एक ग्रामीण महिला जिसे असाधारण कलात्मक कौशल का आशीर्वाद प्राप्त था - गंगा देवी

एक ग्रामीण महिला जिसे असाधारण कलात्मक कौशल का आशीर्वाद प्राप्त था – गंगा देवी

आज मधुबनी पेंटिंग भारतीय आदिवासी और लोक कला का प्रतीक है। जबसे मधुबनी पेंटिंग गांव के घरों की दीवारों से निकलकर कागज पर बनने लगीं तब से यह मुख्यधारा में काफी प्रचलित हुई। क्योंकि कागज एक जगह से दूसरी जगह आसानी से जा सकते थे। कागजों पर बनी मधुबनी पेंटिंग लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित करने लगी। लेकिन मधुबनी पेंटिंग को मुख्यधारा में लाना इतना आसान नहीं था। यह कई लोगों की कड़ी मेहनत का नतीजा है कि आज मधुबनी पेंटिंग सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में चर्चित है। गंगा देवी उन कुछ महिलाओं में से एक थीं जिन्होंने मधुबनी पेंटिंग को पहचान दिलाने के आंदोलन का बीड़ा उठाया।

गंगा देवी का जन्म 1928 में मधुबनी जिला के रसीदपुर गांव में कायस्थ परिवार में हुआ था। वह बिहार के मिथिला क्षेत्र के एक बहुत छोटे से गाँव में रहती थीं। वह गर्भधारण नहीं कर सकती थी इसलिए उनके पति ने उन्हें छोड़कर किसी और महिला से शादी कर ली थी। एक घरेलू लड़ाई में उन्होंने अपने पति की दूसरी पत्नी के लिए अपना सब कुछ खो दिया। लेकिन उनकी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। एक फ्रांसीसी कला संग्राहक उनके दरवाजे पर आया और उसने उन्हें एक कागज देकर उनके लिए कुछ पेंटिंग बनाने को कहा। जो पैसे वह उन्हें दे रहा था वह उनके जिविकोपार्जन के लिए काफी था। धीरे- धीरे उनके कला की मांग बढ़ने लगी। इसलिए वह दिल्ली आ गईं। वहां उन्होंने कमीशन पर काम करना शुरू किया।

गंगा देवी के कुछ महत्वपूर्ण कलाकृतियां-

रामायण पेंटिंग-

हम सभी रामायण की कथा सुनते हुए बड़े हुए हैं। इसी को गंगा देवी ने अन्य लोककथाओं के साथ एक श्रृंखला में चित्रित किया है। वह बहुत नियंत्रित तरीके से पेंटिंग बनाती थीं। आमतौर पर पेंटर अपने चित्रों में खूब चटकीले रंगों का प्रयोग करते हैं वहीं गंगा देवी सिर्फ सूक्ष्म रंगों का उपयोग करती थीं। वह बहुत साफ और स्वच्छ चित्र बनाती थीं। वह सीमित जगह में कई सारे सीन्स को बेहद सलीके से सजाती थी।

मानव जीवन (लाइफ आफ मैनकाइंड सीरीज)-

इस सीरीज में आप गंगा देवी के कला का जादू देख सकते हैं। इस सीरीज में इन्होंने ग्रामीण महिला के जीवन- चक्र को चित्रित किया है। औरत के जन्म से उसके किशोरावस्था प्राप्त करने तक, उसके विवाह से गर्भवती होने तक, सारे रस्मों से गुजरते हुए एक बच्चे को जन्म देने तक का चक्र उन्होंने इस पेंटिंग में बनाई है। उनकी पेंटिंग समय और स्थान के सांस्कृतिक ताने-बाने का एक प्रकार का दस्तावेज बन गईं।

गंगा देवी और अमेरीका-

उनके कार्यों को तब असली पहचान मिली जब उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों की यात्रा की। जो उन्होंने देखा वह उनके लिए बहुत नया था। वहां उन्होंने जो भी देखा उसे एक सीरीज के रूप में चित्रित किया। ये सीरीज पूर्वी कला और पश्चिमी दृश्य का एक अनोखा संगम थे। उन्होंने अपनी और भी कई यात्राओं का चित्रण अपने पेंटिंग्स द्वारा किया है। जैसे- उत्तराखंड में बद्रीनाथ की यात्रा। गंगा देवी कैंसर जैसी भयावह बिमारी को भी अपनी सकारात्मकता से मात दी। अपनी इस जंग पर भी उन्होंने एक सीरीज चित्रित की है। मिथिला पेंटिंग में उन्हें सुधरकर प्रयास के लिए नेशनल अवार्ड्स फाॅर क्राफ्ट्स से सम्मानित किया गया था। कला जगत में अस्मरणीय योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा 1984 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। उनकी मृत्यु 1991 में हुई।

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