जानिए कैसे हुई मजदूर दिवस की शुरुआत और फिलहाल क्या है स्थिति

जानिए कैसे हुई मजदूर दिवस की शुरुआत और फिलहाल क्या है स्थिति

1 मई को पूरे दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है। 132 साल से इस दिन को मजदूरों के लिए मनाया जाता है। इस दिन को लेबर डे, श्रमिक दिवस, मजदूर दिवस और मई डे के नाम से भी जाना जाता है। मजदूर दिवस का दिन ना केवल श्रमिकों को सम्मान देने के लिए होता है, बल्कि इस दिन मजदूरों के हक के प्रति आवाज भी उठाई जाती है। जिससे कि उन्हें समान अधिकार मिल सके। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस दिन की शुरुआत कैसे और क्यों हुई थी? आज का हमारा लेख इसी विषय पर आधारित है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि अंतरष्ट्रीय मजदूर दिवस क्यों मनाते हैं?

कैसे हुई मजदूर दिवस की शुरुआत –

1 मई 1886 को अमेरिका में मजदूरों ने एक आंदोलन की शुरूआत की थी। इस आंदोलन में अमेरिका के मजदूर सड़कों पर आ गए थे और वो अपने हक के लिए आवाज बुलंद करने लगे। उनकी मांग काम के घंटे को 15 घंटे से घटाकर 8 घंटे करने की थी। आंदोलन के बीच में मजदूरों पर पुलिस ने गोली चला दी और कई मजदूरों की जान चली गई। वहीं 100 से ज्यादा श्रमिक घायल हो गए। इस आंदोलन के तीन साल बाद 1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन की बैठक हुई। जिसमे तय हुआ कि हर मजदूर से केवल दिन के 8 घंटे ही काम लिया जाएगा। इस सम्मेलन में ही 1 मई को मजदूर दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही हर साल 1 मई को छुट्टी देने का भी फैसला लिया गया। अमेरिका में श्रमिकों के आठ घंटे काम करने के नियम को लागू करने के बाद कई देशों ने इस फैसले का स्वागत किया और इस नियम को अपनाया।

भारत में कब हुई शुरूआत-

अमेरिका में भले ही 1 मई 1889 को मजदूर दिवस मनाने का प्रस्ताव आ गया हो। लेकिन भारत में करीब 34 साल बाद यह प्रस्ताव पारित हुआ। भारत में 1 मई 1923 को चेन्नई से मजदूर दिवस मनाने की शुरूआत हुई। लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान की अध्यक्षता में ये फैसला लिया गया। इस बैठक को कई सारे संगंठन और सोशल पार्टी का समर्थन मिला। जो मजदूरों पर हो रहे अत्याचारों और शोषण के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। इसका नेतृत्व वामपंथी कर रहे थे।

क्या है मजदूर दिवस का उद्धेश्य-

1 मई को हर साल मजदूर दिवस मनाने का उद्धेश्य मजदूरों और श्रमिकों की उपलब्धियों का सम्मान करना और योगदान को याद करना है। इसके साथ ही मजदूरों के हक और अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करना और शोषण को रोकना है। इस दिन बहुत सारे संगठनों में कर्मचारियों को एक दिन की छुट्टी दी जाती है।

बिहार में मजदूरों की क्या है स्थिति-

उत्तर प्रदेश के बाद बिहार देशभर में सबसे सस्ते मजदूर मुहैया कराने वाला दूसरा बड़ा राज्य है। बिहार मूल के लगभग 36.06 लाख लोग महाराष्ट्र, यूपी, पश्चिम बंगाल, गुजरात, पंजाब और असम में रहते हैं। ये बिहारी मजदूर कई बार दूसरे राज्यों में हिंसा का शिकार हुए और डर कर बिहार लौटे, लेकिन बिहार सरकार इनके लिए रोजगार मुहैया नहीं करा सकी, नतीजतन इन्हें वापस उन्हीं राज्यों का रुख करना पड़ा, जहां से ये भागे थे। एक समय में बिहार में फैक्ट्रियों की प्रगाढ़ संख्या थी- जिसमें चीनी उद्योग, जूट उद्योग, कागज उद्योग, सूत और सिल्क उद्योग का जाल बिछा हुआ था। लेकिन सरकारों द्वारा योजनाओं के चयन में गलती, भ्रष्टाचार तथा उचित देखरेख के अभाव के चलते इनकी स्थिति खराब होती चली गई। और बंद हो गईं। जिसकी वजह से मजदूरों को भी रोजगार के लिए अपना घर छोड़कर दूसरे राज्यों में काम तलाशना पड़ा।

Don’t Want to miss anything from us

Get Weekly updates on the latest Beats from
Bihar right in your mail.