बिहार की रितु झा की किताब की मांग देश से बाहर भी

Lord Baden Powell National Award -2016 से सम्मानित बिहार के RAF के  Second-In -Commandant अश्विनी झा के पत्नी रितु झा द्वारा लिखी गयी काव्य संग्रह की पुस्तक “तरंग” की बुकिंग देश से बाहर के भी लोग कर रहे है। रितु झा द्वारा 73 कविताओं की लिखी गयी पुस्तक का नाम “तरंग” है। तरंग में आपको इंसानियत, प्रेम, भाईचारा, देशप्रेम जैसी कवितायेँ मिलेंगी।

बिहार की बहु रितु झा कोलकाता की रहने वाली हैं। उनकी शिक्षा-दीक्षा कोलकाता में ही हुई। ग्रेजुएसन के बाद इनकी शादी बिहार के अश्विनी झा से हुई। रितु झा अभी जमशेदपुर के बीबीद भारती की एलाउंसर हैं। झा आकाशवाणी की एंकर भी रह चुकी है।

रितु झा PatnaBeats से बातचीत के दौरान बतायी कि वो स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, गांधी जयंती जैसे मौके पर आर्टिकल लिखती थी। उन्होंने कहा कि आकशवाणी में एंकरिंग के दौरान मन में ख्याल आया की आर्टिकल को कविता के रूप में लिखूँ, कविता आर्टिकल से कम शब्दों में होगा जिससे पाठकों को पढ़ने में मजा आयेगा। कविताओं का अर्थ ही हैं कम शब्दों में बड़ी बात कहना, मेरी कविता सिंपल भाषा में हैं। किसी घटना के घटना घटित होने के बाद मेरे जीवन में वो कविता बन कर उभरती है। जैसे पिछले साल हुयी पेशावर में हुयी बच्चों के साथ घटना जब मैं टीवी पर देख रही थी वो कविता बन कर उभरी।

उसके कुछ पंक्तिया ये हैं:-

वो इस देश में हो
या उस देश में
रहता तो इंसान ही है
जमीन चाहे यहाँ की हो
या वहाँ की
बँटा तो इंसान ही है
गोली चाहे इधर से चले
या उधर से
मरता तो इंसान ही है
घर चाहे यहाँ जले या वहाँ
रोता तो इंसान ही है
दहशत चाहे यहाँ हो चाहे वहाँ
झेलता तो इंसान ही है
जवान चाहे यहाँ के हो
या वहाँ के
शहीद तो होता इंसान ही है
जीत हमारी हो या उनकी
हारता तो इंसान ही है
पूछो एक बार क्या रज़ा है
अवाम-ए-हिन्दुस्तान
और पाकिस्तान की
चंद लोगो के हाथों का खिलौना आखिर बना तो इंसान ही है

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