बिहार के देवेश झा की बनाई ड्रोन अब करेगी दुनिया भर की सैर।

बिहार के देवेश झा की बनाई ड्रोन अब करेगी दुनिया भर की सैर

टेक्नोलॉजी का मुख्य उद्देश्य कम से कम रेसॉर्स इस्तेमाल करके अधिक से अधिक आउटपुट या रिजल्ट देना है, टेक्नोलॉजी ने हमे आज के समय चौतरफा घेरा है कैसे, आपके पास हो सकता है मोबाइल हो, घर में टेलीविजन, एयरकंडीशनर, कार कंप्यूटर आदि सब इसका एक नमूना है। 

टेक्नोलॉजी विज्ञान की देन है, वैज्ञानिकों द्वारा दिन प्रतिदिन  टेक्नोलॉजी की खोज की जा रही है, ओर इसका सीधा सा उद्देश्य हमारे लिये एक बेहतर कल बनाने का है।

 ठीक उसी प्रकार बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के वेंचरपार्क बिजनेस आइडिया कंपीटिशन में स्टार्टअप देवेश झा को प्रथम स्थान मिला है। 12 मार्च को ज्ञान भवन में आयोजित बिहार स्टार्टअप्स कांक्लेव में इन्हें सम्मानित किया जाएगा। एक नई सोच ने देवेश को देश के साथ ही दुनिया भर में मशहूर कर दिया है। इनके बनाए ड्रोन का इस्तेमाल करने के लिए हालैंड और सूरीनाम भी इच्छुक हैं।

किसानों के हित के लिए बनाया ड्रोन।

दिवेश झा जो कि सिर्फ 12वी क्लास के है, जो एक बड़े शहर से भी ताल्लुक नहीं करते वह मधुबनी के एक छोटे से खजौली ब्लॉक के कन्हौली गांव के रहने वाले हैं। जिन्होंने 2017 में फसल की समुचित देखरेख बीमारी का पता लगाने और कीटनाशक छिड़काव के लिए एक शानदार ड्रोन का निर्माण किया था। यह ड्रोन फसल की फोटोग्राफी कर ऑनलाइन मार्केटिंग की सुविधा किसान को  दी जा सके।

एंजल इन्वेस्टर्स का भी मिल चुका है खिताब।

2018 में भारत सरकार ने स्टार्टअप के रूप में इनका चयन किया जिसके बाद भारत कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के तरफ से इन्हें 5 लाख का ग्रांट मिला। इसके अलावा इन्हें एंजल इन्वेस्टर्स भी मिल चुका है, जो कि 3.5 करोड़ पर अलग से फंड कर रही है।

ड्रोन ऐसा जिसका दीवाना हुआ हॉलैंड और सूरीनाम।

बिहार सरकार के अलावा हरियाणा सरकार, छत्तीसगढ़ सरकार भी मेरे ड्रोन प्रोजेक्ट का लाभ ले रही है। अब हौलैंड और सूरीनाम से भी ड्रोन प्रोजेक्ट की मांग की गई है। ड्रोन के साथ एक साफ्टवेयर को जोड़ा गया है। इससे बीमारियों की सेंसर के जरिए सटीक जानकारी मिल रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी की तारिक।

22 फरवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी ड्राेन की कार्यशैली को देखा और शराबबंदी में भी इसके उपयोग को लेकर निर्णय लिया गया है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय तो पहले से ही इस ड्रोन का उपयोग कर रहा है।

आईसीएमआर की मदद से वैक्साइंस भी पहुंचाए गए।

इसका वजन 25 किलो है। यह 50 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है। यह फ्यूल के साथ ही बैटरी से भी चलता है। यह एक घ्ंटे में करीब चार लीटर फ्यूल की खपत करता है। देवेश कहते हैं कि कोरोना काल में आइसीएमआर के साथ मिलकर नार्थ इस्ट में इस ड्रोन से वैक्सीन भी डिलीवर की गई। यह बात जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंची तो उन्होंने ने भी इस प्रोजेक्ट की सराहना की।

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