साहित्यकार, नाटककार, अभिनेत्री और कैंसर पर फ़तेह पाने वाली विभा रानी की प्रेरणात्मक कहानी

“किसी भी रचनाकार, चाहे वह कोई कवि-कहानीकार हो या नाटककार, उसका काम निष्कर्ष देना नहीं होता। वह कई स्तरों पर विषय को विश्लेषित करते हुए एक ऐसे बिंदु पर पहुंचता है कि लगे मानो वह कोई संदेश देना चाहता है, लेकिन यह काम वह पूरी संवेदनशीलता और गहरी प्रतिबद्धता के साथ करता है।”

ये कहना है रंगकर्मी एवं नाट्य लेखिका विभा रानी का।

यह विश्वव्याप्त है कि बिहार ने कला विधा में अनेक बहुमुखी प्रतिभाओं को जन्म दिया है और आज हम बात करने वाले हैं  29  मार्च  1959 यानी आज ही के दिन जन्मीं एक ऐसी  नायिका, लेखिका, कलाकार और कवयित्री विभा रानी की। बिहार के मधुबनी जिले में आँखें खोलने वाली विभा रानी एक सफल रंगकर्मी , नाट्य लेखिका और बॉलीवुड अदाकारा बन कर अपनी पहचान बना चुकी है। विभा रानी को बचपन से ही कला से अधिक लगाव रहा। अपनी प्रारंभिक शिक्षा मधुबनी जिले से पूरा कर, उन्होंने एमए के लिए दरभंगा की ओर रुख किया।पढ़ाई के साथ – साथ लिखने का शौक था और एक तमन्ना कि भावों को व्यक्त करने का तरीका सीखना है ।

माता -पिता दोनों पेशे से शिक्षक थे तो घर से पढ़ाई पर रोक नहीं था, मगर उस वक़्त में समाज में लड़कियों की शिक्षा को लेकर बड़े बंधन थे, विभा जी अपने उस वक़्त को याद करते हुए बताती है,

“जब मैं दिल्ली जाने वाली थी तो लोग माँ को कहने लगे कि जवान बेटी को बाहर मत भेजो और रिक्शे पर लदा हुआ मेरा सामान उतरवा दिया था।”

आगे सीखने के हौसले के साथ 1984 में कलकत्ता , फिर 1987 में दिल्ली और 1989 में मुंबई की ओर उनके कदम बढ़ते चले गए, जहाँ से उन्होंने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। दौर था अस्सी के दशक का जब, एक लड़की के लिए अपने सपनों को जीना और उच्च शिक्षा प्राप्त करना किसी चुनौती से कम नहीं था।’मिथिला  की  कथाएं ‘ और ‘ गोनू झा के किस्से ‘ जैसी कहानियां लिखने वाली विभा रानी ने एमए करते हुए आकाशवाणी के लिए ड्रामा लिखना शुरू किया,  जिसे वह ख़ुद अपनी आवाज़ में सुनाने गईं लगीं। वहीं से उनका जुड़ाव थिएटर से हुआ।

 

 

“ज़िन्दगी में कुछ करना हो तो रास्ते अपने आप निकल आते है, ये नहीं तो वो सही , मगर ठहरना नहीं चाहिए।”

 

 

शादी के लिए विभा जी के घरवालों ने कई रिश्ते देखें, मगर कोई सूरत, तो कोई पैसा जैसे कारणों से मना कर देते। इस के बाद उन्होंने रूढ़िवादी सोच से लड़कर   अपनी पसंद से अंतर-जातीय विवाह करने का फैसला लिया जो कि उस समय में काफ़ी संघर्षमयी था। 1984 में विभा रानी ने अजय ब्रह्मात्मज से शादी की , जो कि एक जाने- माने फिल्म पत्रकार है।

शादी और करियर का तालमेल अच्छा था कि अचानक साल 2013 में  विभा रानी को मालूम चला कि वह ब्रैस्ट कैंसर से पीड़ित है।पति और बेटियों का चेहरा देखती और खुद के बारे में सोचती , कैंसर ने घर का माहौल ही बदल दिया। उनके घरवाले डर गए।

“2013 में मुझे मालूम हुआ कि मुझे कैंसर है। घर में पति और बेटियां परेशान रहने लगे मगर तब उस वक़्त मैंने ख़ुद को मजबूत बनाया और जो मेहनत और जुनून पहले दस प्रतिशत थे वो सौ हो गए और अंततः मैंने कैंसर पर जीत हासिल की। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं इसका सामना हँस कर करूँ या रो कर करूँ मगर मझे लगता है कैंसर आपको ज़िन्दगी के प्रति निडर बनाता है”

और वहाँ विभा जी के जज़्बे ने उन्हें कैंसर जैसी जटिल बीमारी से निजात दिलाया और विभा जी के हौसले में नया अध्याय जुड़ गया।आज वह कैंसर के खिलाफ लोगों को अनेक तरीके से जागरूक करती आ रही है। विभा जी कैंसर से पीड़ित लाखों लोगों के लिए मिसाल बनकर  ‘सेलेब्रटिंग कैंसर’ नामक कैंपेन चला रहीं हैं और 2016 में इस नाम से उनकी कविता संग्रह भी प्रकाशित हुई।

आज एक ‘कॉरपोरेट ट्रेनर’ का काम कर रही विभा जी थिएटर को सिखाने का माध्यम बना चुकी है। पटनाबीट्स से बातचीत दौरान विभा जी कहती हैं,

 

“बिहार में प्रगति की नयी लहर है और आज हमारे मिथलांचल से मधुबनी जैसे कई आर्ट निखर के आ रहे हैं। थिएटर में भी लोगों का रुझान देखने को मिल रहा है। लेखनी और कला में बिहार आज के समय में वृद्धि कर रहा है लेकिन लड़कियों को लेकर अभी भी चीज़ों को सुधरना बाकी है”

मैथिली और हिंदी में विभा जी की 20 किताबें छप चुकी है, जिनमें कहानियों और नाटकों का समावेश है। लोक गीत , लोक संस्कृति को दर्शाती कहानियों ने विभा रानी को एक राष्ट्रीय पहचान दी है। विभा जी हिंदी के साथ – साथ मैथिली में दुनिया भर में थिएटर और नाटक करती आ रही हैं। आगे बढ़ने के जूनून ने विभा के सपनों को पहिया लगाया और वह कथा अवार्ड , मोहन राकेश सम्मान , घनश्याम  सराफ  साहित्य सम्मान , डॉ माहेश्वरी  सिंह ‘महेश ‘ सर्वोत्तम साहित्य  सम्मान और साहित्यसेवी सम्मान जैसे अनेक उपलधियों से नवाजी गयीं।राष्ट्रीय स्तर पर एक लेखिका , कवयित्री , रेडियो होस्ट  बनकर अपनी पहचान बनाने के बाद ,विभा रानी ने चिठ्ठी और धड़क जैसी बॉलीवुड फिल्मों में काम किया ।

 

विभा रानी के जन्मदिन के अवसर पर पटनाबीट्स उन्हें शुभकामनाएं देता है एवं उनके जज़्बे को सलाम करता है।

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