों या इमारतों पर मधुबनी पेंटिंग की गई थी, अब वहां कचरा फेंका जा रहा है। पेंटिंग्स पर ही पोस्टर चिपकाए जा रहे हैं। प्रशासनिक लापरवाही के कारण इनका रंगत फीका पड़ने लगा है। देख- रेख के अभाव में दीवारों के प्लास्टर झड़ने से कभी पटना की शान कही गई ये पेंटिंग्स अब बदरंग हो रही हैं। कुछ जगहों पर कूड़ा भी फेंका जा रहा है। लोग पेंटिंग पर विज्ञापन के पर्चे भी चिपका रहे हैं। कई जगहों पर अनचाहे जलजमाव की वजह से रंग उड़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को मधुबनी पेंटिंग बनवाने के साथ इसके रख-रखाव पर भी ध्यान देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वहीं प्रशासन यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लेती है कि हम कितना भी ख्याल रखें लेकिन जब तक लोगों के बीच जागरूकता नहीं आएगी तब तक हम कुछ नहीं कर सकते। एक आम नागरिक होने के नाते हमें यह भी सोचना चाहिए कि उन दीवारों पर कलाकृतियां उकेरने में जाने कितने कलाकारों की मेहनत लगी होगी। और उस मेहनत को हम अपनी नजर अंदाज की वजह से व्यर्थ कर रहे हैं। हम अपनी ज़रा सी सुविधा के लिए अपने शहर को गंदा कर रहे हैं, बर्बाद कर रहे हैं। जब पटना को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए यह आईडिया अपनाया गया था तो इसकी चर्चा पूरे देश में हुई थी। लेकिन आज हमारी और आपकी लापरवाही की वजह से सारी चित्र कलाएं बर्बाद हो रही है।

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