नेवी में पहली महिला पायलट बन कर रची इतिहास बिहार की शिवांगी सिंह

यूं तो महिलाएं दुनिया के हर क्षेत्र में ख़ुद को साबित कर रही हैं और अपनी क़ामयाबी के झंडे गाड़ रही हैं। लेकिन अभी भी बहुत सारे क्षेत्र ऐसे हैं, जिनसे उन्हें दूर रखा गया है। कल तक नेवी में किसी महिला का पायलट होना एक दूर की कौड़ी थी लेकिन अब यह झूठा साबित होता दिख रहा है, और इसे साबित किया है बिहार की बेटी शिवांगी ने जो देश की पहली महिला पायलट बनकर एक इतिहास रची है।

शुरुआती जीवन-

बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली शिवांगी सिंह भारतीय नौसेना में पायलट बनने वाली पहली महिला हैं। शिवांगी एक विनम्र कृषक पृष्ठभूमि से आती है इनका जन्म 15 मार्च 1995 को भारत के बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर जिले में हुआ। शिवांगी के पिता हरि भूषण सिंह स्कूल के शिक्षक हैं और उनकी माता प्रियंका सिंह गृहिणी हैं।

शिक्षा-

शिवांगी ने वर्ष 2010 में DAV पब्लिक स्कूल से CBSE 10वीं की परीक्षा पास की। साइंस स्ट्रीम से 12वीं करने के बाद शिवांगी सिक्किम मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी की डिग्री प्राप्त की । M.Tech. में दाखिला भी लिया। फिर SSB की परीक्षा के जरिए नेवी में सब लेफ्टिनेंट के रूप में चयनित हुईं। करीब डेढ़ साल की ट्रेनिंग के बाद उनका चयन नौसेना में पहली महिला पायलट के लिए किया गया।

भारतीय नौसेना में किया गया शामिल

शिवांगी को शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) पायलट प्रवेश योजना के तहत भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। जून 2018 छह महीने के दो पाठ्यक्रम किए, भारतीय नौसेना अकादमी में पहला नेवल ओरिएंटेशन कोर्स, और दूसरा वायु सेना अकादमी में जहां शिवांगी ने पिलाटस पीसी 7 एमकेआईआई (MKII) विमान पर प्रशिक्षण दिया।

भारतीय नौसेना की पहली महिला पायलट बनीं-

बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली शिवांगी स्वरूप भारतीय नौसेना में पायलट बनने वाली पहली महिला हैं। भारतीय नौसेना में वैसे तो 400 से अधिक महिला नौसैनिक व अधिकारी हैं, लेकिन सभी अलग- अलग प्रशासनिक, अकादमिक, संचार और शैक्षिक सेवाओं में हैं। शिवांगी नौसेना में शामिल होने के बाद पायलट बनने वाली पहली महिला हैं। दिसंबर 2019 से पहले के छह महीनों में, शिवांगी ने भारतीय नौसेना एयर स्क्वाड्रन 550 में डोर्नियर विमान उड़ाना सीखा लिया। शिवांगी 2 दिसंबर 2019 को भारतीय नौसेना की पहली महिला पायलट बनीं।

शिवांगी ने कभी सोचा नही था कि इतिहास बन जायेगा-

शिवांगी को बचपन के दिन से ही प्लेन उड़ाने की इच्छा थी। घर वालों से अक्सर कहती रहती थी की मुझे पायलट बनना है। लेकिन तब महिलाओं को प्लेन उड़ाने की इजाज़त नहीं थी।
दरअसल 4th ईयर में यूनिवर्सिटी एंट्री स्कीम के लिए नेवी आई थी, तो उनकी यूनिफार्म देखकर शिवांगी काफी आकर्षित हुई थी। और उसी समय से प्लेन उड़ाने का सपना बुनने लगी थी। जब उन्हें पता लगा कि बतौर पायलट नेवी की वूमेन एंट्री शुरू हुई है। तब शिवांगी का सपना सच होता दिखा। मौके की तलाश में शिवांगी नेवी में आ गईं थी। और यहीं से उन्हें पायलट बनने का भी मौका मिला। लेकिन शिवांगी ने कभी नही सोचा था कि उनकी यह संघर्ष की कहानी इतिहास बन जायेगी।

शिवांगी ने कभी सोचा नही था कि इतिहास बन जायेगा-

शिवांगी को बचपन के दिन से ही प्लेन उड़ाने की इच्छा थी। घर वालों से अक्सर कहती रहती थी की मुझे पायलट बनना है। लेकिन तब महिलाओं को प्लेन उड़ाने की इजाज़त नहीं थी।
दरअसल 4th ईयर में यूनिवर्सिटी एंट्री स्कीम के लिए नेवी आई थी, तो उनकी यूनिफार्म देखकर शिवांगी काफी आकर्षित हुई थी। और उसी समय से प्लेन उड़ाने का सपना बुनने लगी थी। जब उन्हें पता लगा कि बतौर पायलट नेवी की वूमेन एंट्री शुरू हुई है। तब शिवांगी का सपना सच होता दिखा। मौके की तलाश में शिवांगी नेवी में आ गईं थी। और यहीं से उन्हें पायलट बनने का भी मौका मिला। लेकिन शिवांगी ने कभी नही सोचा था कि उनकी यह संघर्ष की कहानी इतिहास बन जायेगी। आज शिवांगी बिहार की लड़कियों के लिए मिसाल हैं। महिलाओं को इनसे हिम्मत और प्रेरणा मिलती है।

Malda Aam

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