पितृसत्तात्मक समाज से लड़कर पहली उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली लड़की बनी आरुषि

पितृसत्तात्मक समाज से लड़कर पहली उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली लड़की बनी आरुषि

“जहाँ सिर्फ़ लड़को को पढ़ने की इजाजत थी वहाँ मेरे माता-पिता ने मुझे घर से दूर पढ़ने भेजा । लोगों ने इसके बाद मेरे कपड़ो से लेकर मेरे कैरेक्टर तक पे सवाल उठाए । लेकिन मेरी कामयाबी ने सबको जवाब दे दिया ।“ यह कहना है 19 साल की आरुषि रंजन का जो पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहीं हैं । लेकिन यहाँ तक का सफर उनके लिए आसान नहीं था ।

बिहार के सीतामढ़ी में पैदा हुई आरुषि के जन्म से उनके रिश्तेदारों को कुछ खास खुशी नहीं हुई थी । पितृसत्तात्मक समाज में उनके जन्म की मिठाइयाँ खाने का मन किसी का भी नहीं था । दो साल की उम्र में उन्हें अपने परिवार के साथ गांव छोड़ना पड़ा । हालात इतने खराब हो गए थे कि उनके परिवार को पूरी रात रेल्वे स्टेशन पर गुज़ारना पड़ा । लेकिन कहते हैं ना कि हर रात का सवेरा होता है । धीरे-धीरे उनकी जिंदगी ट्रैक पे आई ।

आरुषि अपने परिवार के साथ सीतामढ़ी के डुमरा में शिफ्ट हो गयी । वहाँ से उन्होंने अपनी पढ़ाई शुरू की । आरुषि के पिता की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी लेकिन बेटी के जज़्बे ने उन्हें उसे बेहतरीन शिक्षा देने के लिए मजबूर कर दिया । बिना अपने बेटे और बेटी में फर्क किये, आरुषि के पिता ने उन्हें उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहर भेज दिया । रिश्तेदार और पड़ोसियों के लाख मना करने पर भी ना आरुषि हारी नाही उनके माता-पिता ।

आज आरुषि जर्नलिस्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रहीं हैं । वह अपने गांव की पहली लड़की हैं जिन्होंने सीबीएससी से पढ़ाई की और आज उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहीं हैं । वह अपने सफलता का पूरा श्रेय अपने माता- पिता को देती हैं । आरुषि का कहना हैं कि यदि 10 प्रतिशत पैरेंटस् भी उनके माता- पिता से सिखे और अपनी बेटियों को पढ़ाए तो यह समाज में एक बड़ा बदलाव ला सकती है । उनके गांव के कई परिवार उनके माता-पिता से प्रेरित होकर अपनी बेटियों को शिक्षित करने के लिए तैयार हैं ।

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