नारी शक्ति और कला की जरों को सींचता पोथी पत्री फाउंडेशन

Pothi patri foundation का काम महिलाओं के हाइजीन , प्राइमरी एजुकेशन ऑफ आर्ट को लेकर काम करना है, शहरों में भी आपको अपने आस-पास ऐसे कई घर देखने को मिल जाएंगे, जहां महिलाओं को पीरियड्स के दौरान पूजा करने और रसोई में जाने की अनुमति नहीं होती है। जिस सोच को आप सिर्फ रूढ़िवादी मान रहे हैं, वह दरअसल महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए शुरू की गई थी, जो बदलते-बदलते एक सामाजिक बुराई बन गई

पुराने जमाने से चलती आ रही माहवारी के कारण फैली भ्रांति , जो औरतों के शारीरिक और मानसिक पीड़ा का कारण है उनके बारे में बताना है, उनको जागरूक करना है, ये संस्थान महिलाओं में पीरियड्स हाइजीन को लेकर जागरुकता पैदा करने के लिए तत्पर है।पीरियड्स एक महिला के शरीर की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक है। इसलिए, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि महिलाएं अपने फर्स्ट पीरियड्स के विचार से घबरा जाती हैं। इसी बीच महिलाओं और लड़कियां हेल्दी और हाइजीन पीरियड्स की आवश्यकता पर ध्यान देना भूल जाती हैं। ऐसे में इस मेंस्टुअल हाइजीन अभियान  आपको पीरियड्स से जुड़े कुछ भ्रामक मिथक और फैक्ट के बारे में बताते हैं, जिसको हर महिला को जानना चाहिए।

2016 से पहले The Kedar House के बैनर तले ही करते थे, ये अपने कमाई का 20% social work को देती थी, लेकिन December 2021 में पोथी पत्री का गठन हुआ, जिसके अंतर्गत ये सब काम सुचारु रूप से चलता आ रहा है.

आचार ना छूने की भ्रमित मानसिकता का हनन करें।

कई महिलाएं पहले और अब भी पीरियड्स के दौरान कपड़े का उपयोग करती हैं, जो कि एक अनहेल्दी तरीका है। इससे आपके इंटीमेट एरिया और हाथों में सूक्ष्म जीवों का उत्पादन होता है, इसलिए अचार और रसोई की अन्य सामग्री को छूना इस दौरान अनहेल्दी माना जाता है। लेकिन अगर आप एक सैनिटरी पैड का उपयोग करती हैं, तो आपको करना ही चाहिए,तो आपको किचन में जाने और खाना पकाने से खुद को रोकने की कोई आवश्यकता नहीं है।

बिस्तर पे सोने में कोई दौराए नहीं।

पहले जब महिलाएं सैनिटरी पैड की जगह कपड़ा का इस्तेमाल करती थीं तो तो उन्हें लीकेज की समस्या के कारण बिस्तर पर सोने से मना किया जाता था। हालाकि, अब जब कई महिलाएं अपने मासिक धर्म के दौरान स्वच्छ और सुरक्षित तरीकों का उपयोग करती हैं, तो उन्हें बिस्तर पर न सोने जैसे चीजों के पालन करने की कोई जरूरत नहीं है।

हमारी आने वाली पीढ़ी इस विचारधारा से आगे बढ़े की , वो माहवारी के दौर में अशुद्ध, होती है , पूजा करना उनको नरक का रास्ता दिखा सकता है, या औरतों को ये समझाना की माहवारी का कपड़ा अगर पति के कपड़े से सट जाए तो उनकी आयु कम हो जाती है, उनको सही चीजें बताना और अवगत करवाना है.

नारी शक्ति  को महमारी तले नही दबाया जा सकता।

ऐसा नहीं है कि इस दिशा में हमारी सोच नहीं बदली है, बहुत हद तक सुधार हुआ है लेकिन और सुधार की जरूरत है। खासकर पीरियड्स को धर्म से जोड़ने वाले मुद्दे पर। इसके लिए सभी को आगे आने की जरूरत है।धरती मातृस्वरूप हैं यानी महिला हैं। जन्म के समय भी यही लाल रंग का खून लगता है। ऐसे में तो पूरी दुनिया ही अपवित्र है। गंगा स्नान भी इस अपवित्र मानसिकता से दूर नहीं कर सकता। क्योंकि गंगा भी तो मां हैं। इसलिए नजरिया में बदलाव की जरूरत है। महिलाओं को विचारों में भी सम्मान देने का वक्त आ गया है। पुराने समय में पीरियड के दौरान धार्मिक स्थलों पर प्रवेश या पूजन अनुष्ठान में महिलाओं को दूर रहने की सलाह दी जाती थी। आज के परिप्रेक्ष्य में इसको देखने और समझने की जरूरत है।

आर्ट एंड क्राफ्ट की दुनिया में रोशनी डालती ये संस्थान।

संस्थान का  दूसरा सैक्शन, आर्ट एंड क्राफ्ट का है जिसमे  आर्ट एंड क्राफ्ट से बच्चों का सर्वगीण विकास होता है। ये संस्थान आर्ट एंड क्राफ्ट के  प्राइमरी एजुकेशन को ले कर है, सरकारी या ग़ैरसरकारी , बच्चों में आर्ट को लेकर आज भी उतनी जानकारी नही दी जाती.आर्ट एक्टिविटीज एक ऐसी एक्टिविटीज है जिसमें कागज पर किसी आकृति को उकेरा जाता है , जिसमें बच्चों का मन तो खूब लगता ही है  साथ ही साथ यह मन की एकाग्रता, कंसंट्रेशन को बढ़ाने में काफी कारगर सिद्ध हुआ है।  उनको बिहार के आर्ट को लेकर जागरूक करवाना है ,वो आर्ट में भी एक विकल्प हो सकता है उनके भविष्य में ये बताना है. आर्ट एक्टिविटीज जहां बच्चों में एकाग्रता बढ़ाती है वही उनके मानसिक विकास में भी बहुत योगदान करते हैं आर्ट एक्टिविटी से बच्चों में सोचने की क्षमता का विकास होता है तथा कलर कॉन्बिनेशन के बारे में भी बच्चे सीखते हैं किसी चीज को देखकर फिर उसके बारे में सोच कर उसको कला के रूप में मूर्त रूप करना उनमें क्रिएटिविटी और सृजनात्मकता को जन्म देता है

Malda Aam

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