इस बार छठ छूट न पाए | अपनी परंपरा बचाये रखने की सीख देता ये वीडियो “कबहू ना छूटी छठ”

दिवाली की रात के बाद की ही सुबह से हवाओं में हल्की ठण्ड के साथ छठ की आहट आने लगती है। चारो ओर की चहल पहल इस महापर्व के नज़दीक आने का इशारा करने लगती है। लोगों में तो उत्साह और हर्षोल्लास की लहर होती ही है इसके साथ साथ मौसम भी एक सुहानी अंगड़ाई ले कर मानो छठ का स्वागत कर रहा होता है। ऐसे ही माहौल को और छठमय बनाने नितिन चंद्रा और उनकी निओ बिहार की टीम पिछले साल के जैसे इस बार भी छठ के उपलक्ष्य में छठ का एक नया वीडियो ले के आये हैं।

“कबहू ना छूटी छठ”, ये नाम है इस गाने का। क्रांति प्रकाश झा और क्रिस्टीन ज़ेडएक ने इस बार भी अपने अभिनय से मन मोह लिया है। इस गाने में चार चाँद लगाया है हिंदी और भोजपुरी संगीत की दो महान आवाज़ें अल्का याग्निक और भरत शर्मा व्यास ने। छठ के कालजयी गानों की लड़ी में इस गाने ने एक और कड़ी जोड़ दी है।

इस गाने में बात की गयी है हमारी इस परंपरा को ख़त्म न होने देने की। आज के दौर में जहाँ लोगों की प्राथमिकतायें कृत्रिम और अपनी जड़ों से दूर करने वाली चीज़ों की तरफ मुड़ गयी है वहाँ ज़रूरत है कि अपनी मिट्टी की ख़ुश्बू देने वाली इस विरासत को हम सहेज के रखें। वो बात जो इस त्यौहार को इतना ख़ास बनाता है वो ये है कि इसमें अमीरी-गरीबी, जाति-धर्म, पुरुष- महिला का भेद नहीं होता है। बिहार और हमारे पुरे देश को इस से बेहतर सन्देश देने वाला दूसरा त्यौहार शायद ही कोई हो। ये एक तरह से बुनियाद है हमारे व्यक्तिगत आदर्शों और उस आदर्श समाज की जिसकी हम कामना करते हैं। इन सब को ध्यान में रखते हुए ये सुनिश्चित करना ज़रूरी हो जाता है कि वक़्त के साथ आगे बढ़ने की होड़ में छठ पीछे ना छूट जाये।

तो हम सबको ये ध्यान रखना होगा कि हम अपनी इस विरासत को अपनी ज़िन्दगी में अहमियत दें। जो घर से दूर हैं उनको ये छठ घर बुलाती है। और अगर घर न भी आ पाएं तो जहाँ भी हों इस छठ की भावना को दिल में बचाये रखें।

 

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Quote of the day: “When faced with a challenge, look for a way, not a way out.” 
― David Weatherford 

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