मशरूम महिला : नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित हुई, हजारों महिलाओं की बनी प्रेरणास्त्रोत

मशरूम महिला : नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित हुई, हजारों महिलाओं की बनी प्रेरणास्त्रोत

कहते है यदि एक स्त्री ठान ले, तो वह किसी भी सफलता को पा सकती हैं । इस कथन को सच कर दिखाया है, बिहार के मुंगेर जिला की रहने वाली बीना देवी ने । आज लोग इन्हें ‘मशरूम महिला’ के नाम से भी जानते हैं । घर की चार दीवारी से अपनी यात्रा शुरू कर आज बीना हज़ारो महिलाओं की प्रेरणा बन चुकी हैं ।

मुंगेर के धौरी गाँव में जब वह शादी के बाद आई, तब अन्य औरतों की तरह वह भी परिवार की देखभाल में लग गयी । लेकिन बीना के अंदर कुछ अलग करने की चाह थी । वह घर के कामो में सिमट के नहीं रहना चाहती थी । केवल एक अवसर का इंतेज़ार था । यह अवसर उन्हें मुंगेर के कृषि विज्ञान केंद्र के द्वारा मिला । कृषि विज्ञान केंद्र सरकार के द्वारा शुरू की गयी एक कृषि विस्तार योजना हैं । इसके तहत गाँव की महिलाओं को जैविक खेती की ट्रेनिंग दी जाती है ।

इसी ट्रेनिंग के दौरान बीना को मशरूम की खेती के बारे में पता चला । बीना कहती हैं, ” मुझे पहली बार ऐसी किसी सब्जी के बारे में पता चला । इसकी खेती करना भी बहुत मुश्किल नहीं था । ज्यादा लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी । तो मैंने मशरूम का उपज करने का फैसला लिया । यह बहुत ही आसान प्रक्रिया हैं । यह एक पौष्टिक आहार है और बाज़ार में भी अच्छे दामों में बिकता हैं ।”

बीना ने सबसे पहले मशरूम को अपने घर के अंदर ही उपजाया । उन्होंने अपने पलंग के नीचे इसकी खेती शुरू की । कृषि विज्ञान की मदद से बीना इस कार्य में कामयाब हुई । धीरे-धीरे वह बाज़ार में इसकी बिक्री करने लगी । परंतु वह यहाँ रुकी नहीं । उन्होंने गाँव की महिलाओं को इसकी जानकारी दी । आज बीना दस हज़ार से भी अधिक महिलाओं को इसकी ट्रेनिंग दे रहीं हैं । साथ ही लोगों को जैविक खेती करने के लिए भी जागरूक कर रहीं हैं । उन्होंने अपने आस-पास के लगभग 105 गाँव को मशरूम की खेती की जानकारी दी हैं ।

43 वर्ष की बीना को उनके कार्य के लिए 2020 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया । उस पल को वह अपने जीवन की बहुत बड़ी सफलता के रूप में याद करती हैं। बीना अपने गाँव में सरपंच भी रहीं हैं । इसके अलावा वह गाँव की महिलाओं को डिजिटल कार्य की भी शिक्षा देती हैं । इसके लिए उन्हें टाटा ट्रस्ट द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। आज बीना अपने 18 सदस्य के परिवार को अकेले संभाल रहीं हैं ।

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