दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाली बिहार की बेटी- निरुपमा पांडे

माउंट एवरेस्ट धरती का सबसे ऊंचा शिखर माना जाता है। यहां पहुंचना किसी व्यक्ति विशेष के लिए तो क्या बल्कि पूरे देश के लिए बहुत सम्मान की बात होती है। इसीलिए इसे फतह करने के लिए हर साल दुनिया के कोने-कोने से खूब पर्वतारोही आते तो हैं। लेकिन इनमें से कुछ ही इरादे सफल हो पाते हैं बाकिओं के हाथ सिर्फ निराशा लगती है। क्योंकि उस शिखर पर चढ़ाई करने के लिए हिम्मत साहस के साथ- साथ एक बेहद मजबूत इरादे की जरूरत पड़ती है। माउंट एवरेस्ट को फतह करने का एक ऐसा ही सपना देखा बिहार की एक छोटे से गांव की बेटी ने। इस सपनों को पूरा करने के लिए इस बेटी ने अपना पूरा दमखम लगाया और तब तक नहीं रुकी जब तक एवरेस्ट के शिखर पर तिरंगा फहरा नहीं दिया। हम यहां बात कर रहे हैं बिहार के सिवान जिले के जामो गांव में जन्मी- निरुपमा पांडेय की।

एवरेस्ट को फतह करने वालीं वह बिहार की अब तक की एकमात्र शख्सियत हैं। उन्होंने 25 मई 2011 को दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर माउंट एवरेस्ट पर बिहार की ओर से भारत का तिरंगा लहराया। निरुपमा की इस उपलब्धि के साथ ही बिहार देश का ऐसा 13वां राज्य बन गया है, जहां के लोगों ने एवरेस्ट पर चढ़ाई पूरा करने का गौरव हासिल किया है।

निरुपमा के पिता का नाम श्री राजेंद्र पांडे और माता का नाम श्रीमती उमा पांडे है। अगस्त 2009 में निरुपमा पांडे ने स्क्वाड्रन लीडर प्रकाश झा से शादी की जो मधुबनी बिहार के बेनीपट्टी के रहने वाले हैं। इन दोनों का एक 10 साल का बेटा भी है।

इंडियन एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर हैं निरुपमा-

भारत को पुरुष प्रधान देश माना जाता है। यहां सेना में पुरुषों का दबदबा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों से यह मिथक टूट रहा है। एयरफोर्स से लेकर बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) और आईटीबीपी (इंडो-तिब्बत बार्डर पुलिस) में महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। लेकिन अभी इनका अनुपात पुरुषों की अपेक्षा काफी कम है। इन हालातों में विकास की दौड़ में काफी पीछे चल रहे बिहार की कोई बेटी अपने लिए सैन्य क्षेत्र को चुने तो इसे उसका हौसला और मजबूत जज्बा ही कहेंगे। सिवान जिले के छोटे से गांव जामो की रहने वाली निरुपमा पांडेय ने महिलाओं के लिए चुनौती माने जाने वाले इंडियन एयरफोर्स को 2003 में अपने करियर के तौर पर चु

ना। निरुपमा ने एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर नौकरी ज्वाइन कर महिला सशक्तिकरण का जबर्दस्त उदाहरण पेश कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे बिहार का गौरव बढ़ाया।

कॉलेज के दिनों से ही था ट्रैकिंग का शौक-

निरुपमा को कॉलेज के दिनों से ही ट्रैकिंग का काफी शौक था। यही वजह थी कि उन्होंने कॉलेज में नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) को भी ज्वाइन किया था। पहले निरुपमा भी अन्य लड़कियों की तरह किसी मल्टी नेशनल कंपनी में मोटे पैकेज की आरामदेह नौकरी करना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने केन्द्रीय विद्यालय पुणे से अपनी स्कूल की शिक्षा पूरी करने के बाद नेस वडिआ कॉलेज ऑफ कॉमर्स, पुणे से एमबीए की पढ़ाई पूरी की, लेकिन इसी दौरान उनकी सोच बदल गई। उन्होंने अपने अन्य साथियों की तरह किसी कंपनी में नौकरी करने की बजाए इंडियन एयरफोर्स में जाने का रास्ता चुना। एयरफोर्स ज्वाइन करने के बाद निरुपमा ने दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर को फतह करने का लक्ष्य बनाया। इसके लिए वर्ष 2007 से उन्होंने नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग उत्कर्ष में एडमिशन लिया और ट्रैकिंग की ट्रेनिंग शुरू कर दी। 4 साल की कड़ी मेहनत और बढ़िया प्रशिक्षण के बाद आखिरकार 25 मई 2011 को उन्होंने अपने सपने की तस्वीर में सफलता का रंग भरते हुए एवरेस्ट के शिखर पर तिरंगा फहरा दिया। उन्होंने और भी कई शिखरों को फतह किया है। उनकी अन्य चढ़ाई लेह में माउंट स्टोक कांगरी (6121 मीटर) और माउंट गुलाब कांगरी (6100 मीटर), गढ़वाल में माउंट कामेट (7757 मीटर) और माउंट अभिगामिन (7357 मीटर) और लद्दाख में माउंट सेसर कांगरी (7672) मीटर शामिल हैं।

सीएम नीतीश कुमार ने सम्मान से नवाजा-

बिहार की बेटी के अदम्य साहस को पूरी दुनिया के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सलाम करते हुए उन्हें “अति विशिष्ट खेल पुरस्कार” से नवाज कर उनकी हौसला अफजाई की।

Malda Aam

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