बिहार के छोटे गांव से न्यूज एंकर तक का सफर : रवीश कुमार

बिहार के छोटे गांव से न्यूज एंकर तक का सफर : रवीश कुमार

लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पत्रकारिकता  जो आज नामशेष होने के अवस्था मे है और कभी भी दम तोड सकता है ।इस स्तंभ की रक्षा में आज भी कुछ पत्रकार जीजान से जुड़े हुए हैं, उनमें से एक हैं बिहार के रवीश कुमार।

∆ बिहार के चंपारण जिले से आते हैं रवीश कुमार।

रवीश कुमार का जन्म 5 दिसंबर 1974 को बिहार के पूर्वी चंपारन जिले के अरेराज के पास जितवारपुर गांव में हुआ था ।  उनके पिता का नाम श्री बलिराम पांडे है। उनके भाई, ब्रजेश कुमार पांडे, बिहार में एक सक्रिय राजनीतिज्ञ हैं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य हैं।

∆ इतिहास की पढ़ाई के लिए बिहार से दिल्ली का सफर।

उन्होंने अपनी हाई स्कूल की शिक्षा लोयोला हाई स्कूल, पटना से प्राप्त की । बाद में वे उच्च अध्ययन के लिए दिल्ली चले गए । दिल्ली के देशबंधु कॉलेज में इतिहास की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। हालांकि, उन्हें सिविल सेवा परीक्षा में सफलता नहीं मिली। आगे उन्होंने एमए की पढ़ाई के लिए दाखिला करवाया।

∆अंग्रेजी बोलने वाले लोगों से डरकर एक छोटी सी बस्ती में लिया था आश्रय।

जब रवीश कुमार दिल्ली आए, तो उन्हें सबसे ज्यादा डराने वाली एक बात अंग्रेजी बोलने वाले थे। वह अंग्रेजी बोलने वाले लोगों से इतना डर गया था कि उसने ‘अंग्रेजी बोलने वाले क्षेत्रों’ से दूर गोविंदपुरी की गलियों में एक बरसती किराए पर ले ली।बीए के अंत तक भी रवीश अंग्रेजी में अच्छे नहीं बन सके। 

∆ कैरियर की राहें

रवीश कुमार ने अपने करियर की शुरुआत साल 1996 में NDTV इंडिया से शुरू किया था और वह आज भी NDTV इंडिया से जुड़े हुए हैं। हालाँकि रवीश कुमार ने NDTV इंडिया में ही एक रिपोर्टर से एक वरिष्ठ कार्यकारी संपादक तक का सफ़र तय किया है। रवीश की रिपोर्ट, हम लोग और Prime Time को पूरे देश में काफी पसंद किया जाता है। रवीश कुमार ने साल 2010 में ‘देखते रहिये’ और साल 2015 में ‘इश्क में शहर होना’ नाम से पुस्तक भी लिखी है।

∆ रमन मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित।

० रवीश कुमार को साल 2010 में गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

० रवीश कुमार को साल 2013 में रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस अवार्ड से नवाजा गया था।

० रवीश कुमार को साल 2014 में सर्वश्रेष्ठ हिंदी समाचार एंकर चुना गया था।

० रवीश कुमार को साल 2016 में इंडियन एक्सप्रेस द्वारा 100 सबसे प्रभावशाली भारतीयों की सूची में शामिल किया था।

० रवीश कुमार को साल 2016 में मुंबई प्रेस क्लब द्वारा वर्ष का सर्वश्रेष्ठ पत्रकार चुना गया था।

० रवीश कुमार को साल 2019 में रेमन मैग्सेसे अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। रेमन मैग्सेसे अवार्ड को एशिया का नोबल पुरस्कार भी कहा जाता है।

∆ जाती बंधन से विमुख होकर किया विवाह।

रवीश कुमार ने नैना दास गुप्ता से प्रेम विवाह किया है। रवीश कुमार के माता-पिता दोनों की शादी के लिए राजी नहीं थे। दिल्ली विश्वविद्यालय में एम.फिल की पढ़ाई के दौरान, रवीश ने अपनी भावी पत्नी, नयना दासगुप्ता से मुलाकात की, जो इंद्रप्रस्थ कॉलेज में पढ़ रही थी।

रवीश और नयना ने करीब सात साल तक डेट किया। रवीश के पास कभी भी पर्याप्त पैसा नहीं था, इसलिए वे कॉफी हाउस जाते थे और लंबी सैर पर जाते थे।जब रवीश कुमार ने अपने माता-पिता से नयना से शादी करने की अपनी योजना के बारे में बताने के लिए संपर्क किया, तो उन्होंने शादी का कड़ा विरोध किया; जैसा कि रवीश एक भूमिहार ब्राह्मण है, एक उच्च जाति; जबकि नयना बंगाली समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। रवीश कुमार  ने जाति बंधन से विमुख होकर नयना से शादी कर ली।

∆ रवीश कुमार की लिखी पुस्तक।

० द फ्री वॉयस: ऑन डेमोक्रेसी, कल्चर एंड द नेशन 

० बोलना ही है : लोकतंत्र, संस्कृति और राष्ट्र के बारे में (हिंदी में)

० इश्क में शहर होना (हिंदी में)

० देखते रहिये (हिंदी में)

० रवीशपंती (हिंदी में) 

∆ रवीश कुमार से जुड़ी कुछ विवादित घटनाएं। 

1- जब उनके भाई बृजेश कुमार पांडेय पर 2017 में एक सेक्स रैकेट मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था, तो रवीश कुमार की उनके समाचार शो में घटना के बारे में रिपोर्ट नहीं करने के लिए आलोचना की गई थी।

2 – रवीश कुमार ने अर्नब गोस्वामी की आलोचना के लिए विवाद को भी आकर्षित किया।

3 – केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार की स्थापना के बाद, रविश कुमार ने अक्सर मौत की धमकी और फोन पर अपमानजनक शिकायतें की हैं।

4 – ट्विटर पर बार-बार ट्रोल किए जाने के बाद, उन्होंने अगस्त 2015 में ट्विटर छोड़ दिया।

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