इन 10 किताबों के पन्नों में छलकता है हमारा बिहार।

इन 10 किताबों के पन्नों में छलकता है हमारा बिहार

किताबे सभ्यता की वाहक हैं। किताबों के बिना इतिहास मौन है, साहित्य गूंगा हैं, विज्ञान अपंग हैं, विचार और अटकलें स्थिर है। ये परिवर्तन का इंजन हैं, विश्व की खिड़कियां हैं, समय के समुद्र में खड़ा प्रकाशस्तंभ हैं।

1. रूकतापुर (पुष्यमित्र)

‘रुकतापुर’  काफी चर्चित पुस्तक है जो  बिहार  के वंचित समाज के हालात को बयां करती इस किताब को लेखक, पत्रकार पुष्यमित्र  ने लिखा है. इसमें हालात का तथ्यपरक विश्लेषण  किया गया है. यह किताब इसलिए भी खास है कि इसमें बिहार के उन आम लोगों के हालात को कलमबंद किया गया है, जो विकास के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रयत्‍नशील तो हैं, मगर उनकी राहों में कितनी ही बाधाएं हैं. इसके बहाने बिहार के वंचित तबके की कहानियों को शब्‍द दिए गए हैं और सच को सामने लाने का प्रयास किया गया है.

2.  गंगा और बिहार ( पंकज मालविया)

गंगा जी की बिहार यात्रा के स्वर्णिम अतीत और वर्तमान दशा के साथ समस्या और उसके समाधान की दिशा में बिहार के ‘ राज और समाज ‘ के प्रयास को समझने की कोशिश की गई है। गंगा हो अथवा कोई अन्य नदी, तालाब हो या कोई अन्य पारम्परिक जल श्रोत, उनकी सफाई का मसला हमारी नीयत से जुड़ा है। नीयत की इस कसौटी पर हम अपनी धार्मिकता और गंगा जी के प्रति अपनी श्रद्धा को कसकर देख सकते हैं। सेवा का फल त्याग और समर्पण से जुड़ा है।

3.राग बिहारी ( राकेश वर्मा) 

एक ऐसी किताब जो राजनीति और भ्रष्टाचार के उन पहलुओं को उजागर करती है जिससे जनता आमतौर पर त्रस्त और अंजान है ।बिहार के गांवों ही नहीं शहरों में भी जातिवाद जैसी कुरीति ने सामाजिक और राजनीतिक ढांचे को दीमक की तरह खोखला कर रखा है ।लेखक ने इस हकीकत को बखूबी बयान किया है जिसे पढकर आज के युवा वर्ग का मन सवालों से घिर जाता है कि हम विश्व गुरु बनने की ,विकास कीऔर डिजिटल इंडिया बनाने की जुमले बाजी चाहे जितनी करें लेकिन आज भी जांत-पांत की हमारी घटिया सोच सौ साल पुरानी ही है । वोट बैंक की राजनीति ने धर्म सम्प्रदाय की आग में घी डालने का काम किया है ।

4. बिहार कयोस टू कयोस (अनिल कुमार सिंह)

यह पुस्तक विभिन्न शासनों के तहत राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक मानकों में राज्य की तेजी से गिरावट के इर्द-गिर्द घूमती है। यह पाठक को बिहार में शासन करने वाले राजनीतिक दलों की गहन विश्लेषणात्मक तुलना भी प्रदान करता है। यह सब विद्वानों की सहायता के लिए विस्तृत फुटनोट के साथ किया गया है।

5.बिहार क्रॉनिकल्स (शशांक शेखर) 

बिहार की सांस्कृतिक विरासत और राजनीतिक इतिहास में ऐतिहासिक दृष्टिकोण में रुचि रखने वाले किसी भी पाठक के लिए शशांक शेखर द्वारा घटनाओं का यह एक महत्वपूर्ण संकलन है। अक्सर गैर-आलोचनात्मक धार्मिकता, पेंटिंग और संगीत की भूमि के रूप में चित्रित, श्री शेखर काफी धार्मिक सहिष्णुता सहित बिहार की संस्कृति और कला की लंबी परंपरा को सामने लाते हैं। पुस्तक को खूबसूरती से लिखा गया है और प्रत्येक अध्याय को पढ़ने में आनंद आता है। बिहार के महान लोगों द्वारा बिहार के बहादुर, दार्शनिक और सांस्कृतिक योगदान की एक विस्तृत श्रृंखला।

6. लास्ट अमोंग इक्वल्स ( एम आर शरण) 

लास्ट अमंग इक्वल्स गाँव की राजनीति की असाधारण स्पष्टता और जटिलता को दर्शाता है, जिसे बिहार मनरेगा वॉच के लेंस के माध्यम से देखा जाता है, और यह बड़े राजनीतिक प्रवचन का एक प्रतिरूप है। एम.आर. शरण संवेदनशीलता और गहरी समझ के साथ कथा को एक साथ रखते हैं, उल्लेखनीय मनुष्यों की यात्रा का पता लगाते हैं जो विशेषाधिकार के लिए पैदा नहीं हुए हैं। यह हमें बताता है कि लोग, सांख्यिकी और सिद्धांत नहीं, सत्ता और जाति की राजनीति को आकार देते हैं। असमानता और अन्याय से परेशान सभी के लिए यह उत्कृष्ट पुस्तक अमूल्य है।

7. पटना : खोया हुआ शहर (अरुण सिंह) 

 इस पुस्तक में हमारे पुराने शहर पटना की विरासत और महत्व को समझने के लिए यह एक अच्छी किताब है।

चीजें इतनी बदल गई हैं कि आज पटना के गौरवशाली अतीत की कल्पना करना सबसे असंभव है।पुस्तक में केवल 500 पुराने इतिहास को शामिल किया गया है। लगभग 2000 साल की तुलना भी देखना पसंद करेंगे।

8. जब नील का दाग मिटा (पुष्यमित्र)

यह पुस्तक गांधी के चम्पारण आगमन के पहले की उन परिस्थितियों का बारीक ब्यौरा भी देती है, जिनके कारण वहाँ के किसानों को अन्तत: नीलहे अंग्रेजों का रैयत बनना पड़ा। इसमें हमें अनेक ऐसे लोगों के चेहरे दिखलाई पड़ते हैं, जिनका शायद ही कोई जिक्र करता है, लेकिन जो सम्पूर्ण अर्थों में स्वतंत्रता सेनानी थे। इसका एक रोचक पक्ष उन किम्वदन्तियों और दावों का तथ्यपरक विश्लेषण है, जो चम्पारण सत्याग्रह के विभिन्न सेनानियों की भूमिका पर गुजरते वक्त के साथ जमी धूल के कारण पैदा हुए हैं। सीधी-सादी भाषा में लिखी गई इस पुस्तक में किस्सागोई की सी सहजता से बातें रखी गई हैं, लेकिन लेखक ने हर जगह तथ्यपरकता का खयाल रखा है। 

9. मगही कल्चर ( ए मैत्रा) 

मनुष्य की संस्कृति या संस्कृति या जनसंख्या में भिन्नता में इस विविधता का खुलासा सामान्य रूप से अनुसंधान मानवविज्ञानी और विशेष रूप से सामाजिक या सांस्कृतिक मानवविज्ञानी के लिए एक बड़ी चुनौती का प्रतिनिधित्व करता है। उस चुनौती के अनुरूप, यह खंड मगही क्षेत्र के लोगों के जीवन और संस्कृति को समझने की कोशिश करता है- (वर्तमान बिहार के सांस्कृतिक-भाषाई क्षेत्रों में से एक) जिसमें सांस्कृतिक क्षेत्र दृष्टिकोण के साथ-साथ संग्रह के लिए बहु-अनुशासनात्मक दृष्टिकोण शामिल है। आंकड़े। अपनी सीमाओं के भीतर, यह समग्र रूप से मगही-संस्कृति का निर्माण करने का प्रयास करता है जो स्वयं भारतीय सभ्यता के ग्रामीण आयाम को दर्शाता है।

10. जुलूस (फणीश्वर नाथ रेणु)

जूलूस बिहार के गोरियार गांव के सामाजिक प्रतिमान में बदलाव पर आधारित एक उपन्यास है जब बंगाली हिंदुओं का एक समूह पूर्वी पाकिस्तान से एक उपनिवेश में रहने के लिए आता है। यह उपन्यास भी आँचलिक शैली में लिखा गया है जिसके लिए लेखक प्रसिद्ध है।
ये सभी पुस्तक बिहार के एतिहासिक, राजनैतिक , सामाजिक गुणों को दर्शाता है, वैसे तो हमारे राज्य बिहार की सांस्कृतिक पृष्टभूमि पे अनगिनत पुस्तक लिखी गई है , हमारे समीक्षा येवम हमारे खोज के आधार पे हमने ये पुस्तकों का संकलन किया है।

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