बिहार की सर्दी

बिहार में सर्दी कि हवा कभी नरम, कभी गर्म, कभी बढ़ता तो कभी घटता!

बिहार की सर्दी

ठंड के मौसम ने बिहार में दी दस्तक। नवंबर से बिहार में ठंड शुरू हो गई और मार्च तक बिहारवासी इस मौसम का मज़ा लेंगे। सर्दी के मौसम में जो सबसे आम चीज़ बिहार में देखने को मिलती है वो है अंगीठी के आस पास लगा लोगों का गुट। बिहार की सर्दी में गरम चाए मिल जाए तो ठंड का मज़ा और भी बढ़ जाता है और इसका भी मज़ा लेते हुए लोगों का गुट चाए की दुकानों में देखना आम है। बिहार की रातें ठण्ड में दिन से ज्यादा सर्द होती हैं। सबसे ज्यादा ठंड बिहार के गया जिले में पड़ती है, जहां कभी-कभी पाड़ा शून्य तक पहुंच जाता है।

ठंड के साथ ही बिहार में कई पर्वों की भी शुरुआत हो जाती है, बिहारवासियों को इसलिए ठंड का बहुत इंतज़ार रहता है। कहा जा सकता है कि बिहार में ठंड की शुरुआत छठ पूजा के साथ होती है। छठ पर्व बिहार का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। जब भी छठ पर्व का नाम लिया जाता है तो सभी को बिहार की सबसे पहले याद आती है क्योंकि बिहार में छठ पूजा सबसे ज्यादा धूम-धाम से मनाया जाता है। देश विदेश से लोग बिहार में इस पर्व को मनाने आते हैं।

इस मौसम में पहाड़ी इलाकों से मैदानी इलाकों में आने वाले पक्षियों का भी बिहार में स्वागत किया जाता है। इसे एक पर्व के रूप में मनाया जाता है जिसे सामा-चकेवा कहते हैं। इसकी शुरुआत सामा-चकेवा पक्षियों का स्वागत करके किया जाता है। यह पर्व भाई बहनों से जुड़ा होता है, जहां पक्षियों की मूर्तियों को बनाकर इन्हें सजाया जाता है और भव्य तरीके से इस पर्व को मनाकर अंत में सामा को बिदाई दी जाती है।

बिहार की सर्दी

कहा जाता है कि मकर संक्रान्ति पर्व के साथ ही बिहार वासियों को ठंड से थोड़ी राहत मिलनी शुरू हो जाती है, लेकिन कुछ वर्षों से ऐसा देखा जा रहा है कि इस पर्व के साथ ही ठंड भी तेजी से अपना असर दिखाती है। मकर संक्रन्ति में पतंग उड़ाने के साथ साथ लोग दही चूड़ा और तिलकुट खा कर इस पर्व को मनाते हैं।
ठंड की खरीदारी करने के लिए इस मौसम में सबसे ज्यादा भीड़ अगर देखने को मिलती है तो वो है लहसा बाजार। पटना में लगने वाला ल्हासा बाजार भी हर साल सज कर बिहारवासियों के लिए तैयार होता है। बिहार के अलग अलग हिस्सों से लोग ल्हासा बाजार में ठण्ड की खरीदारी करने आते है।

 

ये बजार लगभग 43 वर्षों से हर साल पटना के बुद्धा मार्ग में लगता आ रहा है। बिहार के लोगों को इस बाजार का काफी इंतज़ार होता है क्योंकि सर्दी से जुड़ी सारी चीज़ें उन्हें एक जगह ही मिल जाती है। इसके अलावा एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला कहा जाने वाला सोनपुर मेला भी ठंड में ही लगता है। पुरे एशिया के लोगों के लिए ये एक आकर्षण का केंद्र होता है।

इस मौसम का मज़ा बिहार के कुछ ख़ास स्वादिष्ट खाने और भी बढ़ा देते हैं। जैसे- चुरा मटर, चुरा दही और तिलकुट बिहार के ज़ाएकेदार खानों में से एक है, जो ज्यादातर इस मौसम में ही खाने को मिलते हैं। चुरा मटर तो बिहार के हर घर में बहुत ही आसान तरीकों से बनाया जाता है। ये सिंपल सी डिश बिहार के लोगों के मुंह में इसके नाम से ही पानी ले आती है। तिलकुट भी बिहार की प्रसिद्ध मिठाइयों में से एक है। मकर सक्रांति के दौरान ये बिहार के बाजारों में अलग अलग दुकानों पर लगे हुए दिखते हैं। गया और मगध दोनों ही जगह सबसे अच्छे तिलकुट के लिए जाना जाता है।

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Farhat Naz